नई दिल्ली 14 जनवरी 2026 – आज पूरी दुनिया में मकर संक्रांति (Makara Sankranti) का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह त्योहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है और उत्तरायण की शुरुआत मानी जाती है। भारत से लेकर नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों तक यह पर्व अलग-अलग नामों और रंगों में मनाया जाता है। आइए जानते हैं कि विश्व स्तर पर मकर संक्रांति कैसे मनाई जा रही है और इसका वैश्विक महत्व क्या है।

मकर संक्रांति का वैश्विक महत्व
सूर्य देव हर साल 14 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे खगोल विज्ञान में सूर्य का उत्तरायण कहा जाता है। यह दिन सूर्य के उत्तरी गोलार्ध की ओर बढ़ने का प्रतीक है, जिससे दिन लंबे होने लगते हैं और ठंड कम होती है। धार्मिक दृष्टि से यह पर्व सूर्य देव की पूजा, दान, पितरों की शांति और नए साल की शुरुआत का प्रतीक है। विश्व स्तर पर इसे Harvest Festival के रूप में भी देखा जाता है, क्योंकि यह फसल कटाई का समय होता है।
विश्व में मकर संक्रांति के अलग-अलग नाम और परंपराएं
- भारत – खिचड़ी, पतंगबाजी, गंगास्नान और तिल-गुड़ का दान। उत्तराखंड, हरियाणा और पंजाब में इसे माघी या घुड़दौड़ के नाम से मनाया जाता है।
- नेपाल – इसे माघे संक्रांति कहा जाता है। लोग चामल, तिल, गुड़ और चना से बने खिचड़ी और यमरी (मीठी रोटी) खाते हैं। जनकपुर में राम-जानकी मंदिर में विशेष पूजा होती है।
- बांग्लादेश – पौष संक्रांति या पिथा उत्सव के नाम से जाना जाता है। लोग पिथा (चावल की रोटी), पायेस और खिचड़ी बनाते हैं। ग्रामीण इलाकों में नाव दौड़ और लोक नृत्य का आयोजन होता है।
- श्रीलंका – उलावा या थाई पोंगल के साथ मिलता-जुलता पर्व। तमिल समुदाय में गायों को स्नान कराकर पूजा की जाती है।
- कंबोडिया और थाईलैंड – सूर्य देव से जुड़ा लोई क्राथोंग या सूर्य उत्सव के तौर पर मनाया जाता है, जहां लोग पानी में दीये तैराते हैं।

2026 में शुभ मुहूर्त और वैश्विक उत्सव
इस साल सूर्य 14 जनवरी को दोपहर 2:32 बजे मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं।
- पुण्य काल: सुबह 7:15 से दोपहर 2:32 तक
- महापुण्य काल: सुबह 10:30 से दोपहर 12:45 तक
विश्व भर में आज गंगा, यमुना, कावेरी और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों में लाखों लोग स्नान कर रहे हैं। हरिद्वार, प्रयागराज और उज्जैन में विशेष कुंभ जैसा माहौल है। नेपाल में जनकपुर से लेकर काठमांडू तक सड़कों पर खिचड़ी वितरण और पतंगबाजी का उत्सव चल रहा है।

पर्यावरण और स्वास्थ्य का संदेश
मकर संक्रांति सिर्फ धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य का भी संदेश देता है। तिल और गुड़ का सेवन सर्दियों में इम्यूनिटी बढ़ाता है, जबकि पतंगबाजी खुशी और सामाजिक एकता का प्रतीक है। इस बार कई जगहों पर प्लास्टिक पतंगों का बहिष्कार किया जा रहा है ताकि पर्यावरण सुरक्षित रहे।
दोस्तों, आज आप भी अपने घर में खिचड़ी बनाएं, सूर्य को अर्घ्य दें और परिवार के साथ खुशियां बांटें। मकर संक्रांति का यह पर्व हमें सकारात्मकता, स्वास्थ्य और एकता की याद दिलाता है।
पूरी दुनिया को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं! 🪁🌞🇮🇳








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