प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस से लेकर गांव वालों तक को हैरान कर दिया है। नवाबगंज थाना क्षेत्र के बरईपुर-रामनगर गांव में पुलिस ने एक मकान के अंदर जमीन के नीचे छिपाकर रखे गए तीन नीले ड्रम बरामद किए हैं। इन ड्रमों में 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियां भरी हुई थीं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बरामद नकदी की कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पूरी रकम को कब्जे में लेकर सील कर दिया है और एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
पुलिस के मुताबिक, पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर चोरों और नकबजनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत संदिग्ध व्यक्तियों के सत्यापन के लिए ‘यक्ष’ ऐप की मदद ली जा रही है। गंगानगर के डीसीपी सोनम कुमार ने बताया कि पुलिस को लगातार खुफिया सूचनाएं मिल रही थीं और उनके आधार पर संदिग्ध ठिकानों पर कार्रवाई की जा रही थी।
इसी दौरान 29 अक्टूबर की सुबह करीब 10 बजे पुलिस को सूचना मिली कि नवाबगंज क्षेत्र के बरईपुर-रामनगर गांव में राजेश यादव और राकेश यादव के मकान में भारी मात्रा में नकदी जमीन के नीचे छिपाकर रखी गई है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और मकान की तलाशी शुरू की।

खुदाई में निकले तीन नीले ड्रम, नोटों की गड्डियां देखकर पुलिस भी हैरान
पुलिस ने तलाशी की पूरी कार्रवाई को पारदर्शी बनाने के लिए वीडियोग्राफी कराई। इसके बाद संदिग्ध स्थान पर खुदाई की गई तो जमीन के नीचे दबे तीन ड्रम बरामद हुए। जब इन ड्रमों को बाहर निकाला गया और जांच की गई तो उनमें 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियां भरी मिलीं। जमीन के नीचे इस तरह भारी मात्रा में नकदी छिपाकर रखे जाने का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने तत्काल पूरे परिसर को सुरक्षा घेरे में ले लिया।
पुलिस ने बरामद ड्रमों और नकदी को मौके पर ही सील कर दिया। इसके बाद नियमानुसार पूरी रकम को पुलिस मालखाने के एविडेंस लॉकर में सुरक्षित जमा कराया गया। साथ ही संबंधित विभागों को भी बरामदगी की जानकारी भेज दी गई है।
पुणे से लौटने के बाद अचानक बदली भाइयों की आर्थिक स्थिति
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा परिवार की अचानक बदली आर्थिक स्थिति को लेकर हो रही है। जानकारी के मुताबिक, मकान में रहने वाले राजेश यादव और राकेश यादव दोनों भाई पहले पुणे में काम करते थे। बताया जा रहा है कि वर्ष 2020 में दोनों भाई गांव लौट आए थे। गांव के कुछ लोगों के अनुसार, वापस आने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में अचानक बदलाव दिखाई देने लगा। दोनों भाइयों ने जमीनें खरीदीं और नए ट्रैक्टर भी लिए।
गांव में उनकी बढ़ती संपत्ति को लेकर पहले से ही चर्चाएं थीं। पुलिस को मिली जानकारी के अनुसार, परिवार के पास बड़ी मात्रा में नकदी होने की बात सामने आई थी। यह भी बताया गया कि रोजमर्रा के खर्चों के लिए जमीन में छिपाकर रखी गई रकम में से थोड़े-थोड़े पैसे निकाले जाते थे।
गांव के विवाद के बाद पुलिस तक पहुंची नकदी की सूचना
बताया जा रहा है कि इस मामले का सुराग गांव में एक दिन पहले हुए स्थानीय विवाद के बाद पुलिस को मिला। विवाद के दौरान परिवार के पास भारी मात्रा में नकदी होने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने सूचना को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। इसी इनपुट के आधार पर पुलिस ने मकान में छापेमारी की और जमीन के नीचे दबे तीनों ड्रम बरामद कर लिए।

एक व्यक्ति हिरासत में, आयकर विभाग को भी दी गई जानकारी
डीसीपी सोनम कुमार के मुताबिक, इस मामले में एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान वह नकदी के संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहा है। फिलहाल मकान को सील कर दिया गया है और उसकी सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आयकर विभाग को भी सूचना दी गई है। पुलिस अब बरामद नकदी के वास्तविक स्रोत, दोनों भाइयों की आय और पुणे में उनके रोजगार से जुड़े दावों की जांच कर रही है। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इतनी बड़ी रकम कहां से आई और इसे जमीन के नीचे छिपाकर रखने की वजह क्या थी।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। बरामद रकम की सटीक गणना और उसके स्रोत को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन के नीचे छिपाकर रखी गई करोड़ों की इस नकदी के पीछे आखिर क्या राज है।






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