चंडीगढ़। हरियाणा के प्रशासनिक इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी मामले में राज्य के चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी सहित कुल 14 वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। यह मामला आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की रहस्यमय मौत से जुड़ा हुआ है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिला कर रख दिया है।

आरोपियों के नाम कालम में दर्ज कराए जाएं
हालांकि, इस एफआईआर को लेकर अब नए विवाद खड़े हो गए हैं। मृतक अधिकारी वाई पूरनकुमार की पत्नी आईएएस अफसर अमनीत पी. कुमार ने इस पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने चंडीगढ़ पुलिस को लिखित एप्लिकेशन देकर कहा है कि FIR में आरोपी अफसरों के नाम स्पष्ट कॉलम में दर्ज नहीं किए गए हैं, जिससे मामले की गंभीरता और पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। अमनीत ने मांग की है कि FIR को फिक्स फॉर्मेट में दोबारा लिखा जाए, ताकि सभी आरोपी अधिकारियों के नाम अलग-अलग कॉलम में स्पष्ट रूप से दिखाई दें।

एसएसपी और आईएएस की बीच हाट-टाक
सूत्रों के मुताबिक, इस मुद्दे को लेकर अमनीत पी. कुमार और चंडीगढ़ की SSP कंवरदीप कौर के बीच हॉट टॉक भी हुई है। बताया जा रहा है कि अमनीत अब SSP से मुलाकात के लिए जा रही हैं, ताकि FIR की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की जा सके।

चौथे दिन भी नहीं हुआ पोस्टमार्टम
इधर, परिवार के राजी न होने के कारण चौथे दिन भी IPS पूरन का पोस्टमॉर्टम नहीं हो पाया है। परिवार न्यायिक जांच की मांग पर अड़ा है। मामले ने अब न केवल हरियाणा बल्कि केंद्र स्तर पर भी प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। सरकार पर भी पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ता जा रहा है।








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