नई दिल्ली (संवाददाता)। चुनाव आयोग ऑफ इंडिया (ECI) ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) फॉर्म को सभी विधानसभा, लोकसभा और स्थानीय निकाय चुनावों के लिए अनिवार्य कर एक बड़ा कदम उठाया है। यह फॉर्म मूल रूप से वोटर लिस्ट में हो रही बड़े पैमाने पर चोरी और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए लागू किया गया था, लेकिन अब इसका असर उम्मीदवारों के नामांकन और चुनावी प्रक्रिया पर भी पड़ने लगा है। ECI के अधिकारियों का दावा है कि SIR फॉर्म से न केवल मतदाता सूची साफ-सुथरी बनेगी, बल्कि चुनावी लड़ाई में पारदर्शिता आएगी और आगामी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा चुनावों में यह फॉर्म पहली बार पूर्ण रूप से लागू होगा, जिससे राजनीतिक दलों में हड़कंप मच गया है।

SIR फॉर्म को क्यों लागू किया जा रहा है?
ECI ने SIR फॉर्म को वोट चोरी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए SIR फॉर्म पेश किया था। पिछले कुछ चुनावों में लाखों फर्जी वोटर, डुप्लिकेट एंट्रीज और मृत व्यक्तियों के नाम से वोटिंग के मामले सामने आए थे। एक वरिष्ठ ECI अधिकारी ने बताया, “SIR फॉर्म वोटर लिस्ट की गहन जांच (Intensive Revision) का स्पेशल टूल है। इसमें हर मतदाता को अपनी पहचान, पता प्रमाण और फोटो अपडेट कराना अनिवार्य है। यह फॉर्म पहली बार 2024 के लोकसभा चुनावों में पायलट आधार पर आजमाया गया था, जहां 15% से अधिक फर्जी एंट्रीज पकड़ी गईं। अब इसे पूरे देश में लागू कर वोट चोरी पर पूरी तरह रोक लगाई जा रही है।”
ECI की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अकेले 2022 विधानसभा चुनावों में 8 लाख से अधिक संदिग्ध वोटर पाए गए थे। SIR फॉर्म लागू होने से:
- बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) हर घर जाकर फॉर्म भरवाएंगे।
- ऑनलाइन वेरिफिकेशन: आधार, वोटर आईडी और मोबाइल से लिंकिंग अनिवार्य।
- डेडलाइन: 31 दिसंबर 2025 तक सभी SIR फॉर्म जमा करने होंगे, वरना नाम कट सकता है।
यह कदम ECI की ‘नो वोटर लेफ्ट बिहाइंड’ मुहिम का हिस्सा है, लेकिन अब उम्मीदवारों के लिए भी यह चुनौती बन गया है।

चुनाव पर क्या असर पड़ेगा?
SIR फॉर्म के लागू होने से चुनावी मैदान में उथल-पुथल मचने की संभावना है। मुख्य असर इस प्रकार होंगे:
- मतदाता आधार सिकुड़ सकता है: फर्जी वोटर हटने से कई सीटों पर 10-20% वोट कम हो सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां माइग्रेशन ज्यादा है, वहां असर अधिक होगा उदाहरण के लिए, सहारनपुर जैसे जिलों में प्रवासी मजदूरों के नाम कटने से स्थानीय उम्मीदवारों की रणनीति बदलनी पड़ेगी।
- पुराने दिग्गजों को झटका: कई नेता जो ‘वोट बैंक’ पर निर्भर थे, अब असली वोटरों पर फोकस करेंगे। फर्जी वोटिंग से फायदा उठाने वाले छोटे दल बाहर हो सकते हैं।
- युवा और नए मतदाताओं को बढ़ावा: SIR से 18-19 आयु वर्ग के नए वोटर आसानी से जुड़ेंगे, जिससे शहरी सीटों पर बदलाव आएगा।
- चुनावी खर्च और प्रचार में बदलाव: वोट चोरी बंद होने से अब डोर-टू-डोर कैंपेन और असली मुद्दों पर जोर देना पड़ेगा। नामांकन के समय उम्मीदवारों को अपने क्षेत्र के साफ वोटर लिस्ट का प्रमाण देना होगा।
- विवादों की आशंका: विपक्षी दल इसे ‘वोटर सप्लेशन’ बता रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “SIR से गरीब और अल्पसंख्यक वोटरों के नाम कट रहे हैं।” जबकि BJP ने इसे स्वागतयोग्य कदम बताया।
उत्तर प्रदेश में जहां 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, वहां SIR फॉर्म से सत्ताधारी और विपक्ष दोनों की सीट गणित गड़बड़ा सकती है। ECI का अनुमान है कि पूरे देश में 5-7 करोड़ संदिग्ध एंट्रीज हटेंगी।
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राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “SIR वोट चोरी का अंतिम हथियार है। यह लोकतंत्र की रक्षा करेगा। चुनाव कोई खेल नहीं, जहां फर्जीवाड़े से जीत हासिल की जाए।”
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, “SIR से यूपी में लाखों यादव-मुस्लिम वोटर प्रभावित होंगे। ECI केंद्र की कठपुतली बन गई है।”
वहीं, BJP प्रदेश अध्यक्ष ने समर्थन देते हुए कहा, “वोट चोरी बंद होने से असली जनादेश आएगा। SIR स्वागतयोग्य है।”
आगे की राह
ECI ने सभी जिलों में SIR कैंप लगाने के निर्देश दिए हैं। 16 नवंबर से शुरू हो रही ड्राइव में मोबाइल ऐप के जरिए भी फॉर्म भरा जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि SIR लंबे समय में चुनावों को निष्पक्ष बनाएगा, लेकिन शुरुआती असर में मतदान प्रतिशत गिर सकता है।
कुल मिलाकर, SIR फॉर्म वोट चोरी रोकने का ECI का मास्टरस्ट्रोक है, जो चुनावी राजनीति को नई दिशा देगा। अब देखना यह है कि पार्टियां इस बदलाव से कैसे निपटती हैं।








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