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मिर्जापुर के बरही गांव में बेचूबीर व बरहिया माता मेला शुरू: भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति व संतान प्राप्ति की आस्था में उमड़ा लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब, बारिश भी न रोक सकी

मिर्जापुर के बरही गांव में बेचूबीर व बरहिया माता मेला शुरू: भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति व संतान प्राप्ति की आस्था में उमड़ा लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब, बारिश भी न रोक सकी

मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश), 1 नवंबर 2025।
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के अहरौरा थाना क्षेत्रांतर्गत बरही गांव में सैकड़ों वर्ष पुरानी परंपरा के अनुरूप तीन दिवसीय बेचूबीर व बरहिया माता मेला शनिवार से शुरू हो गया। पहाड़ियों से घिरे इस प्राचीन धाम में भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति, संतान प्राप्ति और पारिवारिक सुख-शांति की कामना लेकर देशभर से लाखों श्रद्धालु उमड़ पड़े। आस्था का यह अप्रतिम संगम विज्ञान की चुनौतियों को पार करता हुआ नजर आ रहा है,

जहां बारिश की बौछारें भी लोगों के उत्साह को कमतर नहीं कर सकीं। मेला स्थल पर कचरा और कीचड़ भरा होने के बावजूद श्रद्धालु नंगे पैर चलते हुए दर्शन को पहुंच रहे हैं। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं, जिसमें सीसीटीवी निगरानी, भारी पुलिस बल और महिला कर्मियों की तैनाती शामिल है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: बेचू यादव की वीरता से जुड़ी कथा

बरही गांव, जो मिर्जापुर मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित है, सदियों से आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां का मेला सैकड़ों वर्ष पुराना है और इसकी नींव एक वीर योद्धा बेचू यादव की कथा पर टिकी हुई है। स्थानीय किवदंतियों के अनुसार, बेचू यादव एक कुशल पहलवान थे। उस समय बरही गांव चारों ओर घने जंगलों से घिरा हुआ था। बेचू रोजाना जंगल में अपनी भैंसें चराने जाया करते थे।

एक दिन जंगल में उनकी भिड़ंत एक भयंकर शेर से हो गई। दोनों के बीच जबरदस्त संघर्ष हुआ, जिसमें बेचू गंभीर रूप से घायल हो गए और शेर भी बुरी तरह जख्मी हो गया। घायल अवस्था में बेचू गांव लौटे, जहां उन्हें आकाशवाणी सुनाई दी। आकाशवाणी में कहा गया, “बेचू, जो कुछ मांगना हो मांग लो।” जानकारों का मानना है कि यह शेर कोई साधारण जानवर नहीं, बल्कि भगवान भोलेनाथ शिव का रूप था।

बेचू ने स्वार्थी इच्छा के बजाय निष्काम भक्ति का परिचय दिया। उन्होंने कहा, “हे प्रभु, हमें कुछ नहीं चाहिए। हमारे धाम पर आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी हो जाए।” इसी बीच, बेचू की पत्नी बरहिया को उनकी चिंता हुई। वह जंगल में निकलीं और खून के निशानों का पीछा करते हुए गांव पहुंचीं। तब तक बेचू की मृत्यु हो चुकी थी। बरहिया को एक पुत्री का जन्म हुआ था, लेकिन बेचू की मृत्यु से व्यथित होकर वह नजदीकी भक्सी नदी में स्नान करने गईं।

स्नान के बाद लौटकर उन्होंने गांव में ही समाधि ले ली। बेचू की समाधि को बेचूबीर बाबा के रूप में पूजा जाता है, जबकि बरहिया की समाधि बरहिया माता के नाम से विख्यात है। तभी से यह स्थान बेचूबीर और बरहिया माता धाम के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि दोनों की पूजा-अर्चना से भूत-प्रेत बाधा समाप्त हो जाती है, संतानहीन दंपतियों को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है और पारिवारिक कलह दूर हो जाता है।

आस्था का अप्रतिम संगम: बारिश में भी उमड़ा सैलाब

मेला तीन दिनों तक चलता है, जिसमें पहाड़ियों और खेतों में श्रद्धालु टेंट लगाकर ठहरते हैं। इस बार भी लाखों की संख्या में लोग पहुंचे हैं, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। विज्ञान के इस युग में भी आस्था का यह शैलाब लोगों को आकर्षित कर रहा है। श्रद्धालु नंगे पैर पहाड़ी रास्तों पर चढ़ते हुए दर्शन कर रहे हैं। प्रसाद के रूप में चावल का एक दाना ही पर्याप्त माना जाता है, जिसे श्रद्धा से ग्रहण किया जाता है।

मंदिर परिसर में हंसी-खुशी का माहौल है – कहीं बच्चे खेल रहे हैं, तो कहीं महिलाएं गीत गा रही हैं। लेकिन बारिश ने मेले को चुनौती दी है। लगातार हो रही बौछारों से सड़कें कीचड़युक्त हो गई हैं, टेंट भीग रहे हैं और जगह-जगह फिसलन का खतरा है। फिर भी, आस्था भारी पड़ रही है। एक श्रद्धालु ने कहा, “बारिश हो या तूफान, बाबा की कृपा तो मिलनी ही है।” मेला स्थल पर चावल का वितरण हो रहा है, जो प्रसाद के रूप में श्रद्धालु घर ले जाते हैं।

सुरक्षा व्यवस्था कड़ी: सीसीटीवी, पुलिस और महिला दस्ते तैनात

मेले की भव्यता के साथ सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। प्रशासन ने सीसीटीवी कैमरों की कड़ी निगरानी स्थापित की है, जो पूरे परिसर पर नजर रख रहे हैं। भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है, जिसमें सादे वेश में जासूस और महिला पुलिस कर्मी भी शामिल हैं। उपजिलाधिकारी चुनार राजेश कुमार वर्मा और अहरौरा थाना प्रभारी फोर्स के साथ नियमित भ्रमण कर रहे हैं।

चिकित्सा टीम, फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। एक अधिकारी ने बताया, “पिछले वर्षों के अनुभव से हमने हर संभावित जोखिम को ध्यान में रखा है। भीड़ प्रबंधन के लिए बैरिकेडिंग और मार्ग निर्देशक बोर्ड लगाए गए हैं।” यह इंतजाम मेले को शांतिपूर्ण बनाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।

मिर्जापुर के बरही गांव में बेचूबीर व बरहिया माता मेला शुरू: भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति व संतान प्राप्ति की आस्था में उमड़ा लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब, बारिश भी न रोक सकी

पुजारियों व श्रद्धालुओं के बाइट्स: आस्था की जीवंत गवाही

मेला के पुजारी ब्रजभूषण यादव (बेचूबीर मंदिर) ने बताया, “यह मेला सैकड़ों वर्षों से चला आ रहा है। बाबा की कृपा से हर मनोकामना पूरी होती है। भूत-प्रेत बाधा से पीड़ित लोग यहां आकर नई जिंदगी पाते हैं।” वहीं, बरहिया माता मंदिर के पुजारी दलसिंगार यादव ने कहा, “माता की पूजा से संतान सुख मिलता है। इस बार भी हजारों महिलाएं मन्नत मांगने पहुंची हैं। बारिश के बावजूद आस्था कम नहीं हुई।”

श्रद्धालुओं की बातें भी भावुक कर देती हैं। एक महिला श्रद्धालु ने बाइट में कहा, “मेरी कोई संतान नहीं थी। पिछले वर्ष यहां मन्नत मांगी, आज बेटा घर में है। इसलिए हर साल आती हूं।” एक अन्य श्रद्धालु ने जोड़ा, “भूत बाधा से परेशान थे, लेकिन बाबा ने चमत्कार कर दिया। विज्ञान कहे जो कहे, आस्था पर भरोसा ही असली इलाज है।” ये बाइट्स मेले की सांस्कृतिक व धार्मिक गहराई को उजागर करते हैं।

पीटीसी: आनंद तिवारी से विशेष

(पीटीसी में दिखाया जा रहा है: कीचड़ भरी सड़कों पर चलते श्रद्धालु, भीगे टेंट, सीसीटीवी कैमरे और पुलिस गश्त।) रिपोर्टर आनंद तिवारी ने कहा, “आप देख सकते हैं कि कैसे आस्था की लहर मेले को रंगीन बना रही है। बारिश ने भले ही चुनौतियां बढ़ाईं, लेकिन बेचूबीर धाम की चमत्कारी शक्ति पर किसी का भरोसा नहीं डगमगा रहा। यह मेला न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक उत्सव भी है, जहां परंपरा और विश्वास का अनोखा मेल दिखता है।”

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निष्कर्ष: परंपरा का संरक्षण, आस्था का उत्सव

यह मेला मिर्जापुर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, जहां आधुनिकता के दौर में भी प्राचीन मान्यताएं जीवित हैं। लाखों श्रद्धालुओं की भागीदारी से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलता है। प्रशासन की ओर से अपील की गई है कि श्रद्धालु मास्क पहनें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और प्लास्टिक का उपयोग न करें। तीन दिनों तक चलने वाले इस मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोक नृत्य और धार्मिक प्रवचन आयोजित होंगे। बेचूबीर व बरहिया माता धाम एक बार फिर साबित कर रहा है कि आस्था की कोई सीमा नहीं होती।

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