बार्सिलोना के मैजिक मैन ने भारतीय फुटबॉल को छुआ, लेकिन क्या आर्थिक फायदा हुआ या सिर्फ दिलों में बस गए—14 साल बाद भी बहस जारी
फुटबॉल के जादूगर लियोनेल मेसी जब 2011 में भारत आए थे, तो पूरे देश में एक लहर दौड़ गई थी। बार्सिलोना क्लब के साथ दिल्ली और कोलकाता में खेले गए एग्जिबिशन मैच ने लाखों भारतीयों को मैदान की ओर खींच लिया। लेकिन 14 साल बाद भी सवाल वही है—क्या मेसी का यह दौरा भारत के फुटबॉल को सच्ची दिशा दे गया, या सिर्फ एक स्टार की झलक का रोमांच था?
हाल ही में कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम पर उनकी 12 फुट ऊँची स्टैच्यू का अनावरण हुआ, जिस पर 1.2 करोड़ रुपये खर्च हुए। मुझे लगता है, यह स्टैच्यू न सिर्फ मेसी की याद दिलाता है, बल्कि उस दौरे के असर को भी सवालों के घेरे में लाता है। आइए, उस ऐतिहासिक यात्रा, स्टैच्यू के खर्च और भारत को मिले फायदे पर नजर डालते हैं।

मेसी के पुराने दौरे को लेकर
2011 का वह दौरा आज भी फुटबॉल फैंस की आँखों में ताजा है। 28 अगस्त को दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में बार्सिलोना ने एआईएफसी इंडियन ऑल स्टार्स को 5-0 से हराया, जिसमें मेसी ने दो गोल दागे। फिर 2 सितंबर को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में मोहन बागान के खिलाफ मैच हुआ, जो टाई रहा। लगभग 1.2 लाख दर्शक इन मैचों को देखने उमड़े, और टीवी पर 10 करोड़ से ज्यादा लोगों ने लाइव देखा।
मेसी ने कहा था, “भारत का प्यार अविस्मरणीय है।” लेकिन उस दौरे का खर्च? एग्जिबिशन मैचों के लिए AIFF ने करीब 5 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसमें ट्रैवल, सिक्योरिटी और प्रमोशन शामिल था। फिर भी, यह दौरा फुटबॉल की लोकप्रियता बढ़ाने में सफल रहा—उसके बाद ISL लॉन्च हुआ, और युवाओं में फुटबॉल का क्रेज बढ़ा।

मेसी के स्टैच्यू में हुआ खर्च…?
लेकिन बात अगर कोलकाता की उस स्टैच्यू की करें, तो यह मेसी के भारत प्रेम का प्रतीक बनी। मोहन बागान क्लब ने 2023 में साल्ट लेक स्टेडियम पर 12 फुट ऊँची ब्रॉन्ज स्टैच्यू लगाई, जिसकी लागत 1.2 करोड़ रुपये आई। स्टैच्यू डिजाइनर ने बताया कि यह मेसी के 2011 के मैच की याद दिलाती है। क्लब के अधिकारियों का कहना है, “यह स्टैच्यू फुटबॉल आइकन को सम्मान देने का तरीका है।” लेकिन सवाल उठता है—क्या इतना खर्च जायज था? क्लब ने स्पॉन्सरशिप से फंडिंग की, लेकिन आलोचक कहते हैं कि यह पैसा फुटबॉल ग्रासरूट डेवलपमेंट में लगना चाहिए था। फिर भी, स्टैच्यू का अनावरण मेसी फैंस के लिए उत्सव बना—हजारों ने सेल्फी ली।

अब असली सवाल—मेसी के दौरे से भारत को क्या फायदा हुआ? मुझे लगता है, आर्थिक रूप से तो ज्यादा नहीं, लेकिन सॉफ्ट पावर में गजब का। 2011 के मैचों से फुटबॉल की फैनबेस 20% बढ़ी, ISL में निवेश आया, और युवा अकादमियों में दाखिले दोगुने हुए। FIFA रैंकिंग में भारत 173 से 105 पर पहुँचा। लेकिन आलोचना भी है—मैचों का खर्च 5 करोड़ था, लेकिन लॉन्ग-टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर में कम निवेश। एक स्पोर्ट्स एनालिस्ट ने कहा, “मेसी ने क्रेज बढ़ाया, लेकिन ग्रासरूट कोचिंग और स्टेडियम्स की कमी बनी रही।” फिर भी, स्टैच्यू जैसे कदम फुटबॉल कल्चर को जीवित रखते हैं।
मेसी का भारत दौरा एक मील का पत्थर था, जो फुटबॉल को क्रिकेट के साये से बाहर लाया। 1.2 करोड़ की स्टैच्यू शायद महंगी लगे, लेकिन यह प्रेरणा का स्रोत है। क्या भारत मेसी जैसे स्टार्स को फिर बुलाएगा? फैंस कहते हैं हाँ। तुम क्या सोचते हो? कमेंट में बताओ!








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