जालौन, उत्तर प्रदेश, 27 अक्टूबर 2025: जालौन के कुठौंद कस्बे में प्रशासन ने न्यायालय के आदेश पर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। अस्पताल परिसर के बाहर फुटपाथ पर 40 साल से काबिज 180 दुकानों को जेसीबी की मदद से हटा दिया गया। यह कार्रवाई तहसीलदार जालौन की देखरेख में की गई, जिसमें भारी पुलिस बल और पीएसी की मौजूदगी सुनिश्चित की गई थी।
न्यायालय के आदेश पर कार्रवाई
तहसीलदार जालौन ने बताया कि अस्पताल वाली गली में कई वर्षों से अवैध कब्जा था। दुकानदारों और मकान मालिकों को अतिक्रमण हटाने के लिए कई बार नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन अनुपालन न होने के कारण न्यायालय के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। नोटिस की समय सीमा समाप्त होने के बाद प्रशासन ने जेसीबी चलाकर इन दुकानों को ध्वस्त कर दिया।

कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन
कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए। थाना प्रभारी निरीक्षक अरुण कुमार राय ने जालौन-औरैया हाईवे की एक साइड को बंद कर बैरिकेडिंग की व्यवस्था की, ताकि यातायात सुचारू रहे और जाम की स्थिति उत्पन्न न हो। सैकड़ों की संख्या में पुलिस और पीएसी के जवान मौके पर तैनात रहे।
दुकानदारों में रोष, आजीविका पर संकट
इस कार्रवाई से प्रभावित दुकानदारों में भारी नाराजगी देखी गई। दुकानदारों का कहना है कि उनकी आजीविका पर गहरा संकट आ गया है। पप्पू गुप्ता, हिमांचल प्रजापति, अन्नू मिश्रा, भानु गुप्ता, रामाधार दुबे, देवेंद्र मिश्रा, सोनू दुबे, नीटू दुबे, काली चरन, रामआसरे शर्मा, तान्या गुप्ता, शेखर अवस्थी, दिनेश शुक्ला, अंशु दीक्षित, अतीश त्रिपाठी, वेभु तिवारी और अंजनी त्रिवेदी सहित लगभग 100 दुकानदारों ने बताया कि जिला पंचायत द्वारा उनसे किराए की रसीदें काटी जाती थीं, जिसके कारण वे इस जगह को अपनी समझते थे।

दुकानदारों की मांग: वैकल्पिक व्यवस्था
प्रभावित दुकानदारों ने प्रशासन से उनके लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि उनके परिवारों का भरण-पोषण हो सके। दुकानदारों ने आरोप लगाया कि नोटिस के बावजूद कोई जनप्रतिनिधि उनकी समस्या सुनने नहीं पहुंचा।
प्रशासन का रुख
तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई न्यायालय के आदेशानुसार की गई है और अवैध अतिक्रमण को हटाना आवश्यक था, क्योंकि इससे अस्पताल परिसर और आसपास के क्षेत्र में आम लोगों को असुविधा हो रही थी। प्रशासन ने दुकानदारों की मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है, लेकिन अभी तक कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था की घोषणा नहीं की गई है।
यह कार्रवाई जहां एक ओर सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है, वहीं दुकानदारों की आजीविका पर पड़े असर ने प्रशासन के समक्ष एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। दुकानदारों की मांगों का समाधान कैसे होगा, यह देखना बाकी है।







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