नई दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक पर पुलिस की कार्रवाई, कनॉट प्लेस में तिरंगा लेकर जुटे प्रदर्शनकारी; मतदाता सूची में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने को लेकर विवाद, चुनाव आयोग और भाजपा ने आरोपों को नकारा
नई दिल्ली। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को तिरंगा मार्च से पहले पुलिस ने हिरासत में ले लिया। बाद में 17 अक्टूबर को सामने आई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें शांति भंग होने की आशंका के आधार पर गिरफ्तार किया गया और विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने की बात कही गई। यह कार्रवाई 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में आयोजित विरोध प्रदर्शन से पहले हुई, जिसमें प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। पुलिस की कार्रवाई के बावजूद दिल्ली के व्यस्त कारोबारी क्षेत्र में प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय ध्वज लेकर जुटे।

तिरंगा मार्च से पहले अभिजीत दीपके को पुलिस ने लिया हिरासत में
रिपोर्टों के अनुसार, अभिजीत दीपके ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ नाम से मार्च का आह्वान किया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को आगे बढ़ाना था। साथ ही, CJP के उन दो नेताओं के समर्थन में प्रदर्शन आयोजित किया गया था, जिन्हें इस सप्ताह प्रतिबंधों के उल्लंघन के मामले में हिरासत में लेकर पांच दिन के लिए जेल भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी।
CJP के सोशल मीडिया पर प्रसारित लाइव वीडियो में दीपके को एक आवास से बाहर निकलते हुए देखा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, सड़क पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोका और बातचीत के बाद पुलिस वाहन में बैठाकर ले गए। वीडियो में दीपके को यह सवाल उठाते हुए भी सुना गया कि जब उन्होंने कानून नहीं तोड़ा, तो उन्हें हिरासत में क्यों लिया जा रहा है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सचिन शर्मा ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया था कि दीपके को नोटिस देकर कानून का पालन करने और उल्लंघन के संभावित परिणामों के बारे में सूचित किया गया था। बाद की मीडिया रिपोर्टों में उनकी गिरफ्तारी की जानकारी दी गई।
कनॉट प्लेस में तिरंगा लेकर जुटे प्रदर्शनकारी
अभिजीत दीपके की हिरासत के बावजूद कनॉट प्लेस में प्रदर्शन पूरी तरह नहीं रुका। रिपोर्टों के मुताबिक, सैकड़ों लोग राष्ट्रीय ध्वज लेकर एकत्र हुए और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए। छात्र संगठनों और अन्य समर्थकों ने भी प्रदर्शन में भाग लिया।
छात्र कार्यकर्ता और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। पुलिस ने कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई थी। प्रशासनिक व्यवस्था के तहत सेंट्रल पार्क को भी 16 और 17 अक्टूबर को आम जनता के लिए बंद रखने की सूचना दी गई थी।
दिल्ली के अलावा मुंबई, बेंगलुरु और पटना में भी छोटे स्तर पर प्रदर्शन होने की खबरें आईं। इन कार्यक्रमों में छात्र संगठनों और आंदोलन के समर्थकों ने मतदाता सूची में संशोधन को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं।

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग क्यों कर रही है CJP?
कॉकरोच जनता पार्टी, विपक्षी समूह और छात्र संगठन इस महीने लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूचियों में किए गए व्यापक संशोधन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका है।
आलोचकों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए गए और इस प्रक्रिया से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को लाभ पहुंच सकता है। प्रदर्शनकारी चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और हटाए गए मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, पुनरीक्षण के दौरान 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आंकड़ा सामने आया है। हालांकि, इस संख्या के अलग-अलग वर्गों और कारणों से जुड़े विवरण को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी समूहों के दावे अलग हैं।
चुनाव आयोग ने किसी राजनीतिक दल का पक्ष लेने के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि गलत तरीके से हटाए गए मतदाता दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं। वहीं, विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया का असर कुछ समुदायों और मतदाताओं पर असमान रूप से पड़ सकता है। इन आरोपों को आयोग और भाजपा ने नकारा है।
भाजपा ने प्रदर्शन को बताया राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित
प्रदर्शन को लेकर भाजपा की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल युवाओं की ऊर्जा का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए कर रहे हैं। उनके मुताबिक, युवाओं को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के बजाय राजनीतिक संघर्ष में शामिल किया जा रहा है।
भाजपा का कहना है कि वैध चुनावी प्रक्रियाओं पर बिना उचित आधार के सवाल उठाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पर जवाबदेही और चुनाव आयोग के नेतृत्व में बदलाव की मांग कर रहे हैं।
इस प्रकार, यह विवाद केवल एक प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाता सूची, चुनावी पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही से जुड़े व्यापक सवालों को भी सामने ला रहा है।

CJP आंदोलन पहले भी रहा है चर्चा में
कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन युवाओं के बीच शुरू हुआ और बाद में विभिन्न सार्वजनिक मुद्दों को लेकर राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया। इस साल परीक्षा प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी संगठन के समर्थकों ने प्रदर्शन किए थे।
प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, आंदोलन के पहले चरणों में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का मुद्दा भी चर्चा में आया था। हालांकि, किसी मंत्री के इस्तीफे को केवल एक आंदोलन का प्रत्यक्ष परिणाम बताने के लिए संबंधित घटनाक्रम और आधिकारिक कारणों की पुष्टि आवश्यक है।
अब मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर CJP और अन्य संगठनों का विरोध तेज हुआ है। संगठन के समर्थक इसे चुनावी पारदर्शिता और मताधिकार से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं, जबकि भाजपा इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति करार दे रही है।
आगे क्या होगा?
अभिजीत दीपके की हिरासत और बाद में गिरफ्तारी की खबरों के बीच आंदोलन के आगे के रुख पर नजर बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का जवाब दिया जाए।
दूसरी ओर, पुलिस और प्रशासन के सामने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है। प्रदर्शन के अधिकार, कानून-व्यवस्था और आम लोगों की आवाजाही के बीच संतुलन बनाए रखना इस मामले का अहम पहलू है।
फिलहाल, मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर लगाए गए आरोपों पर चुनाव आयोग का पक्ष, पुलिस की कार्रवाई और आंदोलन के अगले कदम इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।






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