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सहारनपुर में प्रेम विवाद: ईशिका ने ठुकराई परिवार की अपील, बोलीं- शाकिब के बिना कहीं नहीं जाऊंगी, पुलिस ने संभाला तनावपूर्ण माहौल

सहारनपुर में प्रेम विवाद: ईशिका ने ठुकराई परिवार की अपील, बोलीं- शाकिब के बिना कहीं नहीं जाऊंगी, पुलिस ने संभाला तनावपूर्ण माहौल

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के ज्वालानगर इलाके में किला मोहल्ला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। यहां एक हिंदू युवती ईशिका और मुस्लिम युवक शाकिब के बीच चले आ रहे प्रेम प्रसंग ने नया मोड़ ले लिया है। परिवार और हिंदू संगठनों के धरने के बीच ईशिका ने साफ लफ्जों में कहा कि वह शाकिब के घर से कहीं नहीं जाएंगी। यह मामला लंबे समय से कोर्ट की कार्रवाई का हिस्सा रहा है, जहां शाकिब को हाल ही में सजा सुनाई गई थी। लेकिन प्रेम की इस जिद ने इलाके में तनाव बढ़ा दिया है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और युवती को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर पूछताछ की। आइए, जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम की गहराई से पड़ताल।

प्रेम प्रसंग का पुराना इतिहास: 2022 से कोर्ट तक का सफर

यह कहानी 2022 से शुरू होती है, जब ईशिका के परिवार ने शाकिब पर गंभीर आरोप लगाए थे। ईशिका के पिता राजेश मदान की शिकायत पर सहारनपुर पुलिस ने शाकिब के खिलाफ अपहरण और दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया था। बजरंग दल के पूर्व पश्चिमी प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने बताया कि ईशिका की शिकायत के आधार पर यह केस दर्ज हुआ था। जांच के दौरान कई सबूत इकट्ठा किए गए, जिनमें ईशिका के बयान और चिकित्सकीय रिपोर्ट शामिल थीं।

कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया। लंबी सुनवाई के बाद, अक्टूबर 2025 में सेशन कोर्ट ने शाकिब को 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई, साथ ही 65 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह फैसला न सिर्फ परिवार के लिए राहत था, बल्कि इलाके में ऐसे मामलों पर चर्चा को भी हवा दे गया। अदालत के फैसले में कहा गया कि आरोपी ने युवती को बहला-फुसलाकर अपराध किया था, जो समाज के लिए खतरे की घंटी था। सजा सुनाए जाने के बाद शाकिब जेल चला गया, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

सजा के कुछ ही दिनों बाद, ईशिका अचानक शाकिब के घर पहुंच गईं। परिवार का दावा है कि बेटी पर “जादू-टोना” का असर हुआ है, जिसकी वजह से वह घर लौटने को तैयार नहीं हैं। राजेश मदान ने भावुक होकर कहा, “हमारी बेटी को कोई काला जादू कर दिया गया है। वह पहले खुश थी, लेकिन अब कुछ भी सुनने को तैयार नहीं। हम किसी भी हाल में उसे वापस लाएंगे।” यह आरोप इलाके में तंत्र-मंत्र की अफवाहों को हवा दे रहा है, जो ऐसे संवेदनशील मामलों में अक्सर सामने आते हैं।

धरने का दृश्य: हिंदू संगठनों का साथ, मुस्लिम परिवार का बचाव

सोमवार को दोपहर के आसपास हंगामा शुरू हो गया। ईशिका का परिवार हिंदू संगठनों के समर्थन में शाकिब के घर के बाहर धरने पर बैठ गया। बजरंग दल और अन्य संगठनों के कार्यकर्ता मौजूद थे, जो नारे लगाते हुए ईशिका को बाहर लाने की मांग कर रहे थे। विकास त्यागी ने कहा, “यह लव जिहाद का साफ मामला है। हम परिवार के साथ खड़े हैं और बेटी को सुरक्षित वापस दिलाएंगे।” धरने में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, जो माहौल को और भावुक बना रहे थे।

दूसरी तरफ, शाकिब के पिता इरफान ने बचाव में कहा, “हमने ईशिका को जबरन नहीं रखा। उसके परिवार वाले ही उसे हमारे घर छोड़कर चले गए थे। वह खुद यहां रहना चाहती है।” इरफान का यह बयान मामले को और जटिल बना रहा है। उन्होंने पुलिस से अपील की कि मामले की निष्पक्ष जांच हो। लेकिन तनाव चरम पर था। आसपास के लोग घरों में कैद हो गए, दुकानें बंद हो गईं, और सड़कों पर सन्नाटा पसर गया।

ईशिका ने भी अपना रुख साफ कर दिया। जब परिवार के सदस्यों ने उन्हें मनाने की कोशिश की, तो उन्होंने कहा, “भले ही शाकिब जेल में हो, मैं इस घर से नहीं जाऊंगी। जब वह बाहर आएगा, तब मैं उसी से शादी करूंगी।” यह बयान सुनकर परिवार वाले स्तब्ध रह गए। ईशिका की यह जिद प्रेम की ताकत को दर्शाती है, लेकिन परिवार के लिए यह दर्दनाक है। सूत्रों के अनुसार, ईशिका ने पुलिस को भी यही बताया कि वह स्वेच्छा से शाकिब के परिवार के साथ रह रही हैं।

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पुलिस की त्वरित कार्रवाई: तनाव नियंत्रण में, युवती को सुरक्षित स्थान पर ले जाया

सहारनपुर पुलिस ने सूचना मिलते ही मौके पर भारी संख्या में फोर्स तैनात कर दी। एसएसपी ने खुद स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने धरना समाप्त कराया और ईशिका को हिरासत में लेकर थाने ले गईं। वहां काउंसलरों की मदद से उनसे बात की गई। प्रारंभिक पूछताछ में ईशिका ने दोहराया कि वह सुरक्षित हैं और घर लौटना नहीं चाहतीं। पुलिस ने उन्हें एक सुरक्षित स्थान पर रखा है, जहां परिवार और संगठनों के सदस्यों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा।

पुलिस प्रवक्ता ने बताया, “मामले की निष्पक्ष जांच चल रही है। ईशिका के बयान दर्ज किए गए हैं, और कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी। इलाके में शांति बनाए रखने के लिए पीएसी और आरआरएफ की टुकड़ियां तैनात हैं।” यह कार्रवाई सराहनीय रही, क्योंकि इससे कोई अप्रिय घटना होने से बचा। सहारनपुर जैसे संवेदनशील जिले में धार्मिक तनाव जल्दी भड़क सकता है, लेकिन प्रशासन की सतर्कता ने स्थिति को संभाल लिया।

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लव जिहाद विवाद: समाज के लिए चिंता का विषय

यह मामला “लव जिहाद” के बहुचर्चित शब्द को फिर से सामने ला रहा है। उत्तर प्रदेश में ऐसे केसों पर सख्त कानून हैं, जैसे धार्मिक रूपांतरण विरोधी अधिनियम। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रेम प्रसंग और अपराध के बीच की रेखा पतली होती है, और परिवारों को सतर्क रहना चाहिए। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “युवाओं को जागरूक करने की जरूरत है। प्रेम में अंधापन खतरनाक हो सकता है।” वहीं, मानवाधिकार संगठन चेतावनी दे रहे हैं कि ऐसे मामलों को धार्मिक रंग न दिया जाए, वरना सामाजिक सद्भाव प्रभावित होता है।

सहारनपुर का इतिहास देखें तो यहां धार्मिक विवाद पुराने हैं। 2017 के दंगे याद हैं, जब छोटे-मोटे मुद्दे बड़े टकराव में बदल गए थे। लेकिन वर्तमान में प्रशासन की सजगता से ऐसे हादसे कम हो रहे हैं। इस घटना से सबक लेते हुए, स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम चलाने की मांग उठ रही है। युवतियों को आत्मरक्षा और कानूनी अधिकारों की जानकारी दी जानी चाहिए।

परिवार का दर्द और प्रेम की जिद: भावनात्मक पक्ष

ईशिका के परिवार का दर्द देखने लायक है। मां ने रोते हुए कहा, “हमारी बेटी पढ़ाई में तेज थी, लेकिन यह प्रेम ने सब बर्बाद कर दिया।” वहीं, शाकिब का परिवार भी परेशान है। इरफान ने बताया कि वे गरीब हैं और बेटे की सजा से टूट चुके हैं। ईशिका की जिद प्रेम की मिसाल लगती है, लेकिन क्या यह सही है? मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे मामलों में काउंसलिंग जरूरी है। जादू-टोना जैसे आरोप अक्सर मानसिक दबाव से जुड़े होते हैं।

यह घटना समाज को सोचने पर मजबूर कर रही है। क्या प्रेम की उम्र सीमा या धार्मिक बंधन होते हैं? या व्यक्तिगत स्वतंत्रता सर्वोपरि है? कानून परिवार की रक्षा करता है, लेकिन भावनाओं को कैसे संभाला जाए? इन सवालों के जवाब ढूंढने की जरूरत है।

आगे की राह: कोर्ट और काउंसलिंग की भूमिका

अब मामला फिर कोर्ट जाएगा। ईशिका के बयान पर फैसला होगा। अगर वे बालिग हैं और स्वेच्छा से रहना चाहती हैं, तो कानून उनका साथ देगा। लेकिन परिवार की अपील पर सुनवाई होगी। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे केसों में मध्यस्थता समितियां काम आएं। सहारनपुर प्रशासन ने घोषणा की है कि इलाके में शांति बैठकें आयोजित की जाएंगी।

यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। हमें प्रेम को सम्मान देना चाहिए, लेकिन अपराध को बर्दाश्त नहीं। आशा है कि ईशिका सुरक्षित रहेंगी और परिवार का दर्द कम हो। सहारनपुर जैसे शहरों में सद्भाव की मिसाल कायम रखनी होगी।

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