करवा चौथ 2026: करवा चौथ का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन में खुशहाली की कामना के साथ व्रत रखती हैं। इस अवसर पर महिलाएं दिनभर व्रत रखकर शाम को विधि-विधान से करवा चौथ की पूजा करती हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं। इस पर्व को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिलता है।

पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है व्रत
करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। परंपरा के अनुसार, विवाहित महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करती हैं और इसके बाद व्रत शुरू करती हैं। कई महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। दिनभर पूजा की तैयारियां करने के बाद शाम को महिलाएं एकत्र होकर करवा चौथ की कथा सुनती हैं और पूजा-अर्चना करती हैं।
मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और विश्वास के साथ रखने से पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। समय के साथ यह पर्व पति-पत्नी के आपसी प्रेम, विश्वास और रिश्ते की मजबूती का प्रतीक भी बन गया है।
शाम को पूजा और करवा चौथ की कथा का विशेष महत्व
करवा चौथ के दिन महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजती-संवरती हैं। हाथों में मेहंदी, पूजा की थाली, करवा और अन्य पूजन सामग्री के साथ महिलाएं शाम को विधि-विधान से पूजा करती हैं। पूजा के दौरान करवा चौथ की कथा सुनने और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करने की परंपरा है।
कई स्थानों पर महिलाएं समूह में पूजा करती हैं और एक-दूसरे को करवा चौथ की शुभकामनाएं देती हैं। बाजारों में भी इस पर्व को लेकर रौनक देखने को मिलती है। साड़ी, आभूषण, मेहंदी, चूड़ियों और पूजा सामग्री की दुकानों पर महिलाओं की आवाजाही बढ़ जाती है।

चांद निकलने का रहता है बेसब्री से इंतजार
करवा चौथ के दिन महिलाओं को रात में चंद्रमा निकलने का इंतजार रहता है। चांद दिखाई देने के बाद परंपरा के अनुसार महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं और पूजा करती हैं। इसके बाद पति को छलनी से देखकर और पति के हाथों से जल ग्रहण करके व्रत खोलने की रस्म निभाई जाती है। हालांकि, पूजा और व्रत खोलने की परंपराएं परिवारों और क्षेत्रों के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।
प्रेम, विश्वास और परंपरा का पर्व है करवा चौथ
करवा चौथ केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा पर्व नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्तों और आपसी प्रेम को भी दर्शाता है। इस दिन परिवारों में उत्सव जैसा माहौल रहता है। महिलाएं अपने जीवनसाथी की खुशहाली की कामना करती हैं और परिवार के लोग मिलकर पर्व की खुशियां साझा करते हैं।
करवा चौथ के अवसर पर लोगों को अपनी पारंपरिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए। यदि किसी महिला को स्वास्थ्य संबंधी समस्या है या डॉक्टर ने उपवास न रखने की सलाह दी है, तो व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
नोट: करवा चौथ 2026 की सही तारीख, चतुर्थी तिथि, पूजा मुहूर्त और शहर के अनुसार चंद्रोदय का समय प्रकाशित करने से पहले स्थानीय पंचांग से पुष्टि कर लें।







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