उधमसिंह नगर, 3 जनवरी 2026 – देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध जनजातीय विरासत को सम्मान देने का एक और ऐतिहासिक क्षण रचा गया। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को उधमसिंह नगर जिले के गदरपुर क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत रोशनपुर डलबाबा में बुक्सा जनजाति समाज के वीर राजा जगतदेव की प्रतिमा का वर्चुअल अनावरण किया।
यह अनावरण न केवल एक सांस्कृतिक समारोह था, बल्कि बुक्सा समाज की गौरवशाली परंपराओं, बलिदान और स्वाभिमान की स्मृति को जीवंत करने का प्रतीक साबित हुआ। मुख्यमंत्री धामी ने इस अवसर पर राजा जगतदेव के जीवन को त्याग, वीरता और संस्कृति संरक्षण का अमूल्य उदाहरण बताते हुए कहा कि यह प्रतिमा बुक्सा जनजाति के गौरव को हमेशा के लिए अमर कर देगी। कार्यक्रम में स्थानीय नेताओं और अधिकारियों की उपस्थिति ने इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया, जो राज्य सरकार की जनजातीय कल्याण नीतियों को रेखांकित करता है।
उत्तराखंड जैसे विविधतापूर्ण राज्य में जनजातीय समुदायों की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है। बुक्सा जनजाति, जो ऊधमसिंह नगर, नैनीताल और कोटद्वार जैसे क्षेत्रों में बसी हुई है, अपनी अनूठी संस्कृति और परंपराओं के लिए जानी जाती है। राजा जगतदेव जैसे वीरों की गाथाएं इस समुदाय की वीरता और धार्मिक निष्ठा को दर्शाती हैं। मुख्यमंत्री धामी का यह अनावरण राज्य की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है, जो न केवल स्थानीय स्तर पर उत्साह जगाएगा बल्कि पूरे देश को उत्तराखंड की जनजातीय विरासत से परिचित कराएगा।

राजा जगतदेव: वीरता और संस्कृति संरक्षण के प्रतीक
मुख्यमंत्री धामी ने वर्चुअल संबोधन में राजा जगतदेव के जीवन को विस्तार से याद किया। उन्होंने कहा कि राजा जगतदेव का जीवन त्याग, वीरता, धर्मनिष्ठा और संस्कृति संरक्षण का जीवंत उदाहरण है। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। धामी ने इसे “स्वाभिमान और आस्था की अदम्य शक्ति” की गाथा करार दिया, जो न केवल बुक्सा समाज बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए प्रेरणा स्रोत है।
यह अनावरण केवल एक प्रतिमा स्थापित करने का कार्य नहीं था, बल्कि बुक्सा जनजाति की गौरवशाली परंपरा और बलिदान को नमन करने का दिवस था। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि ऊधमसिंह नगर, नैनीताल और कोटद्वार जैसे क्षेत्रों में बसे बुक्सा समाज के लोग अपनी संस्कृति, परंपरा और आत्मसम्मान को जीवंत रखे हुए हैं। यह समुदाय अपनी अनूठी लोककथाओं, नृत्यों और हस्तशिल्पों के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक विविधता को समृद्ध करता रहा है। धामी ने सुझाव दिया कि राजा जगतदेव की गौरवगाथा पर शोध कार्य किए जाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनसे प्रेरणा ग्रहण कर सकें। यह विचार न केवल इतिहास के दस्तावेजीकरण को बढ़ावा देगा बल्कि युवाओं में सांस्कृतिक जागरूकता भी पैदा करेगा।
बुक्सा जनजाति का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है, जो तराई क्षेत्र की वन्य संपदा और कृषि पर आधारित रहा है। राजा जगतदेव जैसे नेताओं ने ब्रिटिश काल में भी अपनी स्वतंत्रता और धार्मिक स्वाभिमान की रक्षा की। आजादी के बाद भी इस समुदाय ने उत्तराखंड के विकास में योगदान दिया है। मुख्यमंत्री का यह कदम जनजातीय इतिहास को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास है, जो राज्य की ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा को मजबूत करता है।

राज्य सरकार की जनजातीय कल्याण प्रतिबद्धता: शिक्षा से रोजगार तक
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने राज्य सरकार की जनजातीय समुदायों के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सरकार सांस्कृतिक संरक्षण, इतिहास के दस्तावेजीकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रोजगार के क्षेत्रों में पूर्ण रूप से कार्यरत है। उत्तराखंड में बुक्सा, थारू, भोटिया और जौनसारी जैसी जनजातियों के लिए विशेष योजनाएं चल रही हैं, जैसे जनजातीय विकास विभाग के तहत स्कॉलरशिप, आवास निर्माण और कौशल प्रशिक्षण।
धामी ने बताया कि राज्य सरकार ने जनजातीय क्षेत्रों में स्कूलों को स्मार्ट क्लासरूम से लैस किया है, और स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष डॉक्टर तैनात किए हैं। रोजगार के लिए ‘मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना’ के अंतर्गत जनजातीय युवाओं को लोन और ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके अलावा, सांस्कृतिक उत्सवों को प्रोत्साहन देकर लोक परंपराओं को संरक्षित किया जा रहा है। यह प्रयास न केवल आर्थिक सशक्तिकरण लाएंगे बल्कि सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पहलों से जनजातीय समुदायों का सशक्तिकरण राज्य की समग्र प्रगति का आधार बनेगा।
विकास की नई घोषणाएं: स्थानीय समस्याओं का समाधान
मुख्यमंत्री धामी ने अनावरण के अवसर पर क्षेत्रीय विकास को गति देने वाली तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जो रोशनपुर और आसपास के गांवों के लिए वरदान साबित होंगी। पहली घोषणा के तहत ग्राम सभा रोशनपुर स्थित श्री डलबाबा मंदिर परिसर में चाहरदीवारी, टीनशेड, फर्श और शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। इससे धार्मिक और सामुदायिक आयोजनों को सुविधाजनक बनाया जा सकेगा, और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
दूसरी घोषणा ग्राम बलरामनगर से खेमपुर तक 3 किमी सड़क के पुनर्निर्माण की है, जो स्थानीय किसानों और व्यापारियों के लिए यातायात को सुगम बनाएगी। तीसरी घोषणा ग्राम सीतापुर से एएनके इंटर कॉलेज तक 4 किमी सड़क के पुनर्निर्माण की है, जो शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को आसान करेगी। ये घोषणाएं उधमसिंह नगर के ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी समस्याओं का सीधा समाधान हैं, और मुख्यमंत्री की ‘नव निर्माण’ नीति का हिस्सा हैं। इन कार्यों से न केवल कनेक्टिविटी बढ़ेगी बल्कि आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

कार्यक्रम का समापन: एकता और प्रेरणा का संदेश
कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख ज्योति ग्रोवर, नगर पंचायत अध्यक्ष सतीश चुघ, दर्जामंत्री मंजीत सिंह राजू, जिलाधिकारी उधमसिंह नगर श्री नितिन भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा सहित स्थानीय नेता और ग्रामीण उपस्थित थे। सभी ने राजा जगतदेव की स्मृति को नमन किया और मुख्यमंत्री की घोषणाओं का स्वागत किया। कार्यक्रम का समापन बुक्सा समाज के पारंपरिक नृत्य और भोज के साथ हुआ, जो सांस्कृतिक एकता का प्रतीक था।
यह अनावरण उत्तराखंड की जनजातीय विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक मील का पत्थर है। मुख्यमंत्री धामी का विजन – जहां संस्कृति और विकास साथ-साथ चलें – राज्य को एक मजबूत पहचान दे रहा है। अगर आप भी बुक्सा जनजाति की गाथाओं या उत्तराखंड के जनजातीय कल्याण से जुड़े रहना चाहते हैं, तो कमेंट्स में अपनी राय साझा करें। क्या आपको लगता है कि ऐसी पहलें युवाओं में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाएंगी? हमारे ब्लॉग को फॉलो करें ताजा अपडेट्स के लिए – जय हिंद!








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