80 से ज्यादा फर्जी फर्में बनाकर फेंसेडिल कफ सिरप की तस्करी, गिरोह का मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल का कनेक्शन—एसटीएफ की सबसे बड़ी कार्रवाई
उत्तर प्रदेश में नशीली दवाओं की तस्करी का एक नया चेहरा सामने आया है। विशेष कार्य बल (STF) ने सहारनपुर के दो सगे भाइयों—अभिषेक शर्मा और शुभम शर्मा—को लखनऊ के आलमबाग इलाके से गिरफ्तार कर लिया। ये दोनों फेंसेडिल कफ सिरप की तस्करी के बड़े गिरोह के मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल के इशारे पर काम कर रहे थे। गिरफ्तारी के दौरान उनके पास से 80 से ज्यादा फर्जी फर्मों के दस्तावेज, बोगस ई-वे बिल और फर्जी बिलिंग का पूरा रिकॉर्ड बरामद हुआ।
यह कार्रवाई STF के नशीली दवाओं के खिलाफ चल रहे अभियान की अब तक की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है। क्या यह गिरोह बांग्लादेश तक दवाओं की स्मगलिंग का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क था? आइए, इस पूरे मामले की परतें खोलते हैं।

फर्जी फर्मों का जाल: दिल्ली से बांग्लादेश तक स्मगलिंग चेन
STF के एएसपी लाल प्रताप सिंह ने बताया कि अभिषेक और शुभम शर्मा सहारनपुर के सदर बाजार, कपिल चौक क्षेत्र के निवासी हैं। ये दोनों 2019 से सक्रिय थे और शुभम जायसवाल के निर्देश पर दिल्ली की मूल कंपनी एबॉट से फेंसेडिल सिरप मंगाते थे। इन फर्मों के जरिए वे बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल होते हुए सिरप को बांग्लादेश पहुँचाते थे। गिरोह ने “चरण पादुका”, “बालाजी संजीवनी”, “मुनेश”, “विष्णु प्रिया” और “विड्डू मेडिकोज” जैसी 80 से ज्यादा फर्जी कंपनियाँ खड़ी की थीं। इनके नाम पर फर्जी बिलिंग और ई-वे बिल बनाकर तस्करी की जाती थी।
पूछताछ में अभिषेक ने कबूल किया कि वे पहले जीआर ट्रेडिंग दवा फर्म में विशाल और विभोर राणा के साथ काम करते थे, जो एबॉट की दवाओं के साथ सिरप भी मंगाते थे। 2021 में उनके कई कंसाइनमेंट पकड़े गए, और 2022 में विभोर राणा पश्चिम बंगाल में गिरफ्तार हुआ। जेल से छूटने के बाद फर्म बंद हो गई, लेकिन गिरोह ने नई फर्जी कंपनियों से तस्करी जारी रखी। STF ने कहा, “यह गिरोह नशीली दवाओं का अंतरराष्ट्रीय रूट चला रहा था। अब फंडिंग और सप्लाई चेन की पड़ताल जारी है।”

लखनऊ में घेराबंदी: आलमबाग में मुलाकात के दौरान गिरफ्तारी
गिरफ्तारी गुरुवार को आलमबाग में हुई। STF को पहले से टिप मिली थी कि दोनों भाई किसी से मिलने आ रहे थे। टीम ने घेराबंदी की, और जैसे ही वे कार से उतरे, उन्हें दबोच लिया। उनके पास से फर्जी दस्तावेजों का पूरा स्टॉक मिला। एएसपी सिंह ने बताया, “ये दोनों एबॉट के बड़े डिस्ट्रीब्यूटर रहे हैं, इसलिए सिरप मंगाना आसान था। गिरोह बांग्लादेश में नशीले बाजार को सप्लाई कर रहा था।” अब तक की कार्रवाई में यह STF की सबसे बड़ी सफलता है, और जल्द ही और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।
सहारनपुर पुलिस ने भी सहयोग किया, और दोनों को रिमांड पर लिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सदर बाजार इलाका दवा तस्करों का हॉटस्पॉट बन चुका था। एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “ये भाई सालों से सक्रिय थे, लेकिन अब खुलासा हो गया।”

तस्करी का नेटवर्क: पूर्व गिरफ्तारियों से जुड़ा कनेक्शन
पूछताछ से पता चला कि गिरोह का कनेक्शन 2021-2022 की पुरानी गिरफ्तारियों से है। जीआर ट्रेडिंग फर्म के विशाल और विभोर राणा के साथ अभिषेक काम करता था। जब फर्म बंद हुई, तो शुभम जायसवाल ने नई फर्में खड़ी कीं। STF ने कहा, “गिरोह का फंडिंग सोर्स और बांग्लादेश कनेक्शन उजागर हो रहा है। सिरप नशे के लिए इस्तेमाल होता था, जो युवाओं को बर्बाद कर रहा था।”
इस कार्रवाई से नशीली दवाओं की तस्करी पर लगाम लगेगी। STF ने अपील की कि लोग ऐसी गतिविधियों की सूचना दें। क्या यह गिरोह का पूरा नेटवर्क उजागर होगा? जांच जारी है।








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