UP Rain Alert: उत्तर प्रदेश में लगातार तीन दिनों से हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। बारिश, आंधी, जलभराव और इससे जुड़े हादसों में अब तक 81 लोगों की मौत और 62 लोगों के घायल होने की सूचना है। वहीं प्रदेश में 2,254 मकानों को नुकसान पहुंचा है, जबकि 154 पशुओं की मौत की भी जानकारी सामने आई है। राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार नुकसान से जुड़े आंकड़ों का संकलन अभी जारी है।
बारिश से पैदा हुए हालात के बीच अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सामने एक और चुनौती खड़ी हो गई है। जलभराव और गंदे पानी के कारण डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, वायरल बुखार और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इसे देखते हुए कई जिलों में स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है।

56 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
प्रदेश में 25 सितंबर से शुरू हुए बारिश के दौर में 56 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं।
सबसे ज्यादा सात मौतें सीतापुर में दर्ज होने की सूचना है। इसके अलावा लखीमपुर खीरी, बहराइच और बलरामपुर में पांच-पांच, जबकि अयोध्या और गोरखपुर में चार-चार लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है।
कई जिलों में नदियों का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है। घाघरा और राप्ती नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण निचले इलाकों में खतरा बना हुआ है। बाराबंकी के एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है।
बारिश के बाद बीमारियों का खतरा बढ़ा
लगातार बारिश और जगह-जगह जलभराव के बाद स्वास्थ्य विभाग के सामने अब मच्छरजनित और जलजनित बीमारियों को रोकने की चुनौती है।
जलभराव वाले क्षेत्रों में जमा पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल स्थिति पैदा करता है। इससे डेंगू और मलेरिया के अलावा चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। वहीं दूषित पानी के कारण डायरिया, उल्टी और पेट से संबंधित संक्रमण के मामले भी बढ़ने की आशंका रहती है।
इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ स्वास्थ्य टीमों को सक्रिय किया है।
लखनऊ में आठों जोन में बढ़ाई गई निगरानी
लखनऊ में बारिश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी आठ जोन में निगरानी बढ़ा दी है। स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं। इसके साथ ही दवाओं का वितरण, मच्छरों के लार्वा की पहचान और लोगों को बीमारी से बचाव के लिए जागरूक करने का काम किया जा रहा है।
स्वास्थ्य केंद्रों को जरूरी दवाओं के साथ एंटी-स्नेक वेनम और अन्य आवश्यक मेडिकल सामग्री उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बारिश और जलभराव के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
प्रयागराज में डेंगू के 63 मरीज
बारिश के बीच प्रयागराज में डेंगू के मामलों ने भी स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ाई है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक 27 सितंबर तक जिले में डेंगू के 63 मरीज सामने आए हैं। इनमें अकेले सितंबर महीने में 48 मरीजों में डेंगू की पुष्टि होने की जानकारी है।
इसके बाद स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की टीमों ने संवेदनशील इलाकों में एंटी-लार्वा छिड़काव और निगरानी बढ़ा दी है। लोगों से भी अपने आसपास पानी जमा नहीं होने देने की अपील की जा रही है।

शाहजहांपुर में वायरल बुखार के साथ डेंगू-मलेरिया की निगरानी
शाहजहांपुर में भी बारिश और जलभराव के बीच वायरल बुखार के मरीजों के साथ डेंगू और मलेरिया के मामले सामने आने की सूचना है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई है।
अधिकारियों की ओर से लोगों को बुखार आने पर तत्काल जांच कराने और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा न लेने की सलाह दी जा रही है।
औरैया में 50 से ज्यादा लोग बुखार की चपेट में
औरैया के सहायल गांव में 50 से अधिक लोगों के बुखार से पीड़ित होने की सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची। टीम ने घर-घर जाकर मरीजों की जांच की और आवश्यक दवाओं का वितरण किया।
बारिश के बाद ग्रामीण इलाकों में बुखार के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमें निगरानी कर रही हैं, ताकि किसी बीमारी के संक्रमण को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सके।
81 मौतों में बीमारी से हुई मौतों का आंकड़ा अलग नहीं
बारिश और इससे जुड़े हादसों में 81 लोगों की मौत की सूचना सामने आई है, लेकिन इन 81 मौतों में डेंगू, मलेरिया या अन्य जलजनित बीमारियों से हुई मौतों को शामिल मानना सही नहीं होगा।
फिलहाल उपलब्ध राज्य-स्तरीय रिपोर्ट में बारिश के इस दौर के दौरान डेंगू, मलेरिया, वायरल बुखार या दूषित पानी से होने वाली बीमारियों से हुई मौतों का अलग से प्रमाणित प्रदेशव्यापी आंकड़ा जारी नहीं हुआ है।
इसलिए बारिश से हुई मौतों और बीमारी से होने वाली संभावित मौतों को अलग-अलग रखना जरूरी है।

प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
उत्तर प्रदेश में फिलहाल प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित लोगों तक राहत, सुरक्षित पेयजल और जरूरी सुविधाएं पहुंचाना है, वहीं दूसरी ओर जलभराव के बाद पैदा होने वाले मच्छरजनित और जलजनित रोगों को फैलने से रोकना है।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से संवेदनशील इलाकों में मेडिकल टीमों की तैनाती, दवाओं की उपलब्धता, एंटी-लार्वा अभियान और लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है।
आज भी बारिश का अलर्ट
प्रदेश में 28 सितंबर को भी कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। 11 जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट बताया गया है। ऐसे में जलभराव वाले क्षेत्रों में बीमारी फैलने का खतरा और बढ़ सकता है।
ऐसे हालात में स्वास्थ्य विभाग के सामने मेडिकल कैंप, दवाओं की उपलब्धता, स्वच्छ पेयजल, मच्छर नियंत्रण और प्रभावित इलाकों में नियमित स्वास्थ्य निगरानी बनाए रखना बड़ी चुनौती है।
फिलहाल लोगों को सलाह दी जा रही है कि जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतें, साफ पानी का इस्तेमाल करें, घर और आसपास पानी जमा न होने दें और लगातार बुखार या अन्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराएं।






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