जनपद न्यायाधीश प्रदीप कुमार सिंह ने दीप प्रज्वलन से किया बरेली राष्ट्रीय लोक अदालत 2025 का शुभारंभ, बैंक ऋण से 10 करोड़ रिकवरी—प्रदर्शनी में बंदियों के हस्तशिल्प भी आकर्षण का केंद्र
उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद में बरेली राष्ट्रीय लोक अदालत 2025 ने न्याय प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के दिशा-निर्देश पर शनिवार को आयोजित इस विशेष लोक अदालत में लंबित 1 लाख 81 हजार 462 मामलों का सफल निपटारा किया गया। इसमें 300 करोड़ 73 लाख रुपये से अधिक की धनराशि पर आदेश पारित हुए।
जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रदीप कुमार सिंह द्वितीय ने देवी सरस्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ किया। क्या यह अभियान न्यायिक बोझ कम करने में मील का पत्थर साबित होगा? आइए, इस आयोजन की पूरी डिटेल्स में उतरते हैं।

किन किन की सहभागिता रही।
लोक अदालत में न्यायिक अधिकारियों, बैंकों, बीमा कंपनियों, अधिवक्ताओं और प्रशासनिक विभागों की सक्रिय सहभागिता रही। सत्र, दीवानी और फौजदारी न्यायालयों के साथ पारिवारिक न्यायालय, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, वाणिज्यिक न्यायालय, पुलिस, परिवहन, श्रम विभाग और नगर निगम जैसे विभागों ने हजारों मामलों का आपसी सुलह-समझौते के आधार पर त्वरित निपटारा किया। नोडल अधिकारी एवं अपर जनपद न्यायाधीश रामानंद ने बताया, “यह आयोजन न्याय को सुलभ बनाने का माध्यम है। कुल 1.81 लाख मामलों का निपटारा और 300 करोड़ से अधिक की वसूली इसका प्रमाण है।” उन्होंने जोर दिया कि ई-चालानों के 52 हजार से अधिक मामलों का भी समाधान हुआ, जो ट्रैफिक नियमों के पालन को प्रोत्साहित करेगा।
बरेली राष्ट्रीय लोक अदालत 2025 में किया गया निपटारा
बैंक ऋण मामलों के निपटारे के लिए 20 विशेष पीठों का गठन किया गया, जिनके माध्यम से 10 करोड़ 74 लाख रुपये से अधिक की धनराशि की वसूली की गई। अपर जनपद न्यायाधीश उमा शंकर कहार ने कहा, “बैंकिंग विवादों का त्वरित समाधान उधारकर्ताओं को राहत देता है। यह लोक अदालत की ताकत है।” आयोजन के दौरान बंदियों द्वारा तैयार हस्तशिल्प, औषधीय पौधे और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जो दर्शकों को आकर्षित करने में सफल रही। आम जनता की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क स्थापित किए गए, जहाँ पैरा लीगल वॉलंटियर्स ने मार्गदर्शन किया।

राष्ट्रीय लोक अदालत ने न केवल लंबित मामलों को कम किया, बल्कि न्याय प्रक्रिया को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रदीप कुमार सिंह द्वितीय ने कहा, “यह आयोजन न्यायपालिका की पहुंच को मजबूत करता है। सुलह-समझौते से निपटारे से अदालतों का बोझ कम होता है।” बरेली जैसे जिलों में यह अभियान सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देगा। क्या राष्ट्रीय लोक अदालतें नियमित होंगी? सरकार की पहल से उम्मीदें बढ़ गई हैं।








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