बरेली के बीसलपुर रोड पर संचालित अस्पताल में भ्रूण परीक्षण का मामला, स्थानीय लोगों ने की तत्काल जांच की मांग
फरीदपुर, बरेली के बीसलपुर रोड पर स्थित एक अस्पताल में अवैध अल्ट्रासाउंड और भ्रूण परीक्षण की गतिविधियों का मामला सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक फोटो, जिसमें लगभग 4-6 महीने का भ्रूण दिखाई दे रहा है, ने पूरे क्षेत्र में चिंता पैदा कर दी है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह सेंटर बिना उचित पंजीकरण और मानकों के संचालित हो रहा था, जहां गर्भावस्था संबंधी जांच और अन्य प्रक्रियाएं नियमों का उल्लंघन करते हुए की जा रही थीं।

घटना का विवरण: कैसे आया मामला सामने?
बीसलपुर रोड एक व्यस्त सड़क है, जहां दैनिक जीवन की हलचल हमेशा बनी रहती है। सूत्रों के अनुसार, इस अस्पताल में कई महीनों से संदिग्ध गतिविधियां चल रही थीं। वायरल फोटो के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। फोटो में भ्रूण का चित्रण इतना स्पष्ट था कि यह अवैध भ्रूण परीक्षण की ओर इशारा करता प्रतीत होता है। निवासियों का कहना है कि सेंटर में बिना योग्य चिकित्सकों के अल्ट्रासाउंड जांच की जा रही थी, जो प्री-कॉन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स (PCPNDT) एक्ट का स्पष्ट उल्लंघन है।
इस एक्ट का उद्देश्य लिंगानुपात संतुलित रखना और भ्रूण हत्या को रोकना है। लेकिन फरीदपुर जैसे छोटे शहर में ऐसे सेंटरों का संचालन बिना किसी रोकटोक के जारी रहना चिंताजनक है। स्थानीय लोगों ने बताया कि सेंटर संचालक मुनाफे के लिए बिना रिकॉर्ड रखे जांच कर रहे थे, जिससे कई परिवार प्रभावित हो सकते हैं। वायरल फोटो ने न केवल सेंटर को निशाना बनाया, बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी उंगली उठाई।
स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर सवाल
फरीदपुर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर अब उंगलियां उठ रही हैं। निवासियों का कहना है कि वार्षिक निरीक्षण केवल कागजों पर ही सीमित रहता है, जबकि जमीनी स्तर पर अवैध सेंटर खुले आम फल-फूल रहे हैं। एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यह सेंटर वर्षों से चल रहा था, लेकिन कोई जांच नहीं हुई। अगर समय पर कार्रवाई होती, तो यह स्थिति न आती।” विभागीय सूत्रों के अनुसार, PCPNDT एक्ट के तहत सेंटरों का पंजीकरण अनिवार्य है, लेकिन कई जगहों पर यह प्रक्रिया ढीली पड़ जाती है।
इस मामले में जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने प्रारंभिक जांच का आदेश दिया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वायरल फोटो की प्रामाणिकता जांच की जा रही है, और अगर सेंटर का पंजीकरण अमान्य पाया गया, तो तत्काल कार्रवाई होगी। हालांकि, स्थानीय संगठनों ने मांग की है कि न केवल सेंटर सील किया जाए, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जाए। यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता की कमी को उजागर करती है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में।

लोगों की प्रतिक्रिया और सामाजिक प्रभाव
वायरल फोटो के बाद फरीदपुर में सामाजिक चिंता बढ़ गई है। महिलाओं और परिवारों में डर का माहौल है, क्योंकि अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर लिंग भेदभाव को बढ़ावा देते हैं। एक महिला संगठन की सदस्य ने कहा, “यह न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि समाज की संवेदनशीलता पर भी सवाल उठाता है। हमें जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है।” स्थानीय निवासियों ने अस्पताल के बाहर धरना देने की चेतावनी दी है, यदि जल्द कार्रवाई न हुई।
यह मामला पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बन चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि PCPNDT एक्ट के सख्त क्रियान्वयन से लिंगानुपात में सुधार हुआ है, लेकिन जमीनी स्तर पर निगरानी की कमी बाधा है। फरीदपुर की यह घटना एक सबक है कि स्वास्थ्य विभाग को नियमित ऑन-साइट जांच बढ़ानी चाहिए।
कानूनी पहलू: PCPNDT एक्ट क्या कहता है?
पीसीपीएनडीटी एक्ट 1994 का उद्देश्य भ्रूण परीक्षण पर रोक लगाना है। इसके तहत अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर पर 3-5 साल की जेल और जुर्माना है। सेंटर का संचालन बिना रजिस्ट्रेशन के दंडनीय है। इस मामले में पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है, और स्वास्थ्य विभाग ने सेंटर सील करने की प्रक्रिया तेज की है। यदि फोटो प्रामाणिक साबित हुई, तो संचालक पर कड़ी कार्रवाई होगी।
निष्कर्ष: जागरूकता और कार्रवाई की जरूरत
फरीदपुर का यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और निगरानी की कमी को दर्शाता है। वायरल फोटो ने न केवल सेंटर को निशाना बनाया, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि सेंटर तुरंत सील हो और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो। सरकार को PCPNDT एक्ट का सख्त पालन सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। अगर आप भी किसी अवैध सेंटर के बारे में जानते हैं, तो स्वास्थ्य विभाग को सूचित करें। समाज की जिम्मेदारी है कि हम लिंग समानता को मजबूत करें।








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