मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद की नींव: सस्पेंडेड TMC विधायक हुमायूं कबीर का विवादास्पद कदम, भारी सुरक्षा के बीच समारोह

मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद की नींव: सस्पेंडेड TMC विधायक हुमायूं कबीर का विवादास्पद कदम, भारी सुरक्षा के बीच समारोह

6 दिसंबर की वर्षगांठ पर बंगाल के संवेदनशील इलाके में नींव रखी, TMC सस्पेंड करने के बावजूद विधायक ने कहा ‘कोई रोक नहीं सकता’

पश्चिम बंगाल के मुरशिदाबाद जिले के बेल्डंगा में आज एक ऐसा समारोह हुआ, जो राजनीतिक और सामाजिक रूप से चर्चा का विषय बन गया। सस्पेंडेड तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक हुमायूं कबीर ने अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक नई मस्जिद की नींव रखी। यह घटना बाबरी मस्जिद विध्वंस की 32वीं वर्षगांठ (6 दिसंबर 1992) पर हुई, जिसने पूरे इलाके में तनाव पैदा कर दिया। भारी सुरक्षा बलों की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों लोग शामिल हुए, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे ‘सांप्रदायिक राजनीति का खेल’ करार दिया है। आइए, इस विवादास्पद घटना की पूरी डिटेल्स जानते हैं।

नींव रखने का समारोह: कुरान पाठ से शुरू हुई धार्मिक आयोजन

समारोह दोपहर 2 बजे बेल्डंगा के एक खुले मैदान में शुरू हुआ, जहां हुमायूं कबीर ने कुरान की तिलावत कराई। इसके बाद, उन्होंने औपचारिक रूप से मस्जिद की नींव रखी। कबीर ने दावा किया कि इस कार्यक्रम में सऊदी अरब से आए दो मौलानाओं सहित हजारों मुसलमान शामिल हुए। कार्यक्रम में बिरयानी का भोज भी आयोजित किया गया, जो स्थानीय समुदाय को आकर्षित करने का प्रयास लग रहा था। कबीर ने मंच से कहा, “यह मस्जिद बाबरी मस्जिद की याद दिलाएगी। कोई ताकत इसे रोक नहीं सकती। हम कोलकाता हाईकोर्ट के आदेशों का पालन कर रहे हैं।”

मस्जिद का डिजाइन अयोध्या की बाबरी मस्जिद जैसा बताया जा रहा है, जो विवाद को और भड़ाने का कारण बन सकता है। कबीर ने जून 2024 में इसकी घोषणा की थी, लेकिन TMC ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था। फिर भी, वे अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को जारी रखे हुए हैं। समारोह में मुरशिदाबाद के स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी संख्या में पहुंचे, लेकिन हिंदू संगठनों ने इसे ‘उकसावे’ का प्रयास बताया।

मुरशिदाबाद में बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद की नींव: सस्पेंडेड TMC विधायक हुमायूं कबीर का विवादास्पद कदम, भारी सुरक्षा के बीच समारोह

भारी सुरक्षा व्यवस्था: हाईकोर्ट के आदेशों का पालन

मुरशिदाबाद को सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील माना जाता है, इसलिए कार्यक्रम से पहले प्रशासन ने सख्त सुरक्षा इंतजाम किए। रैपिड एक्शन फोर्स (RAF), जिला पुलिस, और केंद्रीय बलों को तैनात किया गया। नेशनल हाईवे 12 के दोनों ओर बैरिकेडिंग लगाई गई, और ड्रोन से निगरानी की गई। कोलकाता हाईकोर्ट ने कार्यक्रम पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, लेकिन राज्य सरकार को सार्वजनिक व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी सौंपी थी।

जिला मजिस्ट्रेट ने बताया, “हमने शांति बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए हैं। कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।” लेकिन विपक्षी दलों ने प्रशासन पर नरमी का आरोप लगाया। BJP ने कहा कि यह ‘सांप्रदायिक तनाव फैलाने का प्रयास’ है, जबकि TMC ने कबीर को ‘पार्टी से बर्खास्त’ बताते हुए दूरी बनाई।

मुरशिदाबाद में बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद की नींव: सस्पेंडेड TMC विधायक हुमायूं कबीर का विवादास्पद कदम, भारी सुरक्षा के बीच समारोह

राजनीतिक प्रतिक्रिया: TMC की निंदा, BJP का हमला

TMC ने कबीर पर तीखा प्रहार किया। पार्टी प्रवक्ता ने कहा, “कबीर की कार्रवाई सांप्रदायिक राजनीति का नंगा नाच है। हमने उन्हें सस्पेंड किया है, और अब यह पूरी तरह उनकी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा है।” दूसरी ओर, BJP ने राज्य सरकार पर ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ का आरोप लगाया। BJP नेता सुवेंदु अधिकारी ने ट्वीट किया, “मुरशिदाबाद में बाबरी मस्जिद जैसी संरचना का निर्माण? यह TMC की वोटबैंक राजनीति का नया अध्याय है।”

स्थानीय मुस्लिम समुदाय के कुछ नेताओं ने कबीर का समर्थन किया, कहा कि यह “धार्मिक स्वतंत्रता का प्रतीक” है। लेकिन कई लोगों ने चिंता जताई कि यह तनाव बढ़ा सकता है। हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

मस्जिद का महत्व: सांप्रदायिक सद्भाव या राजनीतिक खेल?

मुरशिदाबाद, जो बंगाल का एक मुस्लिम बहुल इलाका है, पहले से ही सांप्रदायिक तनाव का शिकार रहा है। कबीर का यह कदम बाबरी मस्जिद विध्वंस की याद दिलाता है, जो 1992 में अयोध्या में हुई थी। कबीर ने दावा किया कि यह मस्जिद “80 करोड़ मुसलमानों की आवाज” बनेगी। लेकिन आलोचक इसे चुनावी स्टंट बता रहे हैं, क्योंकि 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव नजदीक हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे आयोजन सामाजिक सद्भाव को प्रभावित कर सकते हैं। एक स्थानीय इतिहासकार ने कहा, “मुरशिदाबाद का इतिहास समृद्ध है, लेकिन सांप्रदायिक मुद्दों से इसे बचाना चाहिए।” कार्यक्रम में सऊदी मौलानाओं की मौजूदगी ने इसे अंतरराष्ट्रीय आयाम दिया, लेकिन क्या यह शांति का संदेश देगा या तनाव बढ़ाएगा?

आगे की राह: तनाव या समाधान?

आज का समारोह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन विपक्षी दलों ने हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। TMC ने कबीर को पूरी तरह अलग कर दिया है, जबकि BJP इसे ‘TMC की साजिश’ बता रही है। स्थानीय प्रशासन ने शांति बनाए रखने के लिए और फोर्स तैनात की है। क्या यह मस्जिद निर्माण बंगाल की राजनीति को नया मोड़ देगा, या शांति का प्रतीक बनेगी? शहरवासी इंतजार कर रहे हैं।

अगर आप मुरशिदाबाद के स्थानीय हैं, तो अपनी राय कमेंट में शेयर करें। क्या यह सद्भाव का कदम है या राजनीतिक ड्रामा?

रिपोर्टर: JN न्यूज स्पेशल डेस्क
स्थान: बेल्डंगा, मुरशिदाबाद, पश्चिम बंगाल

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