नोएडा/लखनऊ, नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दलदल भरे पानी में डूबकर हुई मौत का मामला अब सरकारी विभागों की लापरवाही की पोल खोल रहा है। उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपात सेवा विभाग के दो आधिकारिक पत्रों ने साफ कर दिया है कि विभाग पहले से ही ऐसे हादसों के लिए सतर्क था और अधिकारियों-कर्मचारियों को स्विमिंग ट्रेनिंग देने के सख्त निर्देश जारी किए गए थे। फिर भी घटनास्थल पर मौजूद अग्निशमन और SDRF टीम ने पानी में उतरने की हिम्मत नहीं दिखाई – नतीजा, युवराज की जान चली गई।

युवराज मेहता की मौत: क्या हुआ था?
19 जनवरी को नोएडा सेक्टर-62 के पास एक गड्ढे में भरे दलदल वाले पानी में युवराज मेहता डूब गए। मौके पर पहुंची पुलिस, SDRF और अग्निशमन टीम ने दूर से ही नजारा देखा, लेकिन किसी ने पानी में उतरकर रेस्क्यू करने की कोशिश नहीं की। युवराज की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे शहर में आक्रोश पैदा कर दिया। लोग सवाल उठा रहे हैं – जब टीम मौके पर मौजूद थी, तो रेस्क्यू क्यों नहीं हुआ?
ADG के दो पत्रों ने खोली लापरवाही की पोल
मामले की जांच में दो बेहद अहम दस्तावेज सामने आए हैं। ये दोनों पत्र उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपात सेवा मुख्यालय, लखनऊ से जारी किए गए थे।
- पहला पत्र: 10 जुलाई 2023
- दूसरा पत्र: 19 जुलाई 2023
दोनों पत्र अपर पुलिस महानिदेशक (अग्निशमन एवं आपात सेवा) पद्मजा चौहान के हस्ताक्षर से जारी हुए। इनमें साफ लिखा है:
“प्रदेश के कई शहरों में बरसात के महीनों में मूसलाधार बारिश होती है और कई क्षेत्रों में काफी पानी भर जाता है, जिससे जनमानस को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे मुश्किल हालातों से निपटने के लिए जल पुलिस के अलावा अग्निशमन एवं आपात सेवा में नियुक्त अधिकारियों तथा कर्मचारियों को भी तैराकी का ज्ञान होना अतिआवश्यक है, जिससे रेस्क्यू वगैरह में सुगमता से वे अपने कर्तव्यों को निभा सकें।”
पत्र में सभी उपनिदेशकों, प्रभारी उपनिदेशकों और अग्निशमन अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि वे अपने कर्मचारियों को स्विमिंग ट्रेनिंग दिलवाएं। लेकिन नोएडा की इस घटना से साफ है कि जमीनी स्तर पर इन आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया गया।

युवराज मेहता कौन थे?
युवराज मेहता (22 वर्ष) एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। वे सेक्टर-62 में रहते थे और एक बड़ी आईटी कंपनी में काम करते थे। परिवार वाले बताते हैं कि वे बहुत मेहनती और जिम्मेदार थे। घटना के दिन वे अपने दोस्तों के साथ बाहर गए थे। अचानक पैर फिसलने से वे गड्ढे में भरे पानी में गिर गए। पानी इतना गहरा और दलदली था कि बाहर निकलना मुश्किल हो गया।
परिवार और लोगों का गुस्सा
युवराज के पिता ने कहा, “मेरा बेटा डूब रहा था और सामने पुलिस, SDRF और फायर ब्रिगेड की पूरी टीम खड़ी थी। फिर भी किसी ने हाथ नहीं बढ़ाया। अगर कोई तैराक होता तो शायद मेरे बेटे को बचाया जा सकता था।”
सोशल मीडिया पर #JusticeForYuvraj और #FireDeptLaparvahi ट्रेंड कर रहा है। लोग लिख रहे हैं – “अग्निशमन का मतलब सिर्फ आग बुझाना नहीं, जान बचाना भी है।” “ADG के आदेश कागजों में रह गए, जमीनी स्तर पर लापरवाही क्यों?”

पुलिस और विभाग का जवाब
सहारनपुर SSP आशीष तिवारी ने कहा कि जांच चल रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। लेकिन अग्निशमन विभाग ने अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
सवाल जो उठ रहे हैं
- ADG के दो स्पष्ट आदेशों के बावजूद स्विमिंग ट्रेनिंग क्यों नहीं दी गई?
- नोएडा जैसे बड़े शहर में रेस्क्यू टीमों में तैराक क्यों नहीं हैं?
- क्या ऐसे हादसों के बाद भी विभाग जागेगा या फिर कागजी कार्रवाई ही जारी रहेगी?
युवराज मेहता की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का जीता-जागता सबूत है। परिवार अब इंसाफ की उम्मीद कर रहा है। क्या इस बार विभाग सच में जिम्मेदारी लेगा या फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?







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