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उत्तराखंड का सांस्कृतिक उत्सव: CM धामी ने घोड़ा लाइब्रेरी महोत्सव में किया शिरकत, 114 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण

उत्तराखंड का सांस्कृतिक उत्सव: CM धामी ने घोड़ा लाइब्रेरी महोत्सव में किया शिरकत, 114 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण

नैनीताल, 28 दिसंबर 2025 – देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत करने और ग्रामीण विकास को गति देने के लिए एक अनोखा प्रयास देखने को मिला। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने नैनीताल जिले के कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र के कोटाबाग में आयोजित दो दिवसीय घोड़ा लाइब्रेरी पहाड़ पच्छयाण महोत्सव में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्र के समग्र विकास के लिए 114 करोड़ 69 लाख 46 हजार रुपये की लागत से 12 विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। महोत्सव, जो लोकसंस्कृति, पुस्तकों और प्रकृति को समर्पित है, ने न केवल स्थानीय युवाओं को प्रेरित किया बल्कि पूरे राज्य की सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने का काम किया।

यह महोत्सव विश्व प्रसिद्ध घोड़ा लाइब्रेरी की एक अनूठी पहल है, जो पर्वतीय क्षेत्रों के दुर्गम गांवों तक पुस्तकों को घोड़ों के माध्यम से पहुंचाती है। मुख्यमंत्री धामी ने इस लाइब्रेरी की ऊर्जावान टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह न केवल ज्ञान का प्रकाश फैला रही है बल्कि बच्चों के सपनों को पंख दे रही है। उन्होंने इस प्रयास को “आशा की किरण” करार दिया, जो कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी शिक्षा और संस्कृति को जीवंत रखने का प्रतीक है।

उत्तराखंड का सांस्कृतिक उत्सव: CM धामी ने घोड़ा लाइब्रेरी महोत्सव में किया शिरकत, 114 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण

घोड़ा लाइब्रेरी: दुर्गम पहाड़ों में ज्ञान का उजाला

घोड़ा लाइब्रेरी की स्थापना एक प्रेरणादायी कहानी है। यह पहल शुभम बधानी और उनकी टीम द्वारा संचालित है, जो घोड़ों पर सवार होकर दूरदराज के गांवों में पुस्तकें वितरित करती है। महोत्सव का आयोजन इसी लाइब्रेरी द्वारा किया गया, जिसमें विद्यार्थियों को अपनी लोकसंस्कृति, पुस्तकों और प्रकृति से जोड़ने का प्रयास किया गया। मुख्यमंत्री धामी ने इसकी खूब सराहना की और कहा कि यह महोत्सव पुस्तक संस्कृति को विकसित करने का अद्वितीय माध्यम है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस पहल की तारीफ की थी, जो इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाती है। महोत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, कार्यशालाएं और प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें स्थानीय बच्चे सक्रिय रूप से भाग ले रहे थे। धामी ने उपस्थित छात्र-छात्राओं से अपील की कि पुस्तकों को केवल परीक्षा तक सीमित न रखें, बल्कि जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा, “पुस्तकें हमारी सच्ची मित्र और मार्गदर्शक होती हैं, जो चरित्र निर्माण और भविष्य की दिशा निर्धारित करती हैं।”

यह महोत्सव न केवल सांस्कृतिक उत्सव था बल्कि एक सामाजिक संदेश भी। इसमें स्थानीय उत्पादों के स्टाल लगाए गए, जहां महिला स्वयं सहायता समूहों और किसानों ने अपने हस्तशिल्प और जैविक उत्पादों का प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री ने इन स्टालों का दौरा किया और उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ऐसी पहलों को प्रोत्साहित कर रही है।

उत्तराखंड का सांस्कृतिक उत्सव: CM धामी ने घोड़ा लाइब्रेरी महोत्सव में किया शिरकत, 114 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण

क्षेत्रीय विकास को मिली नई गति: 114 करोड़ के 12 कार्यों का शुभारंभ

महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने क्षेत्र के विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले महत्वपूर्ण कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास किया। कुल 114 करोड़ 69 लाख 46 हजार रुपये की लागत से पूरे होने वाले ये 12 कार्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करेंगे। इनमें से दो योजनाओं का लोकार्पण और दस योजनाओं का शिलान्यास किया गया।

लोकार्पण कार्य:

  • पशु चिकित्सालय नैनीताल में भवन निर्माण: 91 लाख 23 हजार रुपये की लागत से पूरा। इससे पशुपालकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी।
  • प्राचीन हनुमान मंदिर, तोक भटलानी का जीर्णोद्धार: 1 करोड़ 4 लाख 56 हजार रुपये से सौंदर्यीकरण। यह पर्यटन और लोकसंस्कृति को बढ़ावा देगा।

शिलान्यास कार्य:

ये कार्य मुख्य रूप से विद्युत, सड़क और शिक्षा क्षेत्र पर केंद्रित हैं:

  1. राजकीय आईटीआई डहरिया में 33/11 केवी उपस्थान और लाइन: 28 करोड़ 21 लाख 38 हजार रुपये। 24×7 बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
  2. जयपुर पाडली में 33/11 केवी उपस्थान: 32 करोड़ 58 लाख 69 हजार रुपये। ओवरलोडिंग और कटौती से मुक्ति।
  3. काठगोदाम में 33/11 केवी उपस्थान: 17 करोड़ 12 लाख 62 हजार रुपये। हल्द्वानी क्षेत्र को लाभ।
  4. ग्राम फुलचौड़ में मां तुलसी विहार मार्ग: 31 लाख 48 हजार रुपये। यातायात और कृषि को बढ़ावा।
  5. निगम नाला वाला मार्ग का पुनर्निर्माण: 1 करोड़ 83 लाख 47 हजार रुपये। पर्यटन को गति।
  6. निहाल नदी पर आरसीसी सेतु: 3 करोड़ 19 लाख 20 हजार रुपये। राज्यमार्ग 41 को मजबूत।
  7. कालाढूंगी मुख्य मार्ग चौड़ीकरण: 3 करोड़ 88 लाख 80 हजार रुपये। आवागमन सुगम।
  8. रामणी आनसिंह से साकेत कुंज मार्ग: 88 लाख 13 हजार रुपये। स्थानीय सुविधा।
  9. हल्द्वानी में आईटीआई क्रासिंग से मेहता हॉस्पिटल मार्ग: 23 करोड़ 74 लाख रुपये। नहर कवरिंग और चौड़ीकरण।
  10. राजकीय महाविद्यालय कोटाबाग में मैदान समतलीकरण: 95 लाख 90 हजार रुपये। छात्रों का सर्वांगीण विकास।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ये कार्य उत्तराखंड को विकसित राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी योजनाएं समयबद्ध और गुणवत्ता युक्त हों।

शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण: धामी का विजन

कार्यक्रम में शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड ने देश में पहली बार नई शिक्षा नीति लागू की, जिसमें ‘बाल वाटिका’ की शुरुआत हुई। सभी सरकारी स्कूलों में NCERT किताबें अनिवार्य हैं, और कक्षा 1-12 तक मुफ्त पुस्तकें दी जा रही हैं। 226 स्कूलों को PM SHRI स्कूल बनाया जा रहा है, जबकि 500 स्कूलों में वर्चुअल क्लासेस चल रही हैं।

मेधावी छात्रों के लिए मुख्यमंत्री मेधावी छात्रवृत्ति योजना के तहत मासिक सहायता, भारत भ्रमण और व्यावसायिक शिक्षा शुरू की गई। राज्य पहला ऐसा राज्य है जहां राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा तैयार की गई, जिसमें ‘बस्तारहित दिवस’ शामिल है। स्थानीय भाषाओं (गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी) में पुस्तकें और थारू-बोक्सा भाषाओं में शब्दकोश बन रहे हैं। कौशलम कार्यक्रम से युवाओं में उद्यमिता विकसित हो रही है।

नकल माफिया पर सख्ती के लिए देश का सबसे कठोर कानून लागू किया गया, जिससे 4 वर्षों में 26 हजार युवा सरकारी नौकरियों में चयनित हुए। UPSC/ND A पास करने वालों को 50 हजार रुपये की सहायता भी दी जा रही है।

सांस्कृतिक मोर्चे पर, धामी ने मानसखंड के मंदिरों के पुनरुत्थान की बात की, जैसे नैनादेवी, कैंची धाम, हनुमानगढ़ी और मुक्तेश्वर धाम। कोटाबाग के हनुमान मंदिर का जीर्णोद्धार इसका उदाहरण है।

समापन: एक नई प्रेरणा की शुरुआत

महोत्सव का समापन विजेताओं को सम्मानित करने और स्थानीय हनुमान मंदिर में पूजा के साथ हुआ। सांसद अजय भट्ट और विधायक बंशीधर भगत ने भी विकास कार्यों की सराहना की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और ग्रामीण उपस्थित थे।

यह महोत्सव दर्शाता है कि उत्तराखंड सांस्कृतिक संरक्षण और आधुनिक विकास के बीच संतुलन बना रहा है। मुख्यमंत्री धामी का विजन – जहां शिक्षा, संस्कृति और इंफ्रास्ट्रक्चर एक साथ आगे बढ़ें – राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। अगर आप उत्तराखंड के विकास और सांस्कृतिक पहलों से जुड़े रहना चाहते हैं, तो कमेंट्स में अपनी राय साझा करें। क्या आपको लगता है कि ऐसी पहलें ग्रामीण युवाओं को सशक्त बनाएंगी? शेयर करें और फॉलो करें हमारे ब्लॉग को अधिक अपडेट्स के लिए!

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