आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बरेलवी समाज के बड़े आलिम मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों की वो हकीकी वजह बता दी, जिसे अभी तक ज्यादातर सियासी पंडित नहीं समझ पाए हैं।
मौलाना ने साफ-साफ कहा:
“बिहार में नीतीश कुमार और NDA की भारी जीत और महागठबंधन की करारी हार की सबसे बड़ी वजह बरेलवी-देवबंदी ध्रुवीकरण था।”
क्या हुआ था बिहार में?
- वक्फ संशोधन बिल पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (जिसमें देवबंदी उलेमा हावी हैं) ने जबरदस्त विरोध किया था।
- रमजान में नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री आवास पर बड़ी रोजा इफ्तार पार्टी रखी।
- देवबंदी उलेमा ने दावत ठुकराई और इफ्तार का बायकॉट कर दिया।
- वहीं बरेलवी उलेमा ने बड़ी तादाद में इफ्तार में शिरकत की।
- इसके बाद इदार-ए-शरईया (बरेलवी संस्था) के नेताओं को बिहार सरकार में अहम ओहदे दिए गए।
नतीजा?
बिहार के 60% बरेलवी मुसलमान नीतीश कुमार के साथ खड़े हो गए, जबकि देवबंदी वोट महागठबंधन (राजद-कांग्रेस) के खाते में चला गया।
बरेलवी वोट की इसी ताकत ने पूरा चुनाव पलट दिया!

2027 यूपी चुनाव पर बरेलवी समाज को बड़ा संदेश
मौलाना ने अखिलेश यादव को सीधा मैसेज देते हुए कहा:
“अखिलेश यादव कुछ दिन पहले बरेली आए, गली-गली घूमे, लेकिन दरगाह आला हजरत पर हाजिरी देने नहीं आए।
ये उत्तर प्रदेश के 60% सुन्नी बरेलवी मुसलमानों को बहुत तकलीफ हुई।
सहारनपुर जाते हैं तो दारुल उलूम देवबंद जरूर जाते हैं,
हर साल लखनऊ में नदवा जाते हैं,
लेकिन बरेली की दरगाह आला हजरत अब तक कभी नहीं आए।
इतनी बड़ी आबादी को नजरअंदाज करना 2027 में बहुत भारी पड़ेगा।”

मौलाना का साफ कहना है –
बरेलवी समाज अब चुप नहीं बैठेगा। जो सम्मान देगा, वही वोट लेगा।
बिहार ने दिखा दिया कि बरेलवी वोटबैंक अब ‘साइलेंट मेजॉरिटी’ नहीं, ‘डिसाइडिंग मेजॉरिटी’ बन चुका है।
यूपी की सियासत में 2027 से पहले ये बयान बम की तरह फटने वाला है!
जय हिंद








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