सहारनपुर/नई दिल्ली,
कल पूरे देश में बसंत पंचमी (माघ शुक्ल पंचमी) बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी। यह पर्व देवी सरस्वती की जन्मतिथि के रूप में जाना जाता है और ज्ञान, विद्या, कला, संगीत और वाणी की देवी की पूजा का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। साथ ही यह ऋतु परिवर्तन का भी प्रतीक है – सर्दी का अंत और बसंत का स्वागत। इस बार बसंत पंचमी 2 फरवरी 2026 (मंगलवार) को मनाई जाएगी।

बसंत पंचमी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, आज के दिन ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि रचना के बाद ज्ञान और वाणी की आवश्यकता महसूस की और अपनी शक्ति से देवी सरस्वती का अवतार किया। इसीलिए इसे सरस्वती जयंती भी कहा जाता है।
यह दिन नई शुरुआत का प्रतीक है। स्कूल-कॉलेजों में छोटे बच्चे पहली बार किताब छूकर अक्षरारंभ करते हैं। माता-पिता अपने बच्चों को आज ही पढ़ाई शुरू करवाते हैं। साथ ही यह बसंत ऋतु का पहला दिन माना जाता है – फूल खिलते हैं, सरसों के खेत पीले हो जाते हैं और प्रकृति में नई ऊर्जा आ जाती है।

कल के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
बसंत पंचमी 2026 शुभ मुहूर्त:
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:45 से दोपहर 12:35 तक
- सरस्वती पूजा का मुख्य समय: सुबह 7:00 से दोपहर 12:00 तक
- अमृत सिद्धि योग: सुबह 7:00 से शाम 5:00 तक
पूजा विधि (घर पर आसानी से कर सकते हैं):
- सुबह स्नान कर पीले या सफेद वस्त्र पहनें।
- घर में सरस्वती माता की मूर्ति या चित्र को सफेद/पीले फूलों (गेंदा, चमेली, सरसों) से सजाएं।
- माता के सामने वीणा, किताब, कलम, दवात और सफेद मिठाई रखें।
- मंत्र पढ़ें:
“या कुन्देन्दु तुषारहार धवला, या शुभ्र वस्त्रावृता…” - केसरिया खीर, हलवा, बेसन के लड्डू या पीले चावल का भोग लगाएं।
- बच्चों को नई किताब छूवाएं और सरस्वती माता से विद्या की प्रार्थना करें।
उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में खास परंपराएं
- हरिद्वार-ऋषिकेश: गंगा किनारे सरस्वती मंदिरों में भव्य पूजा और हवन।
- शांतिकुंज: गायत्री परिवार में बड़े स्तर पर सरस्वती पूजा और सामूहिक हवन।
- सहारनपुर-मेरठ: घरों में पीले फूलों से सजावट, पतंगबाजी और बच्चों के साथ अक्षरारंभ।
- स्कूल-कॉलेज: कल सभी स्कूलों में सरस्वती पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।

वैज्ञानिक और पर्यावरणीय नजरिया
बसंत पंचमी ठंड के अंत और बसंत के आगमन का प्रतीक है। इस समय दिन लंबे होने लगते हैं, फूल खिलते हैं और फसलें लहलहाती हैं। पीला रंग सरसों के खेतों का प्रतीक है। इस दिन पीले फूल और वस्त्र पहनने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और पर्यावरण संतुलन का संदेश भी जाता है।
कल का संदेश
बसंत पंचमी हमें सिखाती है कि ज्ञान ही सबसे बड़ा धन है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि नई शुरुआत हमेशा संभव है – चाहे पढ़ाई हो, करियर हो या जिंदगी का कोई नया अध्याय।
कल आप भी अपने घर में सरस्वती माता की पूजा करें, पीले रंग से सजाएं और बच्चों को प्रेरित करें।
पूरी दुनिया और खासकर हमारे पाठकों को jn news की और से बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं!
🌸📚🪶 शुभ बसंत पंचमी!







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