उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव 2026 को लेकर अब बड़ा सस्पेंस बन गया है। सूत्रों और राजनीतिक हलकों से मिली जानकारी के अनुसार, अप्रैल-मई 2026 में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत) अब मुश्किल नजर आ रहे हैं। संभावना है कि ये चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जाएं। मुख्य वजह जनगणना 2027 का कार्यक्रम है, जिससे प्रदेश का पूरा प्रशासनिक अमला व्यस्त रहेगा।

जनगणना 2027: चुनाव टालने की सबसे बड़ी वजह
केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 का शेड्यूल घोषित कर दिया है:
- हाउस लिस्टिंग (घरों की सूचीकरण): 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक (करीब 30 दिन का अभियान हर राज्य में अलग-अलग)।
- जनसंख्या गणना (Population Enumeration): फरवरी 2027 में (दुर्गम क्षेत्रों में सितंबर 2026 से पहले)।
- यह पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें जातिगत आंकड़े भी शामिल होंगे।
यूपी के 75 जिलों में इस दौरान 50-60 हजार शिक्षक, शिक्षामित्र, लेखपाल, पटवारी आदि कर्मचारी ड्यूटी पर लगेंगे। जिलाधिकारी, सीडीओ, एसडीएम, तहसीलदार, नगर आयुक्त और बीडीओ जैसे अधिकारी भी जनगणना में फंसे रहेंगे। ऐसे में पंचायत चुनाव के लिए पर्याप्त स्टाफ और संसाधन उपलब्ध कराना बहुत मुश्किल होगा।

राजनीतिक दल भी जल्द चुनाव के पक्ष में नहीं
सूत्र बताते हैं कि भाजपा सहित अन्य दल फिलहाल पंचायत चुनाव कराने के मूड में नहीं हैं। कारण:
- 2027 विधानसभा चुनाव से पहले गांव स्तर पर राजनीतिक टकराव बढ़ सकता है।
- टिकट वितरण में असंतोष से बगावत का खतरा।
- 2021 के पंचायत चुनाव में भाजपा को कई जगह चुनौतियां मिली थीं।
इसलिए, कई नेता इसे विधानसभा चुनाव के बाद कराने के पक्ष में हैं, ताकि संगठन पर असर कम पड़े।
पंचायतीराज विभाग की सुस्ती और आरक्षण में देरी
- राज्य निर्वाचन आयोग ने आरक्षण निर्धारण के लिए पंचायतीराज विभाग को पत्र भेजा, लेकिन आरक्षण कमेटी का गठन अभी तक नहीं हुआ।
- आरक्षण प्रक्रिया में कम से कम 2 महीने लगते हैं।
- विभागीय स्तर पर कोई ठोस तैयारी नजर नहीं आ रही।

ग्रामीण स्तर पर संदेश पहुंच गया
पंचायती राज संस्थाओं से जुड़े जनप्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार और संगठन से संकेत मिल चुके हैं – चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद होंगे। इसलिए:
- जिलों में चुनावी तैयारियां लगभग ठप हैं।
- भाजपा कार्यकर्ता अब मतदाता सूची पुनरीक्षण और अन्य सरकारी अभियानों में जुटे हैं।
यदि समय पर चुनाव नहीं हुए तो क्या?
- मई 2026 में ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्यों का कार्यकाल खत्म।
- जुलाई 2026 में ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल समाप्त।
- ऐसी स्थिति में सरकार प्रशासक (रिसीवर) नियुक्त कर सकती है, जो पंचायतों का प्रशासन संभालेंगे।
भाजपा का आधिकारिक पक्ष
प्रदेश महामंत्री और पंचायत चुनाव प्रभारी राम प्रताप सिंह ने कहा:
- सरकार से कोई स्पष्ट संदेश नहीं मिला है।
- पार्टी की तैयारी पूरी है।
- आरक्षण निर्धारण शासन स्तर पर प्रस्तावित है।
- जो भी नियमानुसार निर्णय होगा, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।







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