नई दिल्ली,
वैश्विक तनाव, अमेरिकी टैरिफ की धमकियां और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग ने सोने-चांदी की कीमतों को आसमान छूने पर मजबूर कर दिया है। मंगलवार को घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स पर सोने और चांदी ने नए-नए रिकॉर्ड बनाए। फरवरी डिलीवरी वाला सोना 1,47,996 रुपये प्रति 10 ग्राम के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया, जबकि मार्च डिलीवरी वाली चांदी 3,19,949 रुपये प्रति किलोग्राम तक चढ़ गई।

एमसीएक्स पर एक दिन में लाखों का उछाल
सोमवार को भी बाजार में तेजी का रुख था। उस दिन फरवरी सोना 1,45,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। मंगलवार को यह 2,255 रुपये (1.55%) की तेजी के साथ 1,47,894 रुपये पर कारोबार कर रहा था। चांदी में तो और भी जोरदार उछाल देखा गया – 7,279 रुपये (2.35%) की बढ़त के साथ 3,17,554 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी यही माहौल है। कॉमेक्स पर सोना 4,708.10 डॉलर प्रति औंस पर पहुंचा, जबकि चांदी 94.320 डॉलर प्रति औंस के नए शिखर पर है। सोने ने पहले 4,689.39 डॉलर का रिकॉर्ड बनाया था।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
इस तेजी के पीछे मुख्य वजह वैश्विक राजनीतिक तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड मुद्दे पर यूरोपीय देशों को टैरिफ की चेतावनी दी है। उन्होंने यहां तक कहा है कि जरूरत पड़ी तो बल प्रयोग भी किया जा सकता है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूरोपीय संघ के ‘एंटी-कोएरशन’ तंत्र को लागू करने की बात कही, जबकि जर्मनी के चांसलर ने संयम बरतने की अपील की।
इसके अलावा ट्रंप प्रशासन द्वारा फेडरल रिजर्व पर दबाव बनाने की आशंका से भी निवेशक चिंतित हैं। ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें और चांदी की बढ़ती औद्योगिक मांग (सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स) ने भी कीमतों को सहारा दिया है।

विशेषज्ञों का क्या कहना है?
विश्लेषकों का मानना है कि अल्पकालिक मुनाफावसूली संभव है। ऑगमोंट की रिपोर्ट के मुताबिक चांदी 84 डॉलर प्रति औंस (लगभग 2,60,000 रुपये प्रति किलोग्राम) तक गिर सकती है। लेकिन लंबी अवधि में आपूर्ति की चिंता और मजबूत औद्योगिक मांग के चलते कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।
निवेशकों के लिए सलाह
- अगर आप लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं तो अभी भी सोना-चांदी अच्छा विकल्प लग रहा है।
- अल्पकालिक ट्रेडर्स को मुनाफावसूली के लिए तैयार रहना चाहिए।
- भू-राजनीतिक घटनाओं पर नजर रखें – कोई भी बड़ा ट्विस्ट कीमतों को और हिला सकता है।
सोना-चांदी का यह रिकॉर्ड उछाल निवेशकों के लिए सुनहरा मौका भी है और चिंता का सबब भी। बाजार की यह तेजी कब तक रहेगी, यह वैश्विक घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।








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