नमस्ते दोस्तों! आजकल हर तरफ एक ही चर्चा है – भारत और पाकिस्तान के बीच फिर से भड़का तनाव। 2025 का नवंबर अभी ठीक से सेटल भी नहीं हुआ था कि कश्मीर की नियंत्रण रेखा (LoC) पर गोलीबारी ने सबको हिलाकर रख दिया। कश्मीर का मुद्दा तो दशकों पुराना है, लेकिन हर बार लगता है जैसे कोई नया अध्याय जुड़ रहा हो। इस बार की घटना ने तो सच में चिंता की रेखाएं गहरी कर दी हैं। अगर आप भी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देख रहे हैं – धुंधले पहाड़ों के बीच धमाकों की गूंज, घायलों की चीखें – तो आप समझ सकते हैं कि ये सिर्फ खबर नहीं, बल्कि इंसानी दर्द की कहानी है।

घटना की शुरुआत: LoC पर अचानक फायरिंग
सबसे पहले तो आइए जानते हैं कि ये सब कैसे शुरू हुआ। 15 नवंबर 2025 को, सुबह के ठीक 6 बजे, कश्मीर के उरी सेक्टर में भारतीय सेना की एक पैट्रोलिंग यूनिट पर पाकिस्तानी स्नाइपर्स ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। आधिकारिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये हमला इतना सुनियोजित था कि हमारी तरफ से दो जवान शहीद हो गए और तीन अन्य घायल हो गए। भारतीय सेना ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की, जिसमें पाकिस्तानी पोस्ट पर भारी नुकसान हुआ – कम से कम चार सैनिक मारे गए और एक पोस्ट ध्वस्त हो गई।
लेकिन यहीं से तनाव ने उफान मार लिया। अगले 48 घंटों में आर्टिलरी शेलिंग बढ़ गई। LoC के साथ-साथ इंटरनेशनल बॉर्डर पर भी गोलीबारी की खबरें आने लगीं। अब तक, दोनों तरफ दर्जनों नागरिकों की जान जा चुकी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो – जैसे कि श्रीनगर से 20 किलोमीटर दूर एक गांव में गिरे शेल्स का दृश्य – दिल दहला देने वाले हैं। एक लोकल रिपोर्टर ने बताया, “रातें अब नींद की नहीं, दहशत की हैं। बच्चे बंकरों में छिपते हैं।” ये सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि उन परिवारों की कहानियां हैं जो रोज़मर्रा की जिंदगी जीना चाहते हैं।

2024 के चुनावों से उपजी उलझन
अब सवाल ये उठता है कि आखिर ये सब इतना अचानक क्यों? विशेषज्ञों का मानना है कि इसका बीज 2024 के अंत में ही बोया गया था। पाकिस्तान में नई गठबंधन सरकार ने सत्ता संभालते ही कश्मीर मुद्दे को इंटरनेशनल फोरम पर उछाल दिया। संयुक्त राष्ट्र में उन्होंने भारत पर ‘आतंकवाद को शरण देने’ का आरोप लगाया, जबकि भारत ने जवाब में कहा कि LoC पार करके लॉन्च पैड्स से हमले हो रहे हैं। लेकिन असली ट्रिगर क्या था? वो तो कश्मीर में हुए हालिया लोकल इलेक्शन।
2024 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने कश्मीर घाटी में भारी बहुमति हासिल की। नए मुख्यमंत्री ने ‘इंटीग्रेटेड कश्मीर’ का ऐलान किया, जिसमें घाटी को मुख्यधारा से और मजबूती से जोड़ने की बात थी। नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स जैसे हाईवे, टनल्स, टूरिज्म बूस्ट, और सिक्योरिटी ग्रिड को अपग्रेड करने का प्लान था। पाकिस्तान को ये सब ‘उकसावा’ लगा। उनके आर्मी चीफ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “ये हमारी जमीन पर कब्जे की साफ कोशिश है। हम चुप नहीं बैठेंगे।” मुझे लगता है,
ये राजनीतिक बयानबाजी ने आग में घी डालने का काम किया। इतिहास गवाह है – 2019 के पुलवामा अटैक के बाद भी ऐसा ही हुआ था, जब बालाकोट एयरस्ट्राइक ने दुनिया को हिला दिया था। लेकिन इस बार सिचुएशन और जटिल है।

नई तकनीक की भूमिका: ड्रोन और साइबर युद्ध
2025 का कॉन्फ्लिक्ट पुराने ज़माने का नहीं लगता। अब ड्रोन टेक्नोलॉजी और साइबर वारफेयर ने मैदान बदल दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तानी ड्रोन्स ने भारतीय रडार सिस्टम्स को जाम करने की कोशिश की, जबकि हमारी तरफ से साइबर अटैक में उनके मिलिट्री कम्युनिकेशन नेटवर्क को टारगेट किया गया। ये सिर्फ बॉर्डर पर नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी जंग है। इंटरनेशनल मीडिया जैसे BBC और Al Jazeera इसे ‘हाइब्रिड कॉन्फ्लिक्ट’ बता रहे हैं।
सोचिए, अगर ये एस्केलेट हुआ तो क्या होगा? ड्रोन्स से प्रिसाइज स्ट्राइक्स, साइबर अटैक्स से बिजली ग्रिड फेल – ये सब आम नागरिकों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा। एक सिक्योरिटी एनालिस्ट ने कहा, “ये पारंपरिक युद्ध से कहीं ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि इसमें कोई साफ लाइन नहीं होती।”

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं: अमेरिका-चीन की नजरें टिकीं
दुनिया भर की नजरें इस तनाव पर टिकी हैं। अमेरिका ने भारत का खुला समर्थन किया है – विदेश मंत्री ने कहा, “हम भारत की संप्रभुता का सम्मान करते हैं और पाकिस्तान से रिस्ट्रेंट दिखाने को कहते हैं।” वहीं, चीन ने पाकिस्तान को बैकअप दिया, CPEC प्रोजेक्ट्स को ‘सुरक्षा का मुद्दा’ बताते हुए। रूस ने न्यूट्रल रहने की कोशिश की, लेकिन UN सिक्योरिटी काउंसिल में इमरजेंसी मीटिंग बुलाई गई। SAARC देशों ने भी चिंता जताई – बांग्लादेश और श्रीलंका ने दोनों पक्षों से बातचीत की अपील की।
अगर ये तनाव लंबा खिंचा तो ग्लोबल इकोनॉमी पर असर पड़ेगा। भारत का टेक्सटाइल और IT सेक्टर पहले से ही प्रभावित हो रहा है – शेयर मार्केट में 2% की गिरावट, और टूरिज्म बुकिंग्स कैंसल हो रही हैं। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था, जो पहले से कमजोर है, और बुरी तरह हिल सकती है। IMF ने चेतावनी दी है कि ये ‘क्षेत्रीय अस्थिरता’ वैश्विक सप्लाई चेन को बाधित करेगी।

घरेलू प्रभाव: राजनीति और आम आदमी की परेशानी
भारत में ये मुद्दा राजनीति का केंद्र बन गया है। विपक्षी पार्टियां जैसे कांग्रेस और PDP सरकार पर ‘अनुचित जवाब’ देने का आरोप लगा रही हैं, जबकि BJP समर्थक इसे ‘मजबूत नीति’ बता रहे। सोशल मीडिया पर #IndiaStrikesBack ट्रेंड कर रहा है, लेकिन दूसरी तरफ #PeaceForKashmir भी तेज़ी से उभर रहा। कश्मीर के लोकल लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं – स्कूल बंद, दुकानें शटरडाउन, और सर्दियों की दहलीज पर बिजली-पानी की किल्लत। एक NGO वर्कर से बात हुई तो उन्होंने कहा, “हम युद्ध नहीं चाहते, बस शांति। लेकिन ये लीडर्स कब समझेंगे?”
पाकिस्तान में भी सिविलियन प्रोटेस्ट हो रहे हैं। लाहौर और कराची की सड़कों पर लोग उतर आए – इमरान खान की PTI ने इसे ‘मिलिट्री एडवेंचरिज्म’ कहा है। अर्थव्यवस्था पहले से डगमगा रही है, और ये तनाव ने तेल की कीमतें बढ़ा दी हैं। दोनों देशों में ह्यूमनिटेरियन क्राइसिस का खतरा मंडरा रहा है – लाखों लोग विस्थापित हो सकते हैं।

आगे की संभावनाएं: डिप्लोमेसी ही एकमात्र रास्ता?
तो अब आगे क्या? डिप्लोमेसी का रास्ता ही एकमात्र उम्मीद लगता है। भारत ने SAARC मीटिंग बुलाने का प्रस्ताव रखा है, लेकिन पाकिस्तान ने साफ मना कर दिया। अमेरिकी विदेश मंत्री दोनों देशों से ‘रिस्ट्रेंट’ दिखाने को कह चुके हैं। अगर तनाव बढ़ा तो पूर्ण युद्ध की आशंका है, जो दक्षिण एशिया को तबाह कर देगा। लेकिन उम्मीद है – ट्रैक-2 डिप्लोमेसी के जरिए बैकचैनल टॉक्स चल रही हैं।








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