मायावती का जोरदार ऐलान: 2027 में BSP अकेले लड़ेगी यूपी चुनाव, राहुल-अखिलेश-चंद्रशेखर पर तीखा हमला

मायावती का जोरदार ऐलान: 2027 में BSP अकेले लड़ेगी यूपी चुनाव, राहुल-अखिलेश-चंद्रशेखर पर तीखा हमला

लखनऊ, 9 अक्टूबर 2025: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने गुरुवार को लखनऊ में आयोजित विशाल रैली में जोरदार राजनीतिक वापसी की। कांशीराम जी महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय दलित स्मारक स्थल पर हुई इस मेगा रैली में मायावती ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में BSP के अकेले लड़ने का ऐलान किया।

उन्होंने कांग्रेस के राहुल गांधी, सपा के अखिलेश यादव और आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर आजाद पर बिना नाम लिए तीखा प्रहार किया। साथ ही, योगी आदित्यनाथ सरकार को लखनऊ के स्मारकों के रखरखाव के लिए धन्यवाद दिया। रैली में भतीजे आकाश आनंद को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाने का भी घोषणा की गई, जो BSP की 2027 रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

यह रैली BSP के लिए 2027 चुनावों की शुरुआती तैयारी का संकेत है। पिछले चार वर्षों में मायावती की पहली बड़ी सार्वजनिक सभा में करीब दो लाख समर्थक जुटे। पार्टी ने ‘लखनऊ चलो’ अभियान चलाकर पूरे यूपी से कार्यकर्ताओं को बुलाया। मायावती ने एक घंटे के धारा प्रवाह भाषण में बहुजन हितों की रक्षा पर जोर दिया और कहा कि गठबंधन कभी BSP के हित में नहीं रहे।

2027 चुनाव में अकेले उतरेगी BSP: गठबंधनों का अंत

मायावती ने स्पष्ट कहा, “2027 का विधानसभा चुनाव बहुजन समाज पार्टी अकेले लड़ेगी। गठबंधन सरकारें कभी पूर्ण कार्यकाल नहीं चलीं और हमेशा BSP को नुकसान पहुंचाया।” उन्होंने बताया कि पिछले गठबंधनों में साझेदार दलों को फायदा हुआ, लेकिन BSP का वोट बैंक सुरक्षित नहीं रहा। 2007 की तरह 2027 में बहुमत वाली सरकार बनाने का दावा करते हुए मायावती ने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने को कहा।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह फैसला BSP के मूल बहुजन एजेंडे पर लौटने का संकेत है। 2022 विधानसभा चुनाव में BSP को मात्र एक सीट मिली थी, जबकि वोट शेयर 12.8% रहा। 2024 लोकसभा में भी पार्टी खाता नहीं खोल सकी। लेकिन अब मायावती की रणनीति दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यकों को एकजुट करने पर केंद्रित है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BSP की अकेली लड़ाई SP-कांग्रेस गठबंधन और BJP के बीच त्रिकोणीय मुकाबले को जन्म देगी।

राहुल गांधी पर तंज: नौटंकी और संविधान का मखौल

रैली में मायावती ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर सबसे तीखा हमला बोला। बिना नाम लिए कहा, “कुछ नेता संविधान की किताब हाथ में थामे घूमते हैं, लेकिन उसी संविधान का सबसे ज्यादा अपमान इन्होंने किया। डॉ. अंबेडकर को लोकसभा चुनाव हरवाकर संसद से दूर रखा। मंडल आयोग की रिपोर्ट को दबाए रखा, जब तक वीपी सिंह की सरकार ने लागू नहीं किया।” उन्होंने सवाल उठाया, “दलितों, पिछड़ों और संविधान की बात करने का हक किसे? ये नौटंकी ज्यादा करते हैं।”

यह बयान हालिया INDIA गठबंधन की आलोचना का हिस्सा था। मायावती ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा बहुजन हितों की अनदेखी की। रैली में मौजूद कार्यकर्ताओं ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और ‘जय भीम’ के नारों से समर्थन जताया।

अखिलेश यादव और आजम खां पर प्रहार: सपा का पक्षपात

सपा पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा, “सपा ने हमेशा गुंडों-माफियाओं को बढ़ावा दिया। कानून-व्यवस्था बिगाड़ दी। BSP सरकार की बहुजन योजनाओं को बंद कर दिया।” आजम खां के मुद्दे पर अफवाहों का जिक्र करते हुए बोलीं, “जिससे भी मिलती हूं, खुलकर मिलती हूं। अकेले में नहीं।” उन्होंने सपा सरकार में दलितों के प्रमोशन में आरक्षण खत्म करने का भी जिक्र किया।

मायावती ने साफ किया कि दिल्ली-लखनऊ में आजम खां से मुलाकात की अफवाहें बेबुनियाद हैं। सपा पर पक्षपाती होने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी ने हमेशा बहुजन समाज को ठगा।

चंद्रशेखर को ‘बिकाऊ’ बताया: दलित नेताओं का अपहरण

आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर आजाद पर बिना नाम लिए तंज कसते हुए मायावती ने कहा, “2007 में BSP की पूर्ण बहुमत सरकार बनी तो कांग्रेस, सपा, भाजपा बैचेन हो गईं। उन्होंने दलित समाज के कुछ ‘बिकाऊ’ नेताओं को समर्थन देकर संगठन खड़े किए। ये अंदर ही अंदर BSP को कमजोर करने की साजिश है।”

यह बयान ASP(KR) के साथ तनाव को दर्शाता है। चंद्रशेखर ने अपनी 9 अक्टूबर की रैली स्थगित कर दी थी, जो BSP की ताकत का संकेत मानी जा रही है। मायावती ने दलित एकता पर जोर दिया और कहा कि बाहरी ताकतें बहुजन आंदोलन को तोड़ना चाहती हैं।

भाजपा पर आरोप: दलित-पिछड़ों का उत्पीड़न जारी

भाजपा को ‘जातिवादी पार्टी’ बताते हुए मायावती ने कहा, “उद्घाटन-शिलान्यास तो बहुत हो रहे हैं, लेकिन जनता को कुछ नहीं मिल रहा। दलित-पिछड़ों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ।” उन्होंने 2027 में BSP को जिताने की अपील की और कहा कि सपा-कांग्रेस-भाजपा मिलकर हथकंडे अपनाएंगे। “हमें सावधान रहना होगा, जैसे पिछले चुनावों में किया गया।”

हालांकि, स्मारकों के रखरखाव पर योगी सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा, “BSP सरकार में बने पार्कों और स्मारकों का अच्छा रखरखाव हो रहा। टिकटों से होने वाली आय का सही उपयोग हो रहा है।”

मायावती का जोरदार ऐलान

आकाश आनंद को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष: नई पीढ़ी का संकेत

रैली में मायावती भतीजे आकाश आनंद के साथ मंच पर पहुंचीं। कांशीराम की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद आकाश को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाने का ऐलान किया। आकाश ने कहा, “यह भीड़ 2027 में पांचवीं बार BSP सरकार बनाने का संकेत है।”

आकाश को 2023 में उत्तराधिकारी घोषित किया गया था, लेकिन अनुशासनहीनता के आरोप में दो बार निष्कासित भी हुए। अप्रैल 2025 में वापसी के बाद यह ऐलान उनकी मजबूती का प्रतीक है। पार्टी ने बूथ स्तर पर पुनर्गठन किया है, जो 2027 की रणनीति का हिस्सा है।

रैली का महत्व: BSP की पुनरागमन यात्रा

यह रैली BSP के पुनरुद्धार का प्रतीक है। 2007 के ‘गोल्डन एरा’ को दोहराने का लक्ष्य रखते हुए मायावती ने कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि BSP की मजबूती SP-कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकती है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि वोट ट्रांसफर न होने से चुनौतियां बरकरार हैं।

रैली में नीले गमछे लहराते कार्यकर्ताओं ने ‘जय भीम’ और ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ के नारे लगाए। BSP ने बिहार चुनावों के लिए भी तैयारी तेज कर दी है। यह आयोजन न केवल 2027 का बिगुल है, बल्कि बहुजन राजनीति में नई ऊर्जा का संचार भी। अपडेट्स के लिए बने रहें।

मायावती का जोरदार ऐलान

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