नई दिल्ली,
श्रीकाकुलम (आंध्र प्रदेश), 1 नवंबर 2025। आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के कासिबुग्गा स्थित प्रसिद्ध श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में शनिवार को देवोत्थान एकादशी के पावन अवसर पर भारी भीड़ के बीच भगदड़ मच गई। इस दिल दहला देने वाले हादसे में कम से कम 10 श्रद्धालुओं की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 25 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। ज्यादातर पीड़ित महिलाएं और बच्चे हैं, जिनमें से कई की हालत नाजुक बनी हुई है। मंदिर परिसर में हजारों भक्तों की उपस्थिति के बावजूद अपर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन की कमी ने इस त्रासदी को जन्म दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

हादसा कब हुआ…?
हादसा दोपहर करीब 12 बजे के आसपास हुआ, जब मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के लिए देशभर से उमड़े भक्तों की संख्या असहनीय स्तर पर पहुंच गई। देवोत्थान एकादशी को भगवान विष्णु के शयनोत्सव के समापन का दिन माना जाता है, जब भक्त विशेष दर्शन और अभिषेक के लिए आते हैं। मंदिर के संकरे सीढ़ीनुमा रास्ते पर महिलाएं थाली-कलश लिए आगे बढ़ रही थीं, तभी अचानक पीछे से धक्का-मुक्की शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक टूटे हुए रेलिंग के कारण भीड़ बेकाबू हो गई और दर्जनों लोग नीचे गिर पड़े। चीख-पुकार मच गई, लेकिन सुरक्षाकर्मी स्थिति संभाल पाने में नाकाम रहे। वीडियो फुटेज में साफ दिखाई दे रहा है कि महिलाएं और बच्चे पुजा सामग्री थामे चिल्ला रही थीं, जबकि जगह-जगह लोग कुचले जा रहे थे।
मौके पर पहुंचे स्थानीय पुलिस और मंदिर प्रशासन के कर्मियों ने घायलों को निकालने का प्रयास किया, लेकिन भगदड़ की रफ्तार इतनी तेज थी कि कई लोग बच नहीं सके। घायलों को तत्काल नजदीकी कासिबुग्गा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और श्रीकाकुलम जिला अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, अधिकांश घायलों को सांस लेने में तकलीफ, हड्डियों में चोट और कुचलन के कारण आंतरिक रक्तस्राव की समस्या हो रही है। रात तक 25 घायलों का इलाज जारी था, जिनमें से 8 की हालत गंभीर बताई जा रही है। मृतकों में 7 महिलाएं, 2 बच्चे और 1 बुजुर्ग पुरुष शामिल हैं। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए श्रीकाकुलम मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया है।

घटना पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने गहरा शोक व्यक्त किया
इस हृदयविदारक घटना पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा, “कासिबुग्गा वेंकटेश्वर मंदिर में भगदड़ की घटना ने मुझे स्तब्ध कर दिया है। भक्तों की मौत बेहद दुखद है। मैं पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।” सीएम नायडू ने तत्काल अधिकारियों को निर्देश दिए कि घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और राहत कार्यों की निगरानी स्थानीय विधायकों व अधिकारियों द्वारा की जाए। उन्होंने राज्य भर के मंदिरों में भीड़ प्रबंधन के लिए कड़े उपाय लागू करने के आदेश भी जारी किए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी न हो। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर शोक जताते हुए पीड़ित परिवारों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से 2 लाख रुपये की अनुदान राशि की घोषणा की। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर ने भी घटना पर गहरा दु:ख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “श्रीकाकुलम जिले के कासिबुग्गा स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में भगदड़ से हुई मौतों पर मुझे गहन शोक है। जिला प्रशासन को घायलों के लिए उचित चिकित्सा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।” पूर्व मुख्यमंत्री व वाईएसआरसीपी प्रमुख वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा, “यह घटना TDP-एनडीए सरकार की उदासीनता का परिणाम है। मंदिरों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के बजाय वे राजनीतिक खेल खेल रही हैं।” कृषि मंत्री के. अतन्नायडू ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी।

घटना के बाद श्रीकाकुलम एसपी ने मंदिर मालिक के खिलाफ ‘लापरवाह हत्या’ (culpable homicide) का मामला दर्ज कर लिया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि मंदिर प्रबंधन ने पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात नहीं किया था और संकरे रास्तों पर भीड़ नियंत्रण के लिए कोई बैरिकेडिंग नहीं की गई थी। एक टूटा हुआ रेलिंग मुख्य कारण के रूप में उभरा है, जो महीनों से मरम्मत की प्रतीक्षा में था। जिला कलेक्टर ने उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने की घोषणा की है, जो 48 घंटों में प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपेगी। साथ ही, मंदिर परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और आने वाले दिनों में दर्शन की व्यवस्था को नियोजित किया जाएगा।
श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, कासिबुग्गा आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन धार्मिक स्थल है, जो तिरुपति बालाजी मंदिर की तर्ज पर लाखों भक्तों को आकर्षित करता है। यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार वेंकटेश्वर को समर्पित है और एकादशी जैसे पर्वों पर यहां विशेष भीड़ उमड़ती है। स्थानीय लोग इसे ‘क्षेत्र का तिरुपति’ कहते हैं, जहां न केवल आंध्र से बल्कि ओडिशा और तेलंगाना से भी भक्त आते हैं। मंदिर का इतिहास 18वीं शताब्दी का माना जाता है, जब स्थानीय जमींदारों ने इसे स्थापित किया था। हाल के वर्षों में, मंदिर की लोकप्रियता बढ़ने से भीड़ प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल टिकटिंग सिस्टम और सीसीटीवी निगरानी जैसे आधुनिक उपाय अपनाने की आवश्यकता है।

यह घटना भारत में धार्मिक स्थलों पर होने वाली भगदड़ों की एक कड़ी जोड़ती है। पिछले वर्षों में हिमाचल प्रदेश के बटरा साहिब गुरुद्वारे और मध्य प्रदेश के उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में भी ऐसी ही घटनाएं हुईं, जिनमें सैकड़ों लोग प्रभावित हुए। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने 2023 में दिशानिर्देश जारी किए थे, जिसमें मंदिरों में अधिकतम क्षमता तय करने और आपातकालीन निकासी योजनाओं का उल्लेख था, लेकिन कई स्थलों पर इनका पालन नहीं हो रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक उत्सवों के दौरान निजी सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका बढ़ानी चाहिए और स्थानीय प्रशासन को पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करनी चाहिए।
पीड़ित परिवारों का दर्द रुकने का नाम नहीं ले रहा। कासिबुग्गा के एक निवासी रामाराव ने बताया, “मेरी बहन पूजा के लिए गई थी, लेकिन वह लौटकर नहीं आई। वहां की व्यवस्था देखकर कोई भी भक्त डर जाएगा।” एक अन्य भक्त ने कहा, “भगवान के दर्शन के चक्कर में जान गंवानी पड़े, यह कैसी व्यवस्था है?” स्थानीय विधायक ने मंदिर प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं। प्रत्येक मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की गई है, जबकि घायलों को मुफ्त इलाज का आश्वासन दिया गया। राज्य सरकार ने मंदिर के आसपास यातायात व्यवस्था सुधारने और अस्थायी चिकित्सा केंद्र स्थापित करने का फैसला लिया है। इस त्रासदी ने न केवल श्रीकाकुलम बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा को प्राथमिकता मिलेगी, या ऐसी घटनाएं बार-बार दोहराई जाएंगी?







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