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The Grand Conclusion of Chaitra Navratri: पतंजलि योगपीठ में नारी शक्ति का महापर्व चैत्र नवरात्रि पर बाबा रामदेव बोले – “नारी सम्मान ही सनातन जागरण का मूल है”

The Grand Conclusion of Chaitra Navratri: पतंजलि योगपीठ में नारी शक्ति का महापर्व चैत्र नवरात्रि पर बाबा रामदेव बोले – “नारी सम्मान ही सनातन जागरण का मूल है”

हरिद्वार। चैत्र नवरात्रि 2026 का भव्य समापन आज पतंजलि योगपीठ में हुआ। नारी शक्ति के सम्मान और सनातन संस्कृति के जागरण का यह महापर्व देखते ही बनता था। अष्टमी और महानवमी के पावन अवसर पर पतंजलि योगपीठ परिसर में कन्या पूजन (कंजक पूजन) और कन्या भोज का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों छोटी-छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर पूजा गया।

पूरे परिसर में भक्ति, श्रद्धा और सनातन संस्कृति की दिव्य झलक दिखाई दे रही थी। सुबह से ही योगपीठ में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। कन्याओं को माँ दुर्गा का स्वरूप मानकर उनके चरण धोए गए, आरती उतारी गई, तिलक लगाया गया और उन्हें नए वस्त्र, उपहार तथा सात्विक भोजन कराया गया। इस दौरान नन्हीं कन्याओं के चेहरे पर खिली मुस्कान और उनके माथे पर लगे रोली-कुमकुम ने पूरे माहौल को अत्यंत पवित्र बना दिया।

इस अवसर पर योग गुरु बाबा रामदेव के सानिध्य में कार्यक्रम आयोजित किया गया। बाबा रामदेव ने पूरे कार्यक्रम में उपस्थित भक्तों, कन्याओं और उनके अभिभावकों को संबोधित करते हुए सनातन जागरण का मजबूत संदेश दिया।

The Grand Conclusion of Chaitra Navratri: पतंजलि योगपीठ में नारी शक्ति का महापर्व चैत्र नवरात्रि पर बाबा रामदेव बोले - "नारी सम्मान ही सनातन जागरण का मूल है"

बाबा रामदेव का संदेश

बाबा रामदेव ने रामनवमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा,
“नवरात्रि केवल नौ दिनों का पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मिक जागरण, दिव्यता की स्थापना और शक्ति उपासना का महापर्व है। प्रत्येक व्यक्ति के भीतर भगवान राम, भगवान कृष्ण और माँ भवानी की दिव्यता का वास होना चाहिए। यही सनातन धर्म का मूल तत्व है।”

उन्होंने आगे कहा,
“केवल खुद को हिंदू कह लेना पर्याप्त नहीं है। हिंदुत्व और सनातन का असली अर्थ माँ भगवती की शक्ति को समझना और उसे अपने जीवन में आत्मसात करना है। आज के इस युग में नारी शक्ति का सम्मान करना अत्यंत आवश्यक है। जब तक हम अपनी बेटियों, बहनों और माताओं को सम्मान नहीं देंगे, तब तक समाज सशक्त नहीं हो सकता।”

बाबा रामदेव ने सभी से आह्वान किया कि वे न सिर्फ नवरात्रि के नौ दिनों में, बल्कि पूरे वर्ष अपने जीवन में नारी सम्मान, सत्य, अहिंसा और स्वधर्म का पालन करें। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति का आधार ही नारी शक्ति है और इसे मजबूत करने के लिए हर व्यक्ति को आगे आना चाहिए।

The Grand Conclusion of Chaitra Navratri: पतंजलि योगपीठ में नारी शक्ति का महापर्व चैत्र नवरात्रि पर बाबा रामदेव बोले - "नारी सम्मान ही सनातन जागरण का मूल है"

कन्या पूजन का महत्व

पतंजलि योगपीठ में आयोजित कन्या पूजन में 2 से 10 वर्ष तक की सैकड़ों कन्याओं को देवी का रूप मानकर पूजा गया। परंपरा के अनुसार, कन्याओं के चरण धोकर उन्हें मिठाई, फल, नए कपड़े और उपहार भेंट किए गए। कन्या भोज में सात्विक व्यंजन परोसे गए।

इस आयोजन के माध्यम से पतंजलि योगपीठ ने एक बार फिर साबित किया कि सनातन संस्कृति में नारी को देवी का दर्जा दिया गया है। छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका सम्मान करना न केवल धार्मिक परंपरा है, बल्कि समाज में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और नारी सशक्तिकरण का भी मजबूत संदेश है।

कार्यक्रम के दौरान योगपीठ परिसर में भजन-कीर्तन, रामधुन और दुर्गा स्तोत्र का मधुर गान होता रहा। भक्तों ने माँ महागौरी और माँ सिद्धिदात्री की आरती उतारी। पूरे आयोजन में आस्था और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला।

बाबा रामदेव का विशेष बाइट

स्वामी रामदेव, योग गुरु ने कहा:
“नवरात्रि का समापन रामनवमी के साथ हो रहा है। यह समय हमें याद दिलाता है कि हम सबके भीतर राम और शक्ति दोनों का वास है। हमें अपने अंदर की नकारात्मकता को मारकर सकारात्मकता और दिव्यता को स्थापित करना है। नारी शक्ति का सम्मान करो, सनातन मूल्यों को अपनाओ और देश-समाज को मजबूत बनाओ।”

इस भव्य समापन समारोह में योगपीठ के हजारों साधक, भक्त और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम की सफलता पर पतंजलि योगपीठ परिवार ने सभी का आभार व्यक्त किया।

चैत्र नवरात्रि 2026 का यह समापन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सनातन संस्कृति, नारी सम्मान और आत्मिक जागरण का एक अनुपम उदाहरण भी साबित हुआ।

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