महिला सशक्तिकरण और बालिकाओं में नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे मिशन शक्ति फेज-5 (द्वितीय चरण) के तहत देवरिया कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित “एक दिन की जिलाधिकारी” कार्यक्रम ने छात्राओं के आत्मविश्वास और उत्साह को नई उड़ान दी। इस विशेष पहल के अंतर्गत चयनित छात्रा साक्षी दूबे को एक दिन के लिए जिलाधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई।

प्रशासनिक कार्यों को करीब से समझने का अवसर
कार्यक्रम के दौरान साक्षी दूबे ने जिलाधिकारी कक्ष में बैठकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली को नजदीक से समझा। उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों से संवाद स्थापित किया और उनके कार्यों की विस्तृत जानकारी ली। इस दौरान जनहित से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की गई, जिससे उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का अनुभव प्राप्त हुआ।
यह अनुभव न केवल साक्षी के लिए प्रेरणादायक रहा, बल्कि अन्य उपस्थित छात्राओं के लिए भी एक सीख और उत्साह का स्रोत बना।

मार्गदर्शन में निखरता नेतृत्व
कार्यक्रम का आयोजन जिलाधिकारी दिव्या मित्तल के मार्गदर्शन में किया गया। उन्होंने इस पहल के महत्व को बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बालिकाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और प्रशासनिक समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जिलाधिकारी ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर की जाए, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। उन्होंने बालिकाओं को बड़े सपने देखने, चुनौतियों का सामना करने और अपने लक्ष्य की दिशा में लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

मिशन शक्ति का उद्देश्य
मिशन शक्ति अभियान का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को सशक्त बनाना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और समाज में उनकी भागीदारी को बढ़ाना है। “एक दिन की जिलाधिकारी” जैसे कार्यक्रम इसी दिशा में एक प्रभावी कदम हैं, जो बालिकाओं को प्रशासनिक तंत्र से जोड़ते हैं और उनके भीतर नेतृत्व के गुणों को विकसित करते हैं।
अधिकारियों ने की सराहना
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बालिकाओं के सर्वांगीण विकास में सहायक हैं और उन्हें भविष्य में बड़े पदों के लिए प्रेरित करते हैं।
उत्साह और जिज्ञासा से भरा माहौल
पूरे कार्यक्रम के दौरान छात्राओं में प्रशासनिक कार्यों को लेकर खासा उत्साह और जिज्ञासा देखने को मिली। उन्होंने अधिकारियों से सवाल पूछे और शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली को समझने की कोशिश की।






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