जालौन। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के उरई में मिशन शक्ति के तहत बालिकाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और प्रशासनिक सेवाओं के प्रति रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से एक प्रेरणादायी पहल की गई। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, मडोरा की कक्षा सात की छात्रा प्रतीक्षा को एक दिन के लिए प्रतीकात्मक जिलाधिकारी बनने का अवसर दिया गया। जिलाधिकारी समीर ने बुके भेंटकर छात्रा का स्वागत किया और अपनी कुर्सी पर बैठाकर उसका उत्साहवर्धन किया। इस दौरान प्रतीक्षा ने जनसुनवाई में फरियादियों की समस्याएं सुनीं और उनके निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस पहल से छात्रा को प्रशासनिक कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर मिला। प्रतीक्षा का सपना भविष्य में आईएएस या पीसीएस अधिकारी बनकर देश और समाज की सेवा करना है।

एक दिन की प्रतीकात्मक डीएम बनीं छात्रा प्रतीक्षा
मिशन शक्ति अभियान के तहत बालिकाओं को सशक्त बनाने और उन्हें अपने भविष्य के लिए बड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसी क्रम में जालौन के उरई में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, मडोरा की कक्षा सात की छात्रा प्रतीक्षा को एक दिन के लिए प्रतीकात्मक जिलाधिकारी बनाया गया।
इस अवसर पर जिलाधिकारी समीर ने छात्रा का स्वागत किया और उसे अपनी कुर्सी पर बैठाकर प्रोत्साहित किया। यह अनुभव प्रतीक्षा के लिए खास रहा, क्योंकि उसे प्रशासनिक व्यवस्था को करीब से देखने और जनसेवा से जुड़ी जिम्मेदारियों को समझने का अवसर मिला।
इस पहल का उद्देश्य बालिकाओं को यह विश्वास दिलाना है कि वे भी मेहनत, लगन और शिक्षा के बल पर जीवन में बड़े मुकाम हासिल कर सकती हैं। ऐसे कार्यक्रम छात्राओं को अपने सपनों के प्रति गंभीर होने और उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देते हैं।
जनसुनवाई में सुनीं फरियादियों की समस्याएं
एक दिन की प्रतीकात्मक जिलाधिकारी के रूप में प्रतीक्षा ने जनसुनवाई के दौरान फरियादियों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान उसने लोगों की शिकायतों को समझा और उनके निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
जनसुनवाई प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां आम नागरिक अपनी समस्याएं और शिकायतें अधिकारियों के सामने रखते हैं। प्रतीक्षा को इस प्रक्रिया में शामिल होने से यह समझने का अवसर मिला कि प्रशासन लोगों की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान के लिए किस प्रकार काम करता है।
इस अनुभव ने छात्रा को नेतृत्व, जिम्मेदारी और जनसेवा के महत्व को करीब से समझने का अवसर दिया। साथ ही, इस पहल के जरिए अन्य छात्राओं को भी प्रशासनिक सेवाओं के प्रति रुचि विकसित करने और भविष्य में अधिकारी बनने का सपना देखने के लिए प्रेरित किया गया।

IAS या PCS अधिकारी बनना चाहती हैं प्रतीक्षा
प्रतीकात्मक जिलाधिकारी बनने के बाद छात्रा प्रतीक्षा ने अपने भविष्य के लक्ष्य को लेकर उत्साह व्यक्त किया। उसने कहा कि वह मन लगाकर पढ़ाई करेगी और मेहनत के दम पर आईएएस या पीसीएस अधिकारी बनना चाहती है। उसका सपना अधिकारी बनकर देश और समाज की सेवा करना है।
प्रतीक्षा का यह संकल्प दर्शाता है कि कम उम्र में भी बच्चे अपने भविष्य को लेकर स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं। सही मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और निरंतर मेहनत से वे अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
प्रतीक्षा के लिए यह अवसर न केवल सम्मान का विषय रहा, बल्कि उसके लक्ष्य को और मजबूत करने वाला अनुभव भी बना। उम्मीद है कि इस तरह की पहल से अन्य छात्राएं भी पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहित होंगी और अपने भविष्य के लिए नए लक्ष्य तय करेंगी।
जिलाधिकारी ने की छात्रा के आत्मविश्वास की सराहना
जिलाधिकारी समीर ने प्रतीक्षा की प्रतिभा और आत्मविश्वास की सराहना करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने शिक्षा और उचित मार्गदर्शन के महत्व पर जोर देते हुए विश्वास जताया कि बच्चों को आगे बढ़ने के अवसर दिए जाएं, तो वे अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं।
मिशन शक्ति के तहत की गई यह पहल बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने, उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित करने और उन्हें समाज में अपनी भूमिका पहचानने के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस तरह के कार्यक्रम छात्राओं को यह समझने में मदद करते हैं कि शिक्षा के माध्यम से वे न केवल अपना भविष्य बेहतर बना सकती हैं, बल्कि समाज के विकास में भी योगदान दे सकती हैं।
मिशन शक्ति से बालिकाओं को बड़े सपने देखने की प्रेरणा
मिशन शक्ति का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तीकरण को बढ़ावा देना है। इस तरह की प्रेरणादायी गतिविधियों के माध्यम से छात्राओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और विभिन्न क्षेत्रों में अपना भविष्य बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
जालौन की छात्रा प्रतीक्षा का एक दिन की प्रतीकात्मक डीएम बनना इसी दिशा में एक सकारात्मक पहल है। जनसुनवाई में शामिल होकर उसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को समझा और आईएएस या पीसीएस अधिकारी बनने के अपने सपने को दोहराया। उसका संकल्प दूसरी छात्राओं के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।






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