गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में पुलिस ने चोरी और मोबाइल स्नैचिंग की बढ़ती घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया। इस अभियान के तहत विभिन्न थानों की सर्विलांस और स्वॉट टीमों ने मिलकर कुल 200 मोबाइल फोन बरामद किए, जिनकी बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 50 लाख रुपये बताई जा रही है। सभी बरामद फोन उनके असली मालिकों की पहचान करने के बाद उन्हें सौंप दिए गए। यह कार्रवाई न सिर्फ पुलिस की तकनीकी क्षमता का प्रमाण है, बल्कि आम जनता में विश्वास बढ़ाने का भी एक मजबूत कदम है।
अभियान की पृष्ठभूमि और शुरुआत
पिछले कुछ महीनों में गाजियाबाद शहर में मोबाइल चोरी और स्नैचिंग की शिकायतें तेजी से बढ़ी थीं। कनावनी नगर, विजयनगर, साहिबाबाद जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में दिनदहाड़े फोन छीनने की घटनाएं आम हो गई थीं। कई पीड़ितों ने थानों में एफआईआर दर्ज कराई, लेकिन फोन की वापसी की उम्मीद कम ही थी। इसी को देखते हुए गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट ने एक विशेष अभियान शुरू किया।
इस अभियान का नेतृत्व डीसीपी सिटी धवल जसवाल के निर्देशन में हुआ। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए कि सीआईआई (Central Equipment Identity Register) पोर्टल पर उपलब्ध डेटा का पूरा उपयोग किया जाए। सीआईआई एक केंद्रीय डेटाबेस है, जिसमें चोरी हुए मोबाइल फोनों का IMEI नंबर दर्ज होता है। जैसे ही कोई चोरी का फोन नेटवर्क से कनेक्ट होता है, उसकी लोकेशन ट्रेस की जा सकती है।
तकनीक और टीमवर्क का अनोखा संगम
पुलिस ने सर्विलांस टीम के साथ-साथ स्वॉट (Special Weapons and Tactics) टीम को भी इस काम में लगाया। दोनों टीमों ने तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से चोरी हुए फोनों की रीयल-टाइम लोकेशन ट्रेस की। कई फोन दिल्ली, नोएडा और मेरठ के आसपास के इलाकों में सक्रिय पाए गए। पुलिस ने रेड मारकर इन फोनों को बरामद किया। कुछ मामलों में फोन खरीदने वालों को भी हिरासत में लिया गया और उनसे पूछताछ की गई।
इस पूरी प्रक्रिया में मोबाइल ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर, IMEI चेकर और जीपीएस एनालिसिस का भरपूर इस्तेमाल हुआ। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कई फोन सेकंड-हैंड मार्केट में बेचे जाने की फिराक में थे, लेकिन समय रहते उन्हें पकड़ लिया गया।
थाना-वार बरामदगी का पूरा ब्यौरा
अभियान में शामिल सात थानों ने मिलकर यह सफलता हासिल की। नीचे थाना-वार बरामद फोनों की संख्या दी गई है:
| थाना नाम | बरामद मोबाइल फोन |
|---|---|
| कनावनी नगर | 50 |
| विजयनगर | 50 |
| टीला मोड़ | 16 |
| नंदग्राम | 28 |
| कविनगर | 24 |
| मधुबन बापूधाम | 24 |
| साहिबाबाद | 8 |
| कुल | 200 |
सबसे ज्यादा बरामदगी कनावनी नगर और विजयनगर थानों ने की, जहाँ स्नैचिंग की घटनाएँ सबसे अधिक दर्ज की गई थीं।
फोन वापसी का भावुक पल
फोन लौटाने का कार्यक्रम थाना परिसर में आयोजित किया गया। एक-एक कर पीड़ितों को बुलाया गया, उनकी पहचान सत्यापित की गई और फिर फोन सौंपा गया। इस दौरान कई लोग भावुक हो गए। शीलकी शर्मा, जो विजयनगर की रहने वाली हैं, ने बताया,
“मेरा फोन 6 महीने पहले बस स्टैंड पर छिन गया था। उसमें मेरी सारी तस्वीरें, कॉन्टैक्ट्स और जरूरी दस्तावेज थे। मैंने उम्मीद छोड़ दी थी। आज पुलिस ने जो किया, उसके लिए मैं जीवनभर आभारी रहूँगी।”
इसी तरह फराज खान, जो कनावनी नगर में छोटा बिजनेस चलाते हैं, ने कहा,
“मेरा फोन लूटा गया था। उसमें मेरा पूरा बिजनेस डेटा था। आज फोन वापस मिला तो लगा जैसे मेरा कारोबार फिर से शुरू हो गया। गाजियाबाद पुलिस को मेरा सलाम।”

डीसीपी का बयान: अभियान जारी रहेगा
मीडिया से बातचीत में डीसीपी सिटी धवल जसवाल ने कहा,
“हमारा मकसद सिर्फ अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि पीड़ितों को न्याय दिलाना भी है। यह अभियान कोई एक दिन का नहीं है। हम लगातार सीआईआई पोर्टल की मॉनिटरिंग करेंगे और चोरी के हर फोन को ट्रेस कर उसके मालिक तक पहुँचाएंगे। जनता से अपील है कि चोरी होने पर तुरंत एफआईआर दर्ज कराएँ और IMEI नंबर जरूर नोट करें।”
उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले दिनों में मोबाइल जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिसमें लोगों को फोन की सुरक्षा के टिप्स दिए जाएंगे। जैसे – स्क्रीन लॉक, एंटी-थेफ्ट ऐप्स का इस्तेमाल, और संदिग्ध सेकंड-हैंड खरीदारी से बचना।

भविष्य की योजनाएँ और जनता से अपील
गाजियाबाद पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान चरणबद्ध तरीके से पूरे जिले में चलेगा। अगले चरण में दोपहिया वाहन चोरी, ऑटो पार्ट्स चोरी और घरेलू चोरी की वस्तुओं पर फोकस होगा। साथ ही, पुलिस सोशल मीडिया पर एक हेल्पलाइन नंबर और व्हाट्सएप ग्रुप शुरू करने जा रही है, जहाँ लोग चोरी की शिकायत तुरंत कर सकें।
पुलिस ने जनता से सहयोग की अपील की है। यदि आपके पास कोई चोरी का फोन है या आपने सेकंड-हैंड बाजार से सस्ता फोन खरीदा है, तो उसे तुरंत थाने में जमा करें। अन्यथा कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
निष्कर्ष: पुलिस और जनता का मजबूत रिश्ता
यह अभियान सिर्फ 200 फोन की वापसी नहीं, बल्कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास की नई मिसाल है। गाजियाबाद जैसे तेजी से बढ़ते शहर में अपराध नियंत्रण एक बड़ी चुनौती है, लेकिन तकनीक और मेहनत से इसे हराया जा सकता है। उम्मीद है कि यह सफलता अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।







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