2017 के उस काले अध्याय को भुलाना मुश्किल, पीड़िता ने कहा ‘मैं हार नहीं मानूँगी’—कानूनी विशेषज्ञों का मानना, SC का फैसला निर्धारित करेगा भविष्य
उन्नाव बलात्कार कांड की पीड़िता ने फिर से न्याय के दरवाजे पर दस्तक दी है। 2017 के उस दर्दनाक घटना के आठ साल बाद, जब कुलदीप सिंह सेंगर की 10 साल की जेल सजा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निलंबित कर दिया, पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने का फैसला किया है। यह याचिका न सिर्फ सजा बहाली की मांग करती है, बल्कि पूरे केस की पुन: जांच की भी। पीड़िता ने कहा, “मैं हार नहीं मानूँगी। न्याय मेरी आखिरी उम्मीद है।
” क्या सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस केस को नई दिशा देगा, या फिर सिस्टम की खामियाँ उजागर होंगी? आइए, इस याचिका के पीछे की कहानी, कानूनी पहलुओं और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को करीब से समझते हैं—एक ऐसी घटना जो आज भी महिलाओं के लिए चेतावनी बनी हुई है।

2017 का उन्नाव कांड में क्या हुआ था
2017 का उन्नाव कांड आज भी रोंगटे खड़े कर देता है। 17 साल की एक लड़की ने बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर बलात्कार का आरोप लगाया। पीड़िता के पिता को सजा के बाद हिरासत में पीट-पीटकर मार दिया गया, और उसके चचेरे भाई की हत्या हो गई। सेंगर को 2018 में गिरफ्तार किया गया, और 2019 में CBI कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई। लेकिन 2024 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सजा निलंबित कर दी, तर्क देते हुए कि सेंगर का स्वास्थ्य खराब है।
यह फैसला आया तो पीड़िता टूट गई—उसने कहा, “मैंने सब कुछ सहा, लेकिन न्याय मिला तो लगा जीवन में रोशनी है। अब ये फैसला मुझे फिर अंधेरे में धकेल रहा है।” याचिका में पीड़िता का वकील इरफान अहमद ने कहा, “हाईकोर्ट का फैसला पक्षपाती था। सजा निलंबन के पीछे कोई ठोस मेडिकल ग्राउंड नहीं। हम SC से अपील करेंगे कि केस को पुन: सुनवाई हो।”

कानूनी विशेषज्ञों का मानना…?
यह याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर होने वाली है, और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक टेस्ट केस बनेगा। रिटायर्ड जज जस्टिस आर.के. अग्रवाल ने कहा, “POCSO और IPC की धाराओं के तहत सजा निलंबन दुर्लभ होता है। अगर SC हस्तक्षेप करता है, तो ये महिलाओं के खिलाफ अपराधों में सख्ती का संदेश देगा।
” याचिका में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए कहा गया है कि सेंगर की मेडिकल रिपोर्ट फर्जी थी, और सजा बहाली के साथ पीड़िता को सुरक्षा भी दी जाए। पीड़िता, जो अब 25 साल की हो चुकी हैं, ने गोपनीयता की शर्त पर कहा, “मेरा परिवार बिखर गया, लेकिन मैं लड़ रही हूँ। ये याचिका उन सभी लड़कियों के लिए है जो चुप रह जाती हैं।”

राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। सपा और कांग्रेस ने सरकार को घेरा, कहा “सेंगर को बचाने की साजिश।” सपा प्रवक्ता ने कहा, “BJP का विधायक अपराधी बना, लेकिन सजा माफ। न्याय व्यवस्था पर सवाल।” वहीं, BJP ने पलटवार किया, “केस CBI ने हैंडल किया, हम न्याय के साथ हैं।” राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया, कहा “पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करें।” NCRB डेटा के अनुसार, 2024 में UP में 50,000 से ज्यादा बलात्कार केस दर्ज हुए, लेकिन सजा दर सिर्फ 28%। उन्नाव केस इसकी मिसाल है—पीड़िता की लड़ाई ने #MeToo मूवमेंट को जन्म दिया।
ये याचिका न सिर्फ सेंगर केस का टर्निंग पॉइंट हो सकती है, बल्कि महिलाओं के लिए न्याय की नई उम्मीद भी। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने में 3-6 महीने लगेंगे, लेकिन पीड़िता का हौसला देखकर लगता है कि न्याय की जीत होगी। क्या सिस्टम सुधरेगा? उम्मीद है हाँ। अगर आप भी इस मुद्दे पर राय रखते हैं, कमेंट में शेयर करें।








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