टनकपुर, 24 अक्टूबर 2025: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को शारदा घाट, टनकपुर में शारदा कॉरिडोर परियोजना के प्रथम चरण का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने इस परियोजना को आस्था, सांस्कृतिक धरोहर और सतत विकास का प्रतीक बताते हुए इसे उत्तराखंड के लिए एक ऐतिहासिक कदम करार दिया।

शारदा कॉरिडोर: आस्था और समृद्धि का संगम
मुख्यमंत्री ने कहा, “शारदा कॉरिडोर केवल एक अवसंरचनात्मक परियोजना नहीं, बल्कि हमारी आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सतत विकास के प्रति एक सामूहिक संकल्प है। यह परियोजना बनबसा से माता रंकोची तक के क्षेत्र को धर्म, प्रकृति और रोजगार के सुंदर संगम के रूप में विकसित करेगी। यह क्षेत्र न केवल आस्था का केंद्र रहेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक समृद्धि और अवसरों की नई धारा भी प्रवाहित करेगा।”
प्रथम चरण की विशेषताएँ
₹185.20 करोड़ की लागत से शुरू होने वाले इस प्रथम चरण में शारदा नदी के तट को पर्यावरण-संवेदनशील, स्वच्छ, सुरक्षित और आकर्षक बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। परियोजना के प्रमुख कार्यों में शामिल हैं:
- सुरक्षित स्नान घाट और आरती स्थल का निर्माण, जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर की सामग्री और तकनीक का उपयोग होगा।
- रेनवाटर हार्वेस्टिंग और फ्लोर कूलिंग सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएँ।
- बाढ़ प्रतिरोधी संरचनाएँ जो नदी के प्रवाह को नियंत्रित कर आसपास के क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी।
- स्वच्छता, विश्राम सुविधाएँ, सुंदर घाट, पैदल पथ, प्रकाश व्यवस्था और सौंदर्यीकरण कार्य।

प्रथम चरण की प्रमुख परियोजनाएँ
मुख्यमंत्री ने शारदा कॉरिडोर के तहत निम्नलिखित महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शुभारंभ किया:
- किरोड़ा नाला पारिस्थितिक कॉरिडोर (₹109.57 करोड़): जैव विविधता संरक्षण और आपदा प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाने के लिए।
- सिटी ड्रेनेज योजना – चरण 1 (₹62.11 करोड़): शहरी जल निकासी प्रणाली को सुदृढ़ कर बाढ़ नियंत्रण और वर्षा जल प्रबंधन।
- थाक गाँव तक वैकल्पिक मार्ग (₹5.34 करोड़): तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित और सुगम मार्ग।
- थुलिगाड़ में मल्टी-लेवल कार पार्किंग (₹33.57 करोड़): यातायात दबाव को कम करने के लिए आधुनिक पार्किंग सुविधा।
- पूर्णागिरि मंदिर क्षेत्र में वन सूचना केंद्र (₹5.34 करोड़): तीर्थयात्रियों के लिए प्राकृतिक और धार्मिक जानकारी केंद्र।
- रंकोची मंदिर पर्यटन एवं नवीनीकरण (₹4.57 करोड़): मंदिर की अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण।
- ईको-रिसॉर्ट (₹46 करोड़): बूम, थुलिगाड़, खालडुंगा और चूका में ईको-रिसॉर्ट, जिसमें चूका को विवाह स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।
- एडवेंचर गतिविधियाँ (₹300 करोड़): पैरामोटरिंग, राफ्टिंग जैसी गतिविधियाँ, जो स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार प्रदान करेंगी।
- लालकोठी से धनुष पुल तक मार्ग नवीनीकरण (₹25 करोड़): 5 किलोमीटर लंबा सुरक्षित और चौड़ा मार्ग।

धार्मिक पर्यटन और आर्थिक विकास को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि शारदा कॉरिडोर परियोजना धार्मिक पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। यह परियोजना सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से एक अनूठा मॉडल बनेगी। उन्होंने कहा कि पूर्णागिरि और माता रंकोची क्षेत्र आस्था, वन, जीव-जंतु और प्रकृति शिक्षा का केंद्र बनेंगे, जहाँ पर्यावरण-संवेदनशील विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।
पर्यावरण और जन-सहभागिता पर जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि परियोजना के कुछ क्षेत्र वन भूमि में आते हैं, जिनके लिए वन विभाग के साथ भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया प्रगति पर है। उत्तराखंड निवेश और आधारभूत ढांचा विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) के माध्यम से परियोजना को संचालित किया जा रहा है। डांडा और चूका जैसे राजस्व भूमि वाले क्षेत्रों का हस्तांतरण भी शीघ्र पूरा होगा।
उन्होंने कहा, “शारदा कॉरिडोर का विकास जन-सहभागिता, पारदर्शिता और पर्यावरणीय संतुलन के साथ किया जाएगा। हर निर्णय में स्थानीय नागरिकों की राय और भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।”
परंपरा और प्रगति का समन्वय
मुख्यमंत्री ने कहा, “शारदा कॉरिडोर केवल भौगोलिक विकास नहीं, बल्कि हमारी आस्था और आत्मा का पुनर्जागरण है। यह परियोजना परंपरा और प्रगति, आस्था और आधुनिकता का एक अनुपम उदाहरण बनेगी।” उन्होंने विश्वास जताया कि यह परियोजना उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों को धार्मिक, आर्थिक और सांस्कृतिक समृद्धि का नया स्वरूप प्रदान करेगी।
शारदा कॉरिडोर परियोजना न केवल स्थानीय निवासियों के लिए अवसरों का सृजन करेगी, बल्कि उत्तराखंड को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करेगी।








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