राजस्थान-हरियाणा बॉर्डर पर अवैध खनन के वीडियो वायरल, लाखों यूजर्स ने #SaveAravali ट्रेंड किया—पर्यावरणविदों का अलर्ट, क्या ग्रीन वॉल बचेगी?
सोशल मीडिया पर इन दिनों अरावली पहाड़ियों का नाम जोर-शोर से गूंज रहा है। एक वायरल वीडियो में राजस्थान-हरियाणा बॉर्डर पर अवैध खनन मशीनों की दहाड़ और पहाड़ों के कटते चेहरे ने लाखों यूजर्स को झकझोर दिया। #SaveAravali हैशटैग ट्रेंड कर रहा है, और पर्यावरणविदों से लेकर आम नागरिक तक सरकार से सवाल कर रहे हैं—क्या भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला को बचाने का समय आ गया है? सुप्रीम कोर्ट के 2024 के आदेशों के बावजूद खनन माफिया का राज जारी है।
दिल्ली-एनसीआर की हवा साफ करने वाली यह ‘ग्रीन वॉल’ अब खतरे में है। क्या ये पहाड़ियाँ, जो जैव विविधता का खजाना हैं, हमेशा के लिए गायब हो जाएंगी? आइए, इस सोशल मीडिया बहस और अरावली के संकट की पूरी परतें खोलते हैं।

अरावली पहाड़ियाँ—भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला—राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली को जोड़ती हैं। यह 700 किलोमीटर लंबी श्रृंखला न सिर्फ जैव विविधता का खजाना है (500 से ज्यादा पक्षी प्रजातियाँ, बाघ जैसे दुर्लभ जानवर), बल्कि दिल्ली-एनसीआर की हवा को शुद्ध रखने वाली ‘ग्रीन लंग्स’ भी। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने खुलासा किया कि गुरुग्राम के अरावली सेक्टर-63 और राजस्थान के अलवर जिले में पोकलेन मशीनें रात-दिन पहाड़ काट रही हैं।
एक वीडियो में खनन माफिया ट्रैक्टरों से बालू लादकर भागते दिखे, जबकि स्थानीय लोग चीख रहे थे, “हमारी सांसें कट रही हैं!” X (ट्विटर) पर #SaveAravali 2 लाख से ज्यादा पोस्ट्स के साथ ट्रेंड कर रहा है, और इंस्टाग्राम रील्स पर 5 मिलियन व्यूज हो चुके हैं।
पर्यावरणविदों का कहना है कि अवैध खनन से अरावली का 40% हिस्सा तबाह हो चुका है
पर्यावरणविदों का कहना है कि अवैध खनन से अरावली का 40% हिस्सा तबाह हो चुका है। WWF इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 2015-2025 के बीच 20% कवरेज कम हुआ, जिससे दिल्ली का AQI 20 पॉइंट्स बढ़ गया। सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में हरियाणा सरकार को 5 साल में अरावली को बहाल करने का आदेश दिया, लेकिन अमल धीमा है।
एक पर्यावरण एक्टिविस्ट ने कहा, “ये पहाड़ दिल्ली को सांस देते हैं। अगर ये गए, तो स्मॉग हमेशा का मेहमान बनेगा।” ग्रामीणों का गुस्सा भड़का है—अलवर के एक किसान ने बताया, “खनन से हमारे खेत सूख गए, पानी का स्रोत खत्म हो रहा है।” सोशल मीडिया पर बॉलीवुड स्टार्स जैसे आयुष्मान खुराना ने भी सपोर्ट किया, कहा, “अरावली बचाओ, वरना दिल्ली डूब जाएगी।”

अरावली का इतिहास भी कम रोचक नहीं। यह श्रृंखला 25 करोड़ साल पुरानी है, और महाभारत में ‘अरजुन’ नाम से जानी जाती है। यह दिल्ली को थार मरुस्थल से बचाती है और वन्यजीवों का घर है। लेकिन 1990 से खनन बढ़ा, और 2020 तक 30% क्षेत्र कट गया। हरियाणा में 2024 में 200+ अवैध खनन केस दर्ज हुए, लेकिन सिर्फ 20% पर कार्रवाई हुई। राजस्थान में अलवर-अजमेर बेल्ट सबसे प्रभावित है। विशेषज्ञों का कहना है कि खनन से न सिर्फ जैव विविधता नष्ट हो रही है, बल्कि जलवायु परिवर्तन भी तेज हो रहा है। CPCB की रिपोर्ट के अनुसार, अरावली के बिना दिल्ली का तापमान 2°C बढ़ सकता है।
सरकार की प्रतिक्रिया?
सरकार की प्रतिक्रिया? हरियाणा CM मनोहर लाल ने कहा, “खनन पर सख्ती करेंगे, लेकिन लीगल माइनिंग को बढ़ावा देंगे।” राजस्थान में BJP सरकार ने 50 करोड़ का फंड अनाउंस किया अरावली रेस्टोरेशन के लिए। लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स सवाल कर रहे हैं—क्या ये सिर्फ लिप सर्विस है? #SaveAravali कैंपेन में 50 हजार से ज्यादा साइनेटर्स हो चुके हैं, और NGOs ने PIL दायर की है। एक पर्यावरणविद ने कहा, “SC का आदेश अमल में लाने के लिए 10,000 करोड़ चाहिए, लेकिन बजट सिर्फ 500 करोड़ है।”

अरावली का संकट सिर्फ पर्यावरण का नहीं, बल्कि हमारी साँसों का है। सोशल मीडिया ने आवाज़ दी, अब सरकार को सुनना होगा। क्या ये पहाड़ बच पाएंगे? अगर आप भी इस मुद्दे से जुड़ना चाहते हैं, तो #SaveAravali जॉइन करें।








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