सरकार के महिला सशक्तिकरण प्रयासों को मिले पंख, उत्तराखंड विधानसभा में गूंजी तालियां
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र में सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी ने माहौल को खुशियों से सराबोर कर दिया। राज्य की स्थापना की रजत जयंती की चमक के साथ ही एक दिन पहले भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अंडर-19 विश्व कप जीत की खुशी ने सदन को उत्साह से भर दिया। इसी उत्सवी माहौल में राष्ट्रपति ने उत्तराखंड सरकार के महिला सशक्तिकरण प्रयासों की खुलकर सराहना की, जिससे सदन में गर्मजोशी की लहर दौड़ गई।

महिला सशक्तिकरण पर राष्ट्रपति की मुहर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने अभिभाषण में उत्तराखंड की आधी आबादी की भूमिका को रेखांकित करते हुए पिछले 25 वर्षों की यात्रा को महिला उत्थान का प्रतीक बताया। उन्होंने राज्य में महिला शिक्षा के विस्तार, मातृ-शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी और विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी पर प्रकाश डाला।
विशेष रूप से, उन्होंने चिपको आंदोलन की नायिका स्वर्गीय गौरा देवी से लेकर हॉकी की स्टार खिलाड़ी वंदना कटारिया तक के नाम गिनाए। उत्तराखंड राज्य आंदोलन की प्रमुख योद्धा स्वर्गीय सुशीला बलूनी, एवरेस्ट विजेता बछेंद्री पाल और सामाजिक कार्यकर्ता राधा भट्ट जैसे नामों का जिक्र कर राष्ट्रपति ने महिलाओं के योगदान को अमर कर दिया।
सदन में पहली महिला स्पीकर ऋतु खंडूरी भूषण की नियुक्ति पर उन्होंने कहा, “उत्तराखंड विधानसभा ने अपना गौरव बढ़ाया है।” साथ ही, उन्होंने महिला सदस्यों की संख्या में और वृद्धि की अपेक्षा जताई, जिस पर सदन ने करतल ध्वनि से सहमति जताई।

क्रिकेट बेटियों की जीत पर तालियां
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन की शुरुआत ही भारतीय महिला क्रिकेट टीम (अंडर-19) की विश्व कप जीत से की। जैसे ही उन्होंने बेटियों को बधाई दी, पूरा सदन तालियों से गूंज उठा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी मुस्कुराते हुए तालियां बजाकर खुशी जाहिर करने से खुद को रोक नहीं सकीं। यह पल सदन की एकता और महिला शक्ति के प्रति सम्मान का प्रतीक बन गया।

यूसीसी पर खास जोर
राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का विशेष उल्लेख किया। संविधान के अनुच्छेद-44 का हवाला देते हुए उन्होंने समानता की मजबूत वकालत की और उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने के historic कदम की सराहना की। विधानसभा सदस्यों के योगदान को रेखांकित कर उन्होंने कहा कि यह कानून पूरे देश के लिए प्रेरणा बनेगा।

निष्कर्ष: एक नई प्रेरणा
राष्ट्रपति के अभिभाषण ने न केवल उत्तराखंड के 25 वर्षों के सफर को महिला सशक्तिकरण के आईने में देखा, बल्कि भविष्य के लिए नई दिशा भी दी। सदन में घुली यह खुशी राज्य की बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी बनकर उभरी। राष्ट्रपति की मुर्मू मुस्कान और तालियों की गूंज उत्तराखंड के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गई।








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