देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण के प्रयासों पर किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इस ऐतिहासिक विधेयक का समर्थन करते हुए सदन से सर्वसम्मत संकल्प पारित करने का प्रस्ताव रखा।
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन की शुरुआत उत्तराखंड राज्य आंदोलन की नारी शक्ति के प्रतीक गौरा देवी, टिंचरी माई, बिशनी देवी शाह, जशूली शौक्याण, कुंती वर्मा और अन्य वीरांगनाओं को नमन करते हुए की। उन्होंने सदन से अपील की कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण के मुद्दे पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट होना चाहिए।

सनातन संस्कृति में नारी का स्थान
मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन संस्कृति में नारी को देवी का दर्जा दिया गया है। माँ दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के रूप में हम नारी के साहस, समृद्धि और ज्ञान का वंदन करते हैं। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले, कल्पना चावला से लेकर चंद्रयान-3 मिशन की सफलता में योगदान देने वाली महिलाओं का उदाहरण दिया।
उत्तराखंड की बात करते हुए उन्होंने तीलू रौतेली, रानी जिया रानी और चिपको आंदोलन की अग्रदूत गौरा देवी को नारी शक्ति का प्रेरणादायक उदाहरण बताया।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम युगांतकारी कदम
CM धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाकर महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक कदम उठाया। यह केवल संख्या बढ़ाने का प्रयास नहीं, बल्कि नीति-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में युगांतकारी कदम है।
उन्होंने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब लोकसभा में बिल पास नहीं हो पाया तो विपक्षी नेता तालियाँ बजा रहे थे। यह दृश्य महाभारत की उस सभा की याद दिलाता है, जिसमें द्रौपदी का अपमान किया गया था।

विपक्ष भ्रम फैला रहा है
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष अब इस मुद्दे पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है। जबकि गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया था कि परिसीमन के माध्यम से किसी राज्य की सीटों के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद महिलाओं को आरक्षण देने का साहस नहीं दिखा सका।
केंद्र सरकार का महिला सशक्तिकरण पर फोकस
CM धामी ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले 11 वर्षों में महिलाओं के कल्याण के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि जेंडर बजट में पाँच गुना वृद्धि हुई है। वर्ष 2026-27 के बजट में महिलाओं और बालिकाओं के कल्याण के लिए 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है।
“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ”, “सुकन्या समृद्धि योजना”, “प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना”, स्वच्छ भारत मिशन और तीन तलाक कानून जैसी पहलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मोदी सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए समर्पित है।

उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण के प्रयास
मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष जेंडर बजट में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। “सशक्त बहना उत्सव योजना”, “मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना” और “एकल महिला स्वरोजगार योजना” के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा रहा है।
प्रदेश में सरकारी सेवाओं में 30% और सहकारी समितियों में 33% महिला आरक्षण लागू किया गया है। साथ ही, लोहाघाट में राज्य का पहला महिला स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित किया जा रहा है।
समान नागरिक संहिता का ऐतिहासिक कदम
CM धामी ने कहा कि उत्तराखंड ने देश में पहली बार समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर मुस्लिम महिलाओं को हलाला, इद्दत, बहुविवाह और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्ति दिलाई है।
अंत में मुख्यमंत्री ने विपक्ष से अपील की कि महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर दलगत हितों से ऊपर उठकर सकारात्मक रुख अपनाया जाए, ताकि देश की आधी आबादी को उनका उचित अधिकार मिल सके।







Leave a Reply