लखनऊ। बिहार में चुनाव हो रहे हैं तो आरोप-प्रत्यारोपों का दौर भी शुरू हो गया है। आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बरेलवी मसलक के प्रमुख मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी ने बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव बिहार में वही गलती दोहरा रहे हैं, जो कभी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने की थी। अखिलेश की तरह तेजस्वी भी राज्य में मुस्लिम नेतृत्व को समाप्त करने की कोशिश कर रहे हैं।

25 नेताओं में एक भी मुस्लिम नहीं
मौलाना रजवी ने एक प्रेस बयान जारी करते हुए कहा कि हाल ही में सहरसा से शुरू हुई कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की “वोट अधिकार रैली” में मंच पर 25 नेताओं की मौजूदगी थी, लेकिन उनमें से एक भी मुस्लिम चेहरा नहीं था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बिहार में मुस्लिम आबादी लगभग 25 प्रतिशत है और यह वर्ग राज्य के चुनावी परिणामों को निर्णायक रूप से प्रभावित करने की क्षमता रखता है, तो मंच पर किसी भी मुस्लिम नेता को क्यों जगह नहीं दी गई?

अखिलेश यादव ने भी यही किया था
मौलाना ने कहा कि तेजस्वी यादव जिस तरह से मुस्लिम समाज को प्रतीकात्मक तौर पर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, वह दरअसल वास्तविक नेतृत्व को दबाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी अखिलेश यादव ने ऐसा ही किया था। पहले मुस्लिमों को साथ लेकर राजनीति की, लेकिन बाद में उनके प्रतिनिधित्व को दरकिनार कर दिया। नतीजा यह हुआ कि मुस्लिम समाज आज उत्तर प्रदेश में राजनीतिक रूप से हाशिये पर पहुंच गया।

मुस्लिम की बनती सीएम पद पर दावेदारी
आल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष ने मुस्लिम समाज से अपील की कि वे ऐसे नेताओं से सावधान रहें, जो सिर्फ वोट के समय मुस्लिमों को याद करते हैं, लेकिन राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने से कतराते हैं। अब मुस्लिमों को नेता बनना है, ना कि पिछल्लू। आबादी के हिसाब से मुस्लिम समाज बिहार में सभी से अधिक है। ऐसे में मुस्लिमों की मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी बनती है। यह दल नारे भी लगाते हैं। जिसकी जितनी संख्या भारी, उतनी उसकी हिस्सेदारी








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