27 नवंबर से 8 मार्च तक ऑपरेशन जीरो टॉलरेंस, जागरूकता से हस्तक्षेप तक—योगी सरकार का संकल्प, बाल विवाह पर लगाम लगाने का वादा
उत्तर प्रदेश में बाल विवाह के काले साये को मिटाने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के तहत 100 दिवसीय महाअभियान की शुरुआत 27 नवंबर 2025 को हो गई, जो 8 मार्च 2026 तक चलेगा। इस दौरान जिला, ब्लॉक, ग्राम और वार्ड स्तर पर ‘ऑपरेशन जीरो टॉलरेंस’ लागू रहेगा। महिला कल्याण निदेशालय के निर्देशानुसार हर गतिविधि, कार्रवाई और प्रगति रिपोर्ट बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल पर दर्ज होगी।
लापरवाही बरतने पर जिला प्रोबेशन अधिकारी और CMPO सीधे जिम्मेदार होंगे। प्रदेश के 10 हाई-रिस्क जिलों पर विशेष नजर रखी जाएगी, जहाँ स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, पंचायत और सामाजिक संगठनों की संयुक्त टीमें सक्रिय होंगी। क्या यह अभियान बाल विवाह की जड़ें उखाड़ फेंकेगा? आइए, इस महाअभियान की पूरी रूपरेखा जानते हैं।

तीन चरणों में अभियान: जागरूकता से कानूनी हस्तक्षेप तक सख्ती
यह महाअभियान तीन चरणों में चलेगा, जो जागरूकता से शुरू होकर प्रत्यक्ष कार्रवाई पर समाप्त होगा। पहले चरण में स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे, जहाँ छात्र-छात्राओं को बाल विवाह के नुकसान, कानूनी प्रावधानों और शिक्षा के महत्व पर व्याख्यान दिए जाएंगे। आंगनबाड़ी केंद्रों पर माताओं को लक्षित कार्यक्रम होंगे, ताकि बालिकाओं की शादी रोकने के लिए परिवार स्तर पर संवाद शुरू हो।
दूसरे चरण में मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, मैरिज हॉल और विवाह सेवा प्रदाताओं के माध्यम से निगरानी की जाएगी। पंडितों, मौलवियों और कैटरर्स को दिशा-निर्देश दिए जाएंगे कि वे बाल विवाह की सूचना तुरंत प्रशासन को दें। तीसरे चरण में गाँव और वार्ड स्तर पर हाई-रिस्क परिवारों की पहचान होगी, और सीधे हस्तक्षेप कर बाल विवाह रोकने के प्रयास होंगे। अभियान के अंतर्गत बाल विवाह विरोधी प्रतिज्ञा, सफल मामलों की केस स्टडी, और बाल विवाह मुक्त ग्राम-वार्ड घोषित करने की प्रक्रिया भी शामिल है। बेहतर प्रदर्शन करने वालों को जिला और राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।
महिला कल्याण निदेशालय के एक अधिकारी ने बताया, “यह अभियान सिर्फ रोकथाम पर केंद्रित नहीं, बल्कि जागरूकता और पुनर्वास पर भी फोकस करेगा। POCSO एक्ट, किशोर न्याय अधिनियम 2015 और बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 का सख्ती से पालन होगा। हर मामले में तत्काल FIR दर्ज होगी, और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”

हाई-रिस्क जिलों पर फोकस: संयुक्त टीमें और पोर्टल पर रिपोर्टिंग
प्रदेश के 10 हाई-रिस्क जिलों—मेरठ, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, बरेली, सहारनपुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी और श्रावस्ती—पर विशेष नजर रखी जाएगी। इन जिलों में बाल विवाह की प्रवृत्ति ज्यादा है, इसलिए संयुक्त टीमें गठित की गई हैं। स्कूलों में एब्सेंटिज्म पर नजर, आंगनबाड़ी में हेल्थ चेकअप, और पुलिस की पेट्रोलिंग से निगरानी होगी। पोर्टल पर दैनिक रिपोर्टिंग अनिवार्य है, ताकि प्रगति ट्रैक हो सके।
एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “यह अभियान सराहनीय है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में जागरूकता पहुँचाना चुनौती है। पंचायतों को और मजबूत करना होगा।” सरकार ने स्पष्ट किया है कि लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होगी—जिला अधिकारी और CMPO व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह।

कानूनी सख्ती और सामाजिक जागरूकता: अभियान का मूल मंत्र
अभियान बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006, किशोर न्याय अधिनियम 2015 और POCSO अधिनियम 2012 पर आधारित है। हर सूचना पर तुरंत कार्रवाई होगी—FIR से लेकर काउंसलिंग तक। जागरूकता के लिए रेडियो, सोशल मीडिया और लोकल इवेंट्स का सहारा लिया जाएगा। सफल मामलों को केस स्टडी बनाकर प्रचारित किया जाएगा, ताकि अन्य परिवार प्रेरित हों।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभियान की शुरुआत में कहा था, “बाल विवाह हमारे समाज की कमजोरी है, इसे जड़ से उखाड़ना होगा।” यह महाअभियान उत्तर प्रदेश को बाल विवाह मुक्त बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है। क्या यह लक्ष्य हासिल होगा? 100 दिनों में नतीजे दिखेंगे। अगर आप बाल विवाह की सूचना जानते हैं, तो हेल्पलाइन 1098 पर कॉल करें।







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