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सहारनपुर में मेयर का गुस्सा फूटा: जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र क्लर्क पर गर्दन पकड़कर कार्रवाई, कर्मचारियों का धरना और तालाबंदी

सहारनपुर में मेयर का गुस्सा फूटा: जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र क्लर्क पर गर्दन पकड़कर कार्रवाई, कर्मचारियों का धरना और तालाबंदी

डॉ. अजय सिंह का वीडियो वायरल, सुरेंद्र बाबू अस्पताल में भर्ती; भीम आर्मी का समर्थन, निगम कार्य ठप

सहारनपुर नगर निगम में एक छोटी-सी निरीक्षण यात्रा ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। मेयर डॉ. अजय सिंह द्वारा जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र विभाग के क्लर्क सुरेंद्र बाबू पर की गई कथित अभद्रता और शारीरिक कार्रवाई का मामला अब पूरे शहर में चर्चा का विषय बन चुका है। शुक्रवार को हुई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसके बाद शनिवार को नगर निगम के कर्मचारियों ने तालाबंदी कर धरना शुरू कर दिया। आम नागरिकों का कामकाज ठप होने से हड़कंप मच गया है, और मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है। आइए, इस पूरे विवाद की परतें खोलते हैं।

सहारनपुर में मेयर का गुस्सा फूटा: जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र क्लर्क पर गर्दन पकड़कर कार्रवाई, कर्मचारियों का धरना और तालाबंदी

घटना का पूरा विवरण: निरीक्षण से शुरू हुई तनातनी

सब कुछ तब शुरू हुआ जब मेयर डॉ. अजय सिंह ने नगर निगम के जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र विभाग का अचानक निरीक्षण किया। सूत्रों के अनुसार, मेयर को विभाग में लापरवाही और देरी की शिकायतें मिल रही थीं। निरीक्षण के दौरान क्लर्क सुरेंद्र बाबू ने कथित तौर पर मेयर से अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, जिस पर मेयर का गुस्सा भड़क गया। गुस्से में आकर मेयर ने सुरेंद्र बाबू का कॉलर पकड़ लिया और उन्हें कार्यालय से बाहर धकेल दिया। यह पूरी घटना किसी ने मोबाइल पर रिकॉर्ड कर ली, जो तुरंत वायरल हो गई।

वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि मेयर सुरेंद्र बाबू को बाहर ले जाते हुए चिल्ला रहे हैं, “तुम्हारी जवाबदेही क्या है?” सुरेंद्र बाबू ने कथित तौर पर माफी मांगने से इनकार कर दिया, जिसके बाद मेयर ने उन्हें नोटिस जारी करने का आदेश दिया। लेकिन घटना यहीं नहीं रुकी। सदमे में सुरेंद्र बाबू की तबीयत बिगड़ गई, और उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। डॉक्टरों के अनुसार, उनका ब्लड प्रेशर हाई हो गया था, और वे अभी भी अवलोकन में हैं।

सहारनपुर में मेयर का गुस्सा फूटा: जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र क्लर्क पर गर्दन पकड़कर कार्रवाई, कर्मचारियों का धरना और तालाबंदी

मेयर डॉ. अजय सिंह ने बाद में सफाई दी कि उनकी मंशा कर्मचारियों को जागरूक करने की थी, न कि मारपीट की। उन्होंने कहा, “विभाग में लापरवाही की शिकायतें आ रही थीं, और सुरेंद्र बाबू ने जवाब देने के बजाय गाली दी। मैंने सिर्फ उन्हें बाहर ले जाकर समझाने की कोशिश की।” लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि यह अमर्यादित व्यवहार था, जो सरकारी नौकरियों में स्वीकार्य नहीं।

कर्मचारियों का आक्रोश: तालाबंदी और धरना प्रदर्शन

घटना के अगले दिन, शनिवार सुबह, नगर निगम के कर्मचारियों ने खुलकर विद्रोह कर दिया। सुबह 10 बजे से ही निगम के सभी विभागों के ताले लटका दिए गए। जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, संपत्ति कर, लाइसेंस, स्वच्छता, और अन्य सेवाएँ पूरी तरह ठप हो गईं। सैकड़ों कर्मचारी निगम परिसर में इकट्ठा होकर धरने पर बैठ गए, और नारेबाजी शुरू हो गई: “मेयर इस्तीफा दो, कर्मचारियों का सम्मान दो!”

कर्मचारी यूनियन के नेता ने बताया, “मेयर ने सुरेंद्र बाबू के साथ न केवल अभद्रता की, बल्कि शारीरिक हिंसा भी की। जब सुरेंद्र ने माफी मांगने से इनकार किया, तो मेयर ने उन्हें निलंबित करने का लेटर भी भेज दिया। यह अत्याचार है। जब तक मेयर सार्वजनिक माफी नहीं मांगते, हमारा धरना जारी रहेगा।” कर्मचारियों का यह भी कहना है कि मेयर लगातार शिकायतों के नाम पर अमर्यादित व्यवहार कर रहे हैं, जो निगम की कार्य संस्कृति को खराब कर रहा है।

इस धरने से आम नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। एक बुजुर्ग ने बताया, “मुझे जन्म प्रमाणपत्र बनवाना था, लेकिन ताला लगा देखकर वापस लौटना पड़ा। यह शहर की सेवाओं पर सवाल उठाता है।” निगम कार्यालय के बाहर लंबी कतारें लगी रहीं, और लोग नाराजगी जता रहे थे।

राजनीतिक समर्थन: भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी का साथ

विवाद ने जल्द ही राजनीतिक रंग ले लिया। धरना स्थल पर भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता पहुँच गए, जिन्होंने कर्मचारियों को खुला समर्थन दिया। भीम आर्मी के एक नेता ने कहा, “मेयर का व्यवहार दलित-वंचित कर्मचारियों के साथ भेदभाव दर्शाता है। हम धरना का साथ देंगे और मेयर से माफी की मांग करेंगे।” आजाद समाज पार्टी के प्रतिनिधियों ने भी निगम प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि यह घटना सरकारी नौकरियों में कर्मचारियों के अधिकारों का हनन है।

इस समर्थन से धरना और मजबूत हो गया। कार्यकर्ताओं ने मेयर के खिलाफ नारे लगाए और कहा कि अगर माफी नहीं मांगी गई, तो आंदोलन को शहरव्यापी बनाया जाएगा। नगरायुक्त ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की, लेकिन कर्मचारी यूनियन ने साफ कहा कि मेयर की सार्वजनिक माफी के बिना कोई बात आगे नहीं बढ़ेगी।

मेयर का पक्ष और विभाग की प्रतिक्रिया

मेयर डॉ. अजय सिंह ने शनिवार दोपहर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा, “मैंने कभी हिंसा नहीं की, सिर्फ कर्मचारी को बाहर ले जाकर समझाया। विभाग में भ्रष्टाचार और लापरवाही की शिकायतें आ रही थीं, और सुरेंद्र बाबू ने जवाब देने के बजाय गाली दी। नोटिस जारी करना मेरा अधिकार है।” मेयर ने कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की और कहा कि यह “अनुशासनहीनता” नहीं चलेगी।

नगरायुक्त ने बताया कि विभाग ने सुरेंद्र बाबू को नोटिस जारी किया है और जांच कमिटी गठित की गई है। लेकिन कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यह जांच निष्पक्ष नहीं होगी, क्योंकि मेयर का दबाव रहेगा। स्वास्थ्य विभाग ने सुरेंद्र बाबू की मेडिकल रिपोर्ट मांगी है, जो सदमे और उच्च रक्तचाप की पुष्टि कर रही है।

घटना का प्रभाव: सेवाएँ ठप, शहर में हड़कंप

निगम कार्यालय बंद होने से शहरवासियों को भारी परेशानी हो रही है। जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, संपत्ति कर भुगतान, लाइसेंस नवीनीकरण, और स्वच्छता सेवाएँ प्रभावित हैं। एक दुकानदार ने कहा, “मेरा लाइसेंस खत्म हो रहा है, लेकिन ताला लगा देखकर क्या करूँ?” इस विवाद से निगम का इमेज भी खराब हो रहा है, और स्थानीय राजनीति में यह मुद्दा गरमाता जा रहा है। विपक्षी दल भी मेयर पर हमलावर हो गए हैं।

आगे क्या? माफी की मांग और संभावित समाधान

कर्मचारी यूनियन ने साफ कर दिया है कि माफी न मांगी गई तो धरना अनिश्चितकालीन होगा। मेयर ने कहा है कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन नोटिस वापस नहीं लेंगे। नगरायुक्त मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मामला कोर्ट तक पहुँच सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना सरकारी नौकरियों में कार्य संस्कृति पर सवाल उठाती है।

सहारनपुर की यह घटना सिर्फ एक विभाग की नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही को उजागर करती है। क्या मेयर माफी मांगेंगे, या धरना और तेज होगा? शहरवासी इंतजार कर रहे हैं। अगर आप भी इस मामले से प्रभावित हैं, तो कमेंट में अपनी राय शेयर करें।

रिपोर्टर: जोगेंद्र कल्याण, सहारनपुर फीड
स्थान: सहारनपुर, उत्तर प्रदेश

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