नई दिल्ली, 24 सितंबर 2026। भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंजों में शामिल नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) ने गुरुवार को शेयर बाजार में बहुप्रतीक्षित कदम रखा। करीब एक दशक से चली आ रही लिस्टिंग की प्रक्रिया के बाद NSE के शेयरों ने आखिरकार सार्वजनिक बाजार में कारोबार शुरू कर दिया। NSE के शेयर ₹1,800 प्रति शेयर के भाव पर BSE में सूचीबद्ध हुए। यह IPO के ऊपरी मूल्य बैंड ₹1,785 से करीब 0.84 प्रतिशत अधिक है। लिस्टिंग के बाद शुरुआती कारोबार में शेयरों में तेजी देखने को मिली और कीमत करीब 5 प्रतिशत तक ऊपर गई।
NSE की लिस्टिंग को भारतीय पूंजी बाजार के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है, क्योंकि अब देश के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों में से एक NSE खुद भी एक सूचीबद्ध कंपनी बन गया है। बाजार में NSE के शेयरों की एंट्री ऐसे समय हुई है, जब भारतीय IPO बाजार में बड़े इश्यू को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।

₹1,800 पर हुई NSE की लिस्टिंग
NSE के IPO के लिए शेयर का प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर तय किया गया था। IPO का ऊपरी मूल्य ₹1,785 तय होने के बाद निवेशकों की नजर NSE की लिस्टिंग पर थी। गुरुवार को BSE पर NSE के शेयर ₹1,800 के भाव पर सूचीबद्ध हुए।
इस तरह NSE के शेयरों ने अपने इश्यू प्राइस की तुलना में करीब 0.84 प्रतिशत प्रीमियम के साथ बाजार में शुरुआत की। लिस्टिंग के बाद शेयर में खरीदारी देखने को मिली और शुरुआती कारोबार में यह करीब ₹1,866 के स्तर तक पहुंच गया, जो IPO के इश्यू प्राइस के मुकाबले लगभग 4.5 प्रतिशत अधिक था। हालांकि, शेयर बाजार में कीमतें लगातार बदलती रहती हैं और शुरुआती कारोबार का भाव पूरे कारोबारी दिन का प्रदर्शन नहीं माना जा सकता।
₹22,562 करोड़ का NSE IPO
NSE का IPO करीब ₹22,562 करोड़ का था। यह पूरी तरह Offer for Sale यानी OFS के रूप में आया था। इसका मतलब है कि IPO के तहत नए शेयर जारी करने के बजाय मौजूदा शेयरधारकों ने अपनी हिस्सेदारी के शेयर बिक्री के लिए पेश किए। इसलिए IPO से प्राप्त रकम NSE के पास नए पूंजी निवेश के रूप में नहीं गई, बल्कि उन मौजूदा शेयरधारकों को मिली जिन्होंने अपनी हिस्सेदारी बेची।
इस IPO के तहत करीब 12.64 करोड़ शेयर ऑफर किए गए थे। इश्यू का मूल्य बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर रखा गया था। ऊपरी मूल्य बैंड पर NSE का मूल्यांकन करीब ₹4.42 लाख करोड़ बैठता था।

NSE IPO को मिला 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन
NSE IPO को निवेशकों की ओर से अच्छी प्रतिक्रिया मिली। 17 सितंबर से 21 सितंबर 2026 तक चले IPO में कुल 50.58 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां मिलीं, जबकि करीब 8.86 करोड़ शेयर ऑफर किए गए थे। इस तरह IPO कुल मिलाकर 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ।
निवेशकों की अलग-अलग श्रेणियों में भी मांग देखने को मिली। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी QIB कैटेगरी 12.68 गुना सब्सक्राइब हुई, जबकि नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स यानी NII कैटेगरी में 6.55 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। रिटेल निवेशकों की कैटेगरी 1.39 गुना सब्सक्राइब हुई।
लिस्टिंग के साथ करीब ₹4.45 लाख करोड़ का बाजार मूल्यांकन
शेयर बाजार में NSE की एंट्री के समय कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब ₹4.45 लाख करोड़ रहा। बाजार रिपोर्टों के अनुसार, शुरुआती कारोबार में शेयर की कीमत बढ़ने के साथ NSE का बाजार मूल्यांकन भी ऊपर गया और यह करीब ₹4.5 लाख करोड़ के स्तर तक पहुंच गया।
NSE की इस लिस्टिंग के साथ निवेशकों को पहली बार एक्सचेंज ऑपरेटर के शेयरों में सीधे निवेश और कारोबार का अवसर मिला है। हालांकि, शेयर की कीमत में आगे होने वाले उतार-चढ़ाव का निर्धारण बाजार की परिस्थितियों, कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, कारोबार की मात्रा, नियामकीय बदलाव और निवेशकों की मांग जैसे कई कारकों से होगा।

NSE की बाजार में क्या है भूमिका?
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना 1992 में हुई थी और इसने भारत के शेयर बाजार में इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग को व्यापक रूप से बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्तमान में NSE भारतीय पूंजी बाजार के प्रमुख बाजार अवसंरचना संस्थानों में शामिल है।
30 जून 2026 तक NSE के पास 26.13 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड निवेशक खाते और करीब 12.9 करोड़ यूनिक निवेशक थे। इसी अवधि में एक्सचेंज पर 3,005 कंपनियां सूचीबद्ध थीं। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक कैश इक्विटी सेगमेंट में NSE की बाजार हिस्सेदारी करीब 92.99 प्रतिशत थी।
NSE की मजबूत बाजार हिस्सेदारी और बड़े निवेशक आधार की वजह से इसकी लिस्टिंग को बाजार में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
करीब एक दशक बाद पूरा हुआ NSE की लिस्टिंग का इंतजार
NSE की शेयर बाजार में लिस्टिंग की प्रक्रिया लंबे समय से चर्चा में रही थी। नियामकीय और अन्य प्रक्रियाओं के चलते इसका सार्वजनिक बाजार में प्रवेश कई वर्षों तक लंबित रहा। सितंबर 2026 में IPO के जरिए यह प्रक्रिया आगे बढ़ी और 24 सितंबर को NSE के शेयरों ने BSE पर कारोबार शुरू किया। Reuters ने भी इसे NSE के करीब एक दशक लंबे सार्वजनिक बाजार में प्रवेश के प्रयास की परिणति बताया है। (
NSE अपने ही प्लेटफॉर्म पर खुद को सूचीबद्ध नहीं कर सकता, इसलिए इसके शेयरों की लिस्टिंग BSE पर हुई। इसके अलावा शेयरों को Metropolitan Stock Exchange of India (MSEI) पर permitted-to-trade श्रेणी में भी कारोबार के लिए स्वीकार किया गया है।

निवेशकों के लिए क्या मायने रखती है NSE की लिस्टिंग?
NSE की लिस्टिंग से भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए एक नया प्रमुख स्टॉक बाजार में उपलब्ध हुआ है। हालांकि, किसी भी सूचीबद्ध कंपनी के शेयर की तरह NSE के शेयर में भी बाजार जोखिम मौजूद रहेगा।
लिस्टिंग के दिन शेयर में तेजी देखने को मिलना यह सुनिश्चित नहीं करता कि भविष्य में भी शेयर इसी दिशा में चलेगा। कंपनी के कारोबार, आय, नियामकीय बदलाव, बाजार में ट्रेडिंग गतिविधि और व्यापक आर्थिक परिस्थितियां शेयर की कीमत को प्रभावित कर सकती हैं।
इसलिए NSE शेयर को लेकर किसी भी निवेश निर्णय से पहले निवेशकों के लिए कंपनी के वित्तीय परिणाम, वैल्यूएशन, जोखिम और अपने निवेश उद्देश्यों को समझना महत्वपूर्ण है।
JN News Disclaimer
शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। NSE के शेयर की कीमतें बाजार खुलने के साथ लगातार बदल सकती हैं। यह खबर केवल NSE की लिस्टिंग, IPO और बाजार में हुई गतिविधियों से संबंधित जानकारी देने के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है। इसे किसी भी तरह की निवेश, खरीद या बिक्री की सलाह न माना जाए। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेना उचित है।







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