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Beekeeping at Chief Minister’s residence 45 दिनों में 520 किलो शहद: मुख्यमंत्री आवास में मधुमक्खी पालन का मॉडल, राज्यभर में विस्तार की तैयारी

Beekeeping at Chief Minister’s residence 45 दिनों में 520 किलो शहद: मुख्यमंत्री आवास में मधुमक्खी पालन का मॉडल, राज्यभर में विस्तार की तैयारी

देहरादून। उत्तराखंड में स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक नई पहल सामने आई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास परिसर में शहद निकालने की प्रक्रिया का अवलोकन किया। इस दौरान जानकारी दी गई कि आवास परिसर में महज 45 दिनों में 520 किलोग्राम शहद का उत्पादन किया गया है, जो राज्य में मधुमक्खी पालन की अपार संभावनाओं को दर्शाता है।

Beekeeping at Chief Minister's residence 45 दिनों में 520 किलो शहद: मुख्यमंत्री आवास में मधुमक्खी पालन का मॉडल, राज्यभर में विस्तार की तैयारी

पर्वतीय क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय और वन क्षेत्रों में शहद उत्पादन की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वन क्षेत्रों में बी-बॉक्स (मधुमक्खी बक्से) स्थापित करने के लिए एक ठोस और प्रभावी नीति तैयार की जाए। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

स्वरोजगार योजना से जुड़ेंगे किसान और युवा

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत मधुमक्खी पालन को प्राथमिकता दी जाएगी। इस क्षेत्र से जुड़े किसानों और उद्यमियों को विशेष सब्सिडी और प्रोत्साहन देने की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोग इस व्यवसाय से जुड़ सकें।

उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन न केवल कम लागत में शुरू होने वाला व्यवसाय है, बल्कि यह तेजी से आय बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम भी है।

Beekeeping at Chief Minister's residence 45 दिनों में 520 किलो शहद: मुख्यमंत्री आवास में मधुमक्खी पालन का मॉडल, राज्यभर में विस्तार की तैयारी

पर्यावरण संरक्षण के साथ आय का स्रोत

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि मधुमक्खी पालन पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाता है। इससे परागण (Pollination) बढ़ता है, जिससे कृषि उत्पादन में सुधार होता है। उन्होंने इसे “आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण का संतुलित मॉडल” बताया।

“थ्री-बी गार्डन” बनाने की तैयारी

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उद्यान प्रभारी दीपक पुरोहित को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री आवास परिसर में वर्षभर शहद उत्पादन के लिए उपयुक्त पुष्पीय और परागयुक्त पौधों का रोपण किया जाए।

उन्होंने “थ्री-बी (3B) गार्डन” विकसित करने पर भी जोर दिया, जिसमें शामिल होंगे:

  • Bird Friendly (पक्षियों के अनुकूल)
  • Bee Friendly (मधुमक्खियों के अनुकूल)
  • Butterfly Friendly (तितलियों के अनुकूल)

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस और हरेला पर्व जैसे अवसरों पर “थ्री-बी” आधारित पौधारोपण अभियान चलाया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ शहद उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आयाम

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि इस मॉडल को पूरे राज्य में लागू किया जाता है, तो यह हजारों युवाओं और किसानों के लिए रोजगार का बड़ा साधन बन सकता है। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिलेगी।

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