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Holi in the Kunj streets of Mathura-Vrindavan मथुरा-वृंदावन की कुंज गलियों में होली का जादू: रंगों की बौछार, भक्ति का उल्लास और राधा-कृष्ण की मिठास!

Holi in the Kunj streets of Mathura-Vrindavan मथुरा-वृंदावन की कुंज गलियों में होली का जादू: रंगों की बौछार, भक्ति का उल्लास और राधा-कृष्ण की मिठास!

होली का असली रंग तो मथुरा और वृंदावन में ही दिखता है! जहां रंग सिर्फ शरीर पर नहीं, बल्कि आत्मा पर भी लगते हैं। 25 फरवरी से ही ब्रज की होली शुरू हो चुकी है, लेकिन 4 मार्च से पहले ही कुंज गलियां, मंदिर परिसर और गौघाट भक्तों से खचाखच भर चुके हैं। देश के कोने-कोने से लोग यहां पहुंच रहे हैं – राधा-कृष्ण की लीला में रंग भरी होली खेलने, भस्म लगाने और वो दिव्य आनंद लेने जो कहीं और नहीं मिलता।

गलियों में रंगों की बौछार हो रही है, ढोल-मंजीरे की थाप पर भक्त नाच रहे हैं, और हर तरफ “राधे-राधे” और “हरि बोल” के जयकारे गूंज रहे हैं। मंदिरों में होली का रूप अलग ही है – प्रेम, भक्ति और वैराग्य का अनोखा संगम।

Holi in the Kunj streets of Mathura-Vrindavan मथुरा-वृंदावन की कुंज गलियों में होली का जादू: रंगों की बौछार, भक्ति का उल्लास और राधा-कृष्ण की मिठास!

श्रद्धालुओं की जुबानी: “यहां की होली में मिठास है!”

इटावा से आए एक श्रद्धालु ने बताया, “मथुरा की होली के बारे में जितना सुना था, उससे कहीं ज्यादा आनंद मिल रहा है। यहां रंग खेलते हुए लगता है कि राधा रानी और श्री कृष्ण खुद साथ हैं। परिवार के साथ आए हैं, ताकि बच्चों को भी ये दिव्य अनुभव मिले।”

दिल्ली से हर साल आने वाले राघव कहते हैं, “सूतक हो या ग्रहण, हमें फर्क नहीं पड़ता। वृंदावन आते हैं, दर्शन करते हैं और मन को शांति मिलती है। लगता है आज कुछ अच्छा किया है।” एक अन्य भक्त ने जोड़ा, “6 साल से हर होली यहां मनाते हैं। प्रेम भरी होली कहीं और नहीं होती।”

Holi in the Kunj streets of Mathura-Vrindavan मथुरा-वृंदावन की कुंज गलियों में होली का जादू: रंगों की बौछार, भक्ति का उल्लास और राधा-कृष्ण की मिठास!

इस्कॉन कोलकाता में भी राधा नाम की होली

मथुरा-वृंदावन के अलावा कोलकाता के इस्कॉन मंदिर में भी भक्तों ने प्रेम से होली खेली। राधा नाम जपते हुए रंग उड़ाए गए। इस्कॉन के उपाध्यक्ष राधारमन प्रभु ने बताया, “चैतन्य महाप्रभु प्रेम का संदेश लेकर आए थे। उनका जन्म होली के दिन हुआ था (1486 में नबद्वीप में), और उस दिन चंद्र ग्रहण भी था – ठीक आज जैसा। ये संयोग भक्तों के लिए खास है।”

मथुरा-वृंदावन की ये होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि कृष्ण-भक्ति का महापर्व है। अगर आपने कभी यहां होली नहीं खेली, तो अगली बार जरूर प्लान करें – क्योंकि यहां रंग लगते हैं, तो दिल भी रंग जाता है।

आपने कहां होली मनाई? मथुरा-वृंदावन गए हैं या प्लान है? कमेंट में बताएं।

राधे-राधे! जय होली! जय श्री कृष्ण! 🌸🔴💚

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