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उत्तराखंड में ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा, धामी सरकार खोलेगी राज्य स्तरीय विपणन केंद्र

उत्तराखंड में ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा, धामी सरकार खोलेगी राज्य स्तरीय विपणन केंद्र

देहरादून। उत्तराखंड में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने तथा स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में ‘मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना’ के अंतर्गत चौपाल-2026 का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश के महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के गांव अब केवल विकास के सहभागी नहीं हैं, बल्कि अपने परिश्रम, हुनर और स्थानीय संसाधनों के दम पर आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश का युवा रोजगार की तलाश करने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बने। इसी उद्देश्य से ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण, आर्थिक सहयोग, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जोड़ने जैसी सुविधाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

13 गांव में खुलेगा राज्य स्तरीय विपणन केंद्र

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के आईटी पार्क स्थित 13 गांव में राज्य के सभी 13 जनपदों के स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जाने वाले उत्पादों की बिक्री के लिए राज्य स्तरीय विपणन केंद्र खोलने की घोषणा की।

इस केंद्र के माध्यम से उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों में स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यदि स्थानीय उत्पादों को सही बाजार और उचित मूल्य मिले तो इससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

उत्तराखंड में ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा, धामी सरकार खोलेगी राज्य स्तरीय विपणन केंद्र

13 हजार से अधिक उद्यमियों को मिला सहयोग

मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश में 13 हजार से अधिक उद्यमियों को सहयोग दिया जा चुका है। इसके अलावा 8 हजार से अधिक महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को उद्यमिता एवं आजीविका के अवसरों से जोड़ा गया है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की मातृशक्ति में हुनर और कुछ नया करने की इच्छा है। पहाड़ी मसालों से लेकर मंडुवा, झंगोरा, दाल, शहद, अचार, जैम, हस्तशिल्प, ऊनी उत्पाद और स्थानीय कला तक को महिलाएं व्यवसाय का रूप दे रही हैं। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि इन उत्पादों को सही दिशा, तकनीकी सहयोग और व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जाए।

5 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से 5 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं को 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जा चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में 3 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनने में सफल हुई हैं।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, क्षमता और आत्मनिर्भर बनने की इच्छाशक्ति को दर्शाती है। सरकार का प्रयास है कि महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी बनाने के बजाय उन्हें आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदार बनाया जाए।

उत्तराखंड में ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा, धामी सरकार खोलेगी राज्य स्तरीय विपणन केंद्र

‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के जरिए स्थानीय उत्पादों को बाजार

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार उत्तराखंड के गांवों में तैयार होने वाले उत्पादों को देश के बड़े शहरों और व्यापक बाजार तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ नामक अंब्रेला ब्रांड तैयार किया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘लोकल टू ग्लोबल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे मंत्र दिए हैं। उत्तराखंड सरकार इन विचारों को धरातल पर उतारने के लिए काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई व्यक्ति उत्तराखंड का स्थानीय उत्पाद खरीदे तो उसे उस उत्पाद में पहाड़ की मेहनत, संस्कृति, परंपरा और मिट्टी की खुशबू भी महसूस होनी चाहिए।

इसी उद्देश्य से प्रदेश में ग्रामीण हाट, विपणन केंद्र, कलेक्शन सेंटर और एग्री सर्विस सेंटर जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है, ताकि किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल सके।

पलायन रोकने में ग्रामीण उद्यमिता की अहम भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य पलायन को रोकना भी है। सरकार चाहती है कि उत्तराखंड का युवा रोजगार की तलाश में अपने गांव और पहाड़ छोड़ने के लिए मजबूर न हो।

उन्होंने कहा कि अगर गांवों में ही रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और पलायन की समस्या को भी कम करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘गांव मजबूत होगा तो उत्तराखंड मजबूत होगा।’

इसी दिशा में ‘ग्रामोत्थान परियोजना’ (रीप) के माध्यम से गांवों के अति-निर्धन परिवारों को आजीविका से जोड़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने का काम किया जा रहा है।

सभी 13 जिलों में आयोजित होंगी उद्यमशाला चौपाल

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी 13 जनपदों में ‘मुख्यमंत्री उद्यमशाला चौपाल’ आयोजित की जा रही हैं। इन चौपालों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को सरकार की योजनाओं की जानकारी देना और पात्र लोगों को उनका लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित करना है।

इसके साथ ही योजना की जानकारी को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए प्रचार वैन भी भेजी जा रही हैं। सरकार का उद्देश्य है कि उद्यमिता और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और अधिक से अधिक युवा, महिलाएं तथा ग्रामीण परिवार इनका लाभ उठा सकें।

लखपति दीदियों और महिला उद्यमियों का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लखपति दीदियों और महिला उद्यमियों को सम्मानित किया। इसके साथ ही उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत तैयार की गई पुस्तक और वार्षिक रिपोर्ट का विमोचन भी किया गया।

कार्यक्रम में एकीकृत कृषि क्लस्टर आधारभूत प्रशिक्षण एवं मॉड्यूल, शिशु एवं लघु बाल आहार मॉड्यूल तथा महिलाओं और बच्चों में एनीमिया की रोकथाम एवं प्रबंधन मॉड्यूल का भी लोकार्पण किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार महिला, युवा और ग्रामीण उद्यमियों को आगे बढ़ाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य है कि स्थानीय संसाधनों, स्थानीय हुनर और ग्रामीण प्रतिभा को उद्यमिता से जोड़कर उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाया जाए।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी, गणेश जोशी, खजान दास, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक उमेश शर्मा काऊ, सविता कपूर, सचिव ग्राम्य विकास धीराज गर्ब्याल सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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