लखनऊ, 1 मार्च 2026 – ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की अमेरिका-इज़राइल के संयुक्त हमलों में शहादत की खबर ने लखनऊ समेत पूरे भारत के शिया समुदाय में गहरा सदमा पहुंचाया है। 86 वर्षीय खामेनेई, जो 36 वर्षों से ईरान की सत्ता संभाल रहे थे, 28 फरवरी 2026 को तेहरान में हुए हमलों में शहीद हो गए। ईरानी राज्य मीडिया ने उनकी मौत की पुष्टि की, जिसके बाद ईरान ने 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है।

लखनऊ में शोक की लहर
लखनऊ, जो भारत में शिया समुदाय का प्रमुख केंद्र है, में शनिवार रात से ही शोक का माहौल छा गया। प्रमुख शिया संगठनों ने इसे पूरी उम्मत और इंसानियत की अपूरणीय क्षति बताया।
- शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी और प्रसिद्ध शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने संयुक्त बयान जारी कर तीन दिनों का आधिकारिक मातम घोषित किया।
- उन्होंने सभी मोमिनों से अपील की कि वे घरों, अज़ाखानों और इमामबाड़ों पर काले झंडे लगाएं तथा गम का इजहार करें।
- मौलाना कल्बे जवाद ने व्यापारियों से भी अपील की कि वे अपनी दुकानें और प्रतिष्ठान बंद रखकर अयातुल्लाह खामेनेई को श्रद्धांजलि दें।

आज रात कार्यक्रम: शोकसभा और मौन कैंडल मार्च
- रविवार रात 8 बजे लखनऊ के ऐतिहासिक छोटे इमामबाड़े में बड़ी शोकसभा आयोजित की जाएगी।
- सभा के बाद मौन कैंडल मार्च निकाला जाएगा, जिसमें हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
- मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने कहा: “यह सिर्फ एक समुदाय का नुकसान नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत की क्षति है। हम सभी इंसानियत पसंद लोगों से अपील करते हैं कि वे इस दुख की घड़ी में हमारे साथ खड़े हों।”
बैकग्राउंड: खामेनेई की शहादत कैसे हुई?
- 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिनमें तेहरान में खामेनेई का कंपाउंड निशाना बना।
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी मौत की घोषणा की और इसे “ईरान के खतरनाक शासन” के खिलाफ कार्रवाई बताया।
- ईरानी मीडिया ने इसे शहादत बताया और बदला लेने की कसम खाई। ईरान ने जवाबी हमले शुरू किए हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव चरम पर है।

भारत में प्रतिक्रिया
लखनऊ के अलावा मुजफ्फरनगर, दिल्ली और अन्य शहरों में भी शिया समुदाय ने विरोध प्रदर्शन और शोक सभाएं कीं। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड (AISPLB) ने भी तीन दिनों का मातम घोषित किया। पुरानी लखनऊ में सड़कों पर काले झंडे और पोस्टर लगे नजर आए।
यह घटना वैश्विक स्तर पर मध्य पूर्व की राजनीति को हिला सकती है, जबकि भारत के शिया समुदाय में गहरा आध्यात्मिक और भावनात्मक सदमा है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।







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