आपदा योद्धाओं का सम्मान: मुख्यमंत्री धामी ने राहत कर्मियों को किया सम्मानित, स्कूल-कॉलेजों में आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण को दी मजबूती

आपदा योद्धाओं का सम्मान: मुख्यमंत्री धामी ने राहत कर्मियों को किया सम्मानित, स्कूल-कॉलेजों में आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण को दी मजबूती

उत्तराखंड की देवभूमि में प्रकृति के सौंदर्य के साथ-साथ आपदाओं की चुनौतियां भी हमेशा बनी रहती हैं। इन्हीं चुनौतियों से निपटने वाले वीर योद्धाओं के सम्मान में आज मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने पटेलनगर स्थित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में एक भावपूर्ण समारोह में भाग लिया। अर्पित फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘प्राइड मूवमेंट सम्मान समारोह’ में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और आईटीबीपी के उन बहादुर कर्मियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने आपदा के दौरान राहत एवं बचाव अभियान में अपनी जान की परवाह किए बिना अथक परिश्रम किया।

आपदा योद्धाओं का सम्मान: मुख्यमंत्री धामी ने राहत कर्मियों को किया सम्मानित, स्कूल-कॉलेजों में आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण को दी मजबूती

सम्मान: कृतज्ञता का प्रतीक

मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा, “ये सम्मान उन नायकों के प्रति हमारी गहरी कृतज्ञता का प्रतीक है, जिन्होंने आपदा की विभीषिका में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए दिन-रात एक कर दिया।” उन्होंने उत्तराखंड की भौगोलिक कठिनाइयों का जिक्र करते हुए बताया कि हिमालय की गोद में बसे इस राज्य में भूस्खलन, बाढ़, अतिवृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाएं आम हैं। प्रकृति का मनोहारी सौंदर्य जितना आकर्षक है, उतनी ही अप्रत्याशित चुनौतियां भी यहां जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं।

आपदाओं की मार्मिक यादें: 2013 से 2025 तक की त्रासदियां

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य की प्रमुख आपदाओं का जिक्र किया, जो हर नागरिक के दिल में दर्द बनकर बसी हैं:

2013 की केदारनाथ त्रासदी: जयप्रलय में हजारों जिंदगियां खो गईं, लेकिन बहादुरों ने अनगिनत जानें बचाईं।
2021 की ऋषिगंगा-धौलीगंगा आपदा: चमोली में आई इस बाढ़ ने पूरे देश को झकझोर दिया।
2023 का जोशीमठ धंसाव: एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरा, जिसने सबको सतर्क कर दिया।
2025 की हालिया घटनाएं: इस वर्ष उत्तरकाशी, चमोली और देहरादून में भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की कई घटनाओं ने कई जिंदगियां लील लीं, संपत्ति का भारी नुकसान हुआ।

इन आपदाओं में मानव जीवन की रक्षा सबसे बड़ी चुनौती थी। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पुलिस-प्रशासन के जवानों ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर घायलों और मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला। उन्होंने राहत शिविरों का संचालन किया और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।

आपदा योद्धाओं का सम्मान: मुख्यमंत्री धामी ने राहत कर्मियों को किया सम्मानित, स्कूल-कॉलेजों में आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण को दी मजबूती

सिल्क्यारा टनल: देशव्यापी अभियान की सफलता

मुख्यमंत्री ने 2023 के सिल्क्यारा टनल हादसे का विशेष उल्लेख किया, जहां 40 से अधिक मजदूर फंस गए थे। “दिन-रात चलने वाले बचाव अभियान पर पूरे देश की नजरें टिकी थीं। बाबा भोखनाथ के आशीर्वाद और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन से हम सफल हुए।” यह अभियान न केवल तकनीकी कौशल का प्रदर्शन था, बल्कि टीमवर्क और दृढ़ संकल्प का जीवंत उदाहरण भी।

केंद्र सरकार का सहयोग: पीएम मोदी का विशेष योगदान

आपदा राहत कार्यों में केंद्र सरकार के सहयोग का आभार व्यक्त करते हुए श्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं देहरादून आकर पीड़ितों से मुलाकात की, उनकी समस्याएं सुनीं और त्वरित निर्णय लिए। उन्होंने उत्तराखंड के लिए 1200 करोड़ रुपये की विशेष राहत राशि घोषित की, जो पुनर्वास और पुनर्निर्माण में मील का पत्थर साबित हुई। गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन ने भी राज्य को मजबूत बनाया।

राज्य सरकार की पहल: आपदा प्रबंधन में नई दिशा

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की आपदा प्रबंधन को मजबूत करने वाली योजनाओं पर प्रकाश डाला:

  • तकनीकी उन्नयन: एसडीआरएफ जवानों को ड्रोन, सैटेलाइट मॉनिटरिंग और अत्याधुनिक रेस्क्यू गियर उपलब्ध कराए गए।
  • आपदा मित्र योजना: गांव-गांव में स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके।
  • डिजास्टर रेजिलिएंट तकनीक: सड़क और पुल निर्माण में आपदा प्रतिरोधी तकनीकों को अनिवार्य किया गया।
  • पुनर्वास पर फोकस: आपदा केवल संपत्ति ही नहीं तोड़ती, बल्कि आत्मविश्वास और आजीविका को भी प्रभावित करती है। इसलिए मुआवजे के साथ-साथ पुनर्वास और रोजगार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

भविष्य की तैयारी: शिक्षा में आपदा प्रबंधन का समावेश

सबसे महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण को स्कूल-कॉलेजों के पाठ्यक्रम में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। “हमारी आने वाली पीढ़ी को आपदाओं से निपटने के लिए तैयार करना हमारी जिम्मेदारी है। यह कदम युवाओं को जागरूक और सक्षम बनाएगा।”

छात्रों का स्वागत: नकल-विरोधी कानून पर सराहना

समारोह में छात्रों ने मुख्यमंत्री का विशेष स्वागत किया, जिसमें नकल-विरोधी कानून लागू करने के लिए उनका आभार व्यक्त किया गया। यह कानून शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

समारोह में प्रमुख उपस्थिति

इस अवसर पर विधायक श्री प्रेमचंद अग्रवाल, स्वामी रूपेंद्र प्रकाश, श्री कृष्ण गिरी महाराज, अपर पुलिस महानिदेशक श्री वी. मुरूगेशन और कार्यक्रम संयोजक श्रीमती हनी पाठक उपस्थित रहीं। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जो सभी के मन में आपदा योद्धाओं के प्रति सम्मान की भावना को और गहरा कर गया।

उत्तराखंड सरकार का यह प्रयास न केवल आपदा प्रबंधन को मजबूत करेगा, बल्कि राज्य को एक सुरक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर ले जाएगा। मुख्यमंत्री श्री धामी के नेतृत्व में देवभूमि हर चुनौती का डटकर मुकाबला करने को तैयार है।

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