नई दिल्ली, 21 जुलाई 2026: दिल्ली में छात्रों और युवाओं के प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित लाठीचार्ज के एक दिन बाद मंगलवार को एक बार फिर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी विरोध स्थल पर जुटे। दूसरी ओर, कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किया और छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर जवाबदेही की मांग उठाई।
जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन का मुद्दा अब सड़क से लेकर संसद तक पहुंच गया है। प्रदर्शनकारियों की ओर से शिक्षा व्यवस्था, कथित परीक्षा पेपर लीक और छात्रों से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई जा रही है। सोमवार को संसद की ओर मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी थी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बल प्रयोग और लाठीचार्ज का आरोप लगाया, जबकि इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक दलों ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।

जंतर-मंतर पर फिर जुटी भीड़
मंगलवार को जंतर-मंतर पर एक बार फिर प्रदर्शनकारियों की भीड़ दिखाई दी। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि पिछले दिन की पुलिस कार्रवाई के बावजूद उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि केवल आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान युवाओं और छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि उनकी आवाज को दबाने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया। वहीं, सरकार की ओर से इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बातचीत और समाधान की दिशा में कदम उठाने के संकेत भी सामने आए हैं। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस का प्रदर्शन
इसी बीच कांग्रेस ने भी छात्रों के समर्थन में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई वरिष्ठ नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास की ओर मार्च करते हुए पहुंचे और वहां धरने पर बैठ गए।
कांग्रेस नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ हुई कथित ज्यादती की जवाबदेही तय होनी चाहिए। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई। पार्टी नेताओं का कहना है कि छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार को संसद में चर्चा करनी चाहिए और पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।

घायल छात्रों से मिलने अस्पताल पहुंचे राहुल गांधी
प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन से पहले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचकर कथित पुलिस कार्रवाई में घायल हुए छात्रों से मुलाकात की। कांग्रेस नेताओं ने छात्रों का हाल जाना और उनके साथ एकजुटता जताई।
कांग्रेस का आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल खड़े करती है। पार्टी नेताओं ने कहा कि देश के युवाओं और छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं को सुना जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री आवास के बाहर बढ़ा राजनीतिक तनाव
राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं के प्रधानमंत्री आवास के बाहर पहुंचने के बाद सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की भी खबरें सामने आईं।
रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी से मुलाकात की और उनसे धरना समाप्त करने का आग्रह किया। इस दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों की मौजूदगी भी बताई गई। हालांकि, कांग्रेस नेताओं ने छात्रों के मुद्दे पर सरकार से जवाबदेही और कार्रवाई की मांग जारी रखी।

छात्रों के मुद्दे पर आमने-सामने सरकार और विपक्ष
दिल्ली में चल रहे इस विरोध प्रदर्शन ने केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है। एक ओर जहां प्रदर्शनकारी छात्र और युवा अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं, वहीं कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार संसद में इस मुद्दे पर चर्चा से बच रही है। वहीं, सरकार की ओर से बातचीत का रास्ता अपनाने के संकेत दिए गए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या छात्रों की मांगों को लेकर कोई ठोस समाधान निकलता है।
जंतर-मंतर से लेकर प्रधानमंत्री आवास तक पहुंचा आंदोलन
दिल्ली में मंगलवार का घटनाक्रम इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा कि एक तरफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी दोबारा बड़ी संख्या में जुटे, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन कर इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया।
फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहने की बात कही जा रही है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं और सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस ने भी स्पष्ट कर दिया है कि छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा वह संसद से लेकर सड़क तक उठाएगी।
दिल्ली में एक ही दिन जंतर-मंतर और प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए इन प्रदर्शनों ने छात्र आंदोलन को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। अब सभी की नजर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच संभावित बातचीत तथा इस पूरे विवाद के अगले राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है।






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