फरीदपुर। स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा वर्कर्स और आशा संगिनियां अब अपनी उपेक्षा के खिलाफ खुलकर मैदान में उतर आई हैं। शनिवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) फरीदपुर में उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के बैनर तले आयोजित धरना-प्रदर्शन में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में अपने हक और सम्मान की मांग को बुलंद किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित 11 सूत्रीय मांगपत्र चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुराग गौतम को सौंपा, जिसमें लंबित प्रोत्साहन राशि से लेकर नियमित कर्मचारी दर्जे तक की मांगें शामिल हैं।
यूनियन की अध्यक्ष
यूनियन की अध्यक्ष मधु, सचिव रिचा शर्मा और आशा संगिनियां रूपवती, सुषमा देवी, कुसुम देवी, सीमा देवी, मनीषा देवी तथा ममता ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि वे गांव-गांव घर-घर जाकर मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, परिवार नियोजन और सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का जिम्मेदारीपूर्ण कार्य करती हैं, लेकिन बदले में उन्हें न तो समय पर भुगतान मिलता है और न ही कोई सुरक्षा या सम्मान। “महीनों से प्रोत्साहन राशि अटकी पड़ी है। हमें नियमित कर्मचारी का दर्जा, पेंशन, बीमा कवर और चिकित्सा सुविधाएं चाहिए। कोरोना काल में हमने जान जोखिम में डालकर प्रशासन का साथ दिया, लेकिन आज हम उपेक्षा की शिकार हैं,” उन्होंने आक्रोश जताया।

प्रमुख मांगें (11 सूत्रीय मांगपत्र के अंश):
- लंबित प्रोत्साहन राशि का तत्काल भुगतान – महीनों से बकाया राशि का निपटारा।
- नियमित कर्मचारी दर्जा – संविदा के बजाय स्थायी नौकरी।
- पेंशन सुविधा – सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा।
- बीमा कवर – कार्य के दौरान दुर्घटना या स्वास्थ्य जोखिम के लिए।
- चिकित्सा सुविधाएं – आशा कार्यकर्ताओं और उनके परिवार के लिए मुफ्त इलाज।
- कार्य सुरक्षा – ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य के दौरान सुरक्षा गारंटी।
- वेतन वृद्धि – कार्य भार के अनुरूप मानदेय में इजाफा।
- प्रशिक्षण और संसाधन – बेहतर कार्य के लिए नियमित ट्रेनिंग और उपकरण।
- कार्य घंटों का निर्धारण – अतिरिक्त कार्य के लिए ओवरटाइम भुगतान।
- यूनियन मान्यता – मजबूत यूनियन गठन और वार्ता का अधिकार।
- सम्मान और प्रोत्साहन – उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कार और सार्वजनिक मान्यता।
धरना स्थल पर पहुंचे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता की और मांगपत्र को जिला स्तर से लेकर उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। हालांकि, आशा संगिनियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि “अब केवल आश्वासन नहीं चलेगा, ठोस कार्रवाई चाहिए। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।”
यूनियन नेतृत्व ने जोर देकर कहा कि आशा संगिनियां वह ‘अदृश्य शक्ति’ हैं, जिन्होंने कोरोना महामारी, पल्स पोलियो अभियान और टीकाकरण ड्राइव जैसे हर संकट में प्रशासन की ढाल बनीं। फिर भी, जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था की यह धुरी आज खुद असुरक्षित और उपेक्षित है। यह प्रदर्शन न केवल फरीदपुर तक सीमित रहा, बल्कि पूरे प्रदेश में आशा कार्यकर्ताओं के बीच एक नई ऊर्जा का संचार कर गया है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मांगपत्र को जल्द ही लखनऊ भेजा जाएगा, लेकिन कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब समय की मांग है – सम्मान दो, या आंदोलन झेलो। जमीनी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार तभी संभव है, जब इन महिलाओं को उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल और सुरक्षा मिले।








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