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सहारनपुर देवबंद भूमि विवाद में किसान परिवार पर जानलेवा हमला: SSP कार्यालय में न्याय की गुहार, पुलिस निष्क्रियता पर सवाल—पीड़ित बोले, ‘योगी जी से न्याय मांगेंगे’

सहारनपुर देवबंद भूमि विवाद में किसान परिवार पर जानलेवा हमला: SSP कार्यालय में न्याय की गुहार, पुलिस निष्क्रियता पर सवाल—पीड़ित बोले, ‘योगी जी से न्याय मांगेंगे’

26 दिसंबर को लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला, 4-5 लोग घायल—शिकायत के बावजूद FIR न होने का आरोप, SSP ने मेडिकल दोबारा कराने का आदेश दिया

सहारनपुर के देवबंद में एक छोटा-सा भूमि विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया, और एक किसान परिवार की जिंदगी दांव पर लटक गई। 26 दिसंबर को पड़ोसियों ने रोहित कुमार घयाल के परिवार पर लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला कर दिया, जिसमें 4-5 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पीड़ित परिवार ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, लेकिन शिकायत के बावजूद न FIR दर्ज हुई, न त्वरित मेडिकल—बल्कि डॉक्टर ने ‘मामूली चोटें’ की रिपोर्ट तैयार कर दी।

आज पीड़ित रोहित अपने परिजनों को लेकर SSP कार्यालय पहुँचे, जहाँ उन्होंने शिकायती पत्र सौंपा। SSP ने मामले का संज्ञान लिया, मेडिकल दोबारा कराने का आदेश दिया और SHO-चौकी प्रभारी को फटकार लगाई। लेकिन सवाल वही है—क्या पुलिस की निष्क्रियता ने इस हमले को बढ़ावा दिया? आइए, इस घटना की जड़ों को खोदते हैं, जो न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि ग्रामीण भारत की कानून व्यवस्था पर सवाल भी खड़ी करती है।

सहारनपुर देवबंद भूमि विवाद में किसान परिवार पर जानलेवा हमला: SSP कार्यालय में न्याय की गुहार, पुलिस निष्क्रियता पर सवाल—पीड़ित बोले, 'योगी जी से न्याय मांगेंगे'

घटना का पूरा विवरण: भूमि विवाद से खूनी संघर्ष

देवबंद के एक छोटे से गाँव में रहने वाले किसान रोहित कुमार घयाल का परिवार सालों से पड़ोसियों से भूमि विवाद में उलझा हुआ था। रोहित बताते हैं, “हमारी जमीन पर डोल काट ली गई। विरोध किया तो गाली-गलौज और धमकी मिली।” 26 दिसंबर को पैमाइश के नाम पर बुलाने के बाद हमलावरों ने मौका देखकर धावा बोल दिया। “लाठी-डंडे, कुल्हाड़ी और त्रिशूल से हमला किया। मेरी माँ, भाई और दो भतीजे घायल हो गए,

” रोहित ने बताया। परिवार के 4-5 सदस्यों को तुरंत जिला अस्पताल पहुँचाया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर सहारनपुर रेफर किया गया। रोहित ने कहा, “112 पर कॉल की, लेकिन पुलिस देर से पहुँची। मेडिकल भी घंटों बाद हुआ, और डॉक्टर ने मामूली चोटें लिख दीं। हमलावरों ने साठगांठ की।”

ये हमला कोई अचानक नहीं था। रोहित का कहना है कि विवाद पहले से चल रहा था, और उन्होंने कई बार थाने में शिकायत की। “पहले भी एप्लीकेशन दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पैमाइश के नाम पर बुलाया, और हमला कर दिया,” उन्होंने SSP को पत्र में लिखा। परिवार के सदस्यों के घाव गहरे हैं—माँ का हाथ फ्रैक्चर, भाई को सिर में चोट। रोहित ने कहा, “हम किसान हैं, लड़ाई-झगड़े से दूर रहते हैं। लेकिन ये लोग हमारी जमीन हड़पना चाहते हैं। पुलिस ने साथ दिया होता तो ये न होता।”

सहारनपुर देवबंद भूमि विवाद में किसान परिवार पर जानलेवा हमला: SSP कार्यालय में न्याय की गुहार, पुलिस निष्क्रियता पर सवाल—पीड़ित बोले, 'योगी जी से न्याय मांगेंगे'

पुलिस निष्क्रियता का आरोप: FIR क्यों नहीं, मेडिकल में विलंब?

पीड़ित परिवार का मुख्य गुस्सा पुलिस पर है। रोहित ने SSP को बताया, “हमले के बाद 112 पर कॉल की, लेकिन थाने पहुँचने में 2 घंटे लग गए। मेडिकल देर से कराया गया, और रिपोर्ट में गंभीर चोटें गायब हैं। हमलावरों ने डॉक्टर से सेटिंग की लगती है।” उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावरों—जिनके नाम पत्र में दिए गए—का पुलिस से कनेक्शन है। “शिकायत के बावजूद FIR नहीं, पैमाइश का आदेश आया लेकिन सुरक्षा नहीं दी,” रोहित ने कहा। एक स्थानीय ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “देवबंद में भूमि विवाद आम हैं, लेकिन पुलिस पक्ष लेती है। ये परिवार बेचारा है।”

SSP कार्यालय पहुँचकर रोहित ने शिकायती पत्र सौंपा। SSP ने तुरंत संज्ञान लिया, मेडिकल दोबारा कराने का आदेश दिया और SHO-चौकी प्रभारी को फटकार लगाई। “पहले शिकायत क्यों न ली गई? विवाद क्यों बढ़ा?” SSP ने पूछा। रोहित ने जवाब दिया, “हमें भरोसा था, लेकिन निष्क्रियता से हमला हुआ।” SSP ने आश्वासन दिया, “अब न्याय मिलेगा। जांच तेज होगी।” रोहित ने कहा, “SSP पर भरोसा है। योगी जी से न्याय मांगेंगे।”

ग्रामीण भारत में भूमि विवाद की सच्चाई: न्याय कब मिलेगा?

ये घटना ग्रामीण भारत की पुरानी समस्या को उजागर करती है—भूमि विवाद। NCRB के अनुसार, 2024 में UP में 15,000+ भूमि विवाद से जुड़े केस हुए, जिनमें 20% हिंसक। सहारनपुर जैसे जिलों में किसान परिवार अक्सर फंस जाते हैं। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “पुलिस की लेट लतीफी से छोटे विवाद बड़े हो जाते हैं। FIR हो जाती तो हमला न होता।” रोहित का परिवार अब भय में जी रहा है। “हमलावर घूम रहे हैं, हम छिपे हैं,” उन्होंने कहा। उन्होंने CM योगी से अपील की, “सख्त कार्रवाई करें।”

SSP का कदम सकारात्मक है, लेकिन पीड़ित परिवार को न्याय कब मिलेगा? रोहित ने कहा, “SSP का आश्वासन मिला, लेकिन अमल देखना बाकी है।” यह केस ग्रामीण न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। क्या पुलिस सुधरेगी? उम्मीद है हाँ।

रिपोर्टर: जोगेंद्र कल्याण, सहारनपुर फीड
स्थान: देवबंद/सहारनपुर, उत्तर प्रदेश

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