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सहारनपुर करवा चौथ पर मुस्लिम युवाओं द्वारा महिलाओं को मेहंदी लगाना शरीयत के खिलाफ — मौलाना

सहारनपुर करवा चौथ पर मुस्लिम युवाओं द्वारा महिलाओं को मेहंदी लगाना शरीयत के खिलाफ — मौलाना

सहारनपुर। करवा चौथ के त्योहार को लेकर बाजारों में इस समय खास रौनक नहीं दिखाई दी । महिलाएं पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए मेहंदी लगवा रही हैं और पूजा की तैयारियों में जुटी हैं। उनका कहना है कि यह व्रत पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए किया जाता है। महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और रात में चांद देखकर पूजा कर व्रत खोलती हैं।

इस बीच करवा चौथ के मौके पर मुस्लिम युवाओं द्वारा महिलाओं को मेहंदी लगाने को लेकर धार्मिक टिप्पणी भी सामने आई है। देवबंद के प्रसिद्ध आलिम मौलाना कारी इसाहक गोरा ने कहा कि मुस्लिम मर्दों द्वारा गैर महिला को मेहंदी लगाना या चूड़ी पहनाना शरीयत के खिलाफ है।

सहारनपुर करवा चौथ पर मुस्लिम युवाओं द्वारा महिलाओं को मेहंदी लगाना शरीयत के खिलाफ — मौलाना

मौलाना ने कहा..

मौलाना ने कहा, “मुस्लिम धर्म में गैर महिला को मर्द द्वारा छूना चूड़ी और मेहंदी लगाना जायज़ नहीं है। यह शरीयत के खिलाफ है। मेहंदी महिला को सिर्फ महिला ही लगा सकती है।”

वहीं इस पर मेहंदी लगाने मुस्लिम युवक शोहेब का कहना उन्हें किसी मौलाना, इमाम की बात से कोई फर्क नहीं पड़ता वह अपने रोजगार को पहले मानते हैं पिछले काफी लंबे समय से वह ऐसे ही मेहंदी लगाते आ रहे हैं बाजार मे सभी दुकानो पता महंदी लगाने वाले मुस्लिम और हिन्दू भाई भी हैं उनका कहना साफ है कि महिलाओं को मेहंदी लगाने पर कोई आपत्ति नहीं है और ना ही किसी मौलाना की बात पर उन्हें कोई फर्क पड़ता है

सहारनपुर करवा चौथ पर मुस्लिम युवाओं द्वारा महिलाओं को मेहंदी लगाना शरीयत के खिलाफ — मौलाना

कॉस्मेटिक दुकानदारों सतीश अरोड़ा का कहना है

वहीं कॉस्मेटिक दुकानदारों सतीश अरोड़ा का कहना है कि जैसे त्यौहार आता है काम में तेजी आती है पर वैसे तो महंगाई का दौर में मे काम कम चल रहे हैं पिछले साल की बात करें तो इस बार बाजार में मंदी की मार देखनी पड़ रही है क्योंकि उनके सामानों पर कोई जीएसटी का कोई फर्क नहीं पड़ा और ना ही जीएसटी कम हुई है,

गौरतलब है कि करवा चौथ हिन्दू महिलाओं का एक प्रमुख व्रत है जिसमें विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। इस अवसर पर बाजारों में मेहंदी लगाने और चूड़ी पहनने की परंपरा भी बड़ी संख्या में देखने को मिलती है।

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