राज्यसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को खारिज कर दिया। TMC के नेतृत्व में पेश प्रस्ताव को 1968 के जजेस इंक्वायरी एक्ट की धारा 3 के तहत अस्वीकार किया गया।

CEC ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल जारी, राज्यसभा ने विपक्ष का महाभियोग प्रस्ताव खारिज किया
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेतृत्व में विपक्ष द्वारा लाया गया महाभियोग प्रस्ताव राज्यसभा में खारिज कर दिया गया है। इस फैसले के साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल जारी रहेगा।
विपक्ष के गंभीर आरोप
विपक्ष की ओर से पेश प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरोपों में कहा गया था कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया और कुछ राजनीतिक दलों के पक्ष में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया। खासतौर पर बिहार और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में गड़बड़ी तथा चुनावी धांधली की जांच को प्रभावित करने के आरोप लगाए गए थे।
प्रस्ताव में 63 राज्यसभा सांसदों के हस्ताक्षर थे, जबकि लोकसभा में 130 सांसदों ने इसका समर्थन जताया था।

राज्यसभा सभापति ने किया खारिज
राज्यसभा के सभापति ने 1968 के जजेस इंक्वायरी एक्ट की धारा 3 का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इस फैसले के साथ ही महाभियोग की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
भारतीय संविधान के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों को हटाने जैसी ही जटिल है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत यानी उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है।
सरकार vs विपक्ष
इस फैसले के बाद सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया है, जबकि सरकार का कहना है कि राज्यसभा सभापति का फैसला पूरी तरह संवैधानिक नियमों के अनुरूप है।
आगे क्या?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रिया को लेकर बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। यह मुद्दा भविष्य के चुनावों में भी सियासी बहस का बड़ा केंद्र बन सकता है।







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