नई दिल्ली। 5 नवंबर 2025 को भारत के क्रिकेट इतिहास के सबसे चमकते सितारों में से एक, विराट कोहली ने अपना 37वां जन्मदिन मनाया। दिल्ली के राजा हरिशचंद्र अस्पताल में 5 नवंबर 1988 को जन्मे विराट ने अपनी मेहनत, लगन और जुनून से न केवल क्रिकेट जगत को जीता, बल्कि करोड़ों युवाओं को प्रेरित किया। आज उनके जन्मदिन पर हम एक नजर डालते हैं उनकी जीवन चक्र, शिक्षा और उल्लेखनीय करियर पर, जो संघर्षों से भरी एक प्रेरक गाथा है।

शुरुआती जीवन: संघर्षों से भरी नींव
विराट कोहली का जन्म दिल्ली के उत्साहनगर इलाके में एक पंजाबी ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता प्रेम कोहली क्रिकेटर थे और दिल्ली क्रिकेट एसोसिएशन (DCA) में काम करते थे, जबकि मां सरोज कोहली एक गृहिणी थीं। बचपन से ही क्रिकेट के प्रति उनका जुनून देखते ही बनता था। मात्र तीन साल की उम्र में उन्होंने बल्ला हाथ में थाम लिया था। लेकिन जीवन ने जल्द ही कठोर परीक्षा ली। 2006 में, जब विराट मात्र 18 साल के थे, उनके पिता का निधन हो गया। उस रात ही एक मैच खेलने दिल्ली लौटे विराट ने दुख के बावजूद हार नहीं मानी।
यह घटना उनकी जिंदादिली का प्रतीक बनी। बड़े भाई विकास और बहन भावना के साथ बड़ा होने वाले विराट ने हमेशा परिवार को प्राथमिकता दी। आज 37 साल की उम्र में, वे एक खुशहाल पारिवारिक जीवन जी रहे हैं – पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ उनकी दो संतानें वामिका और अका भी हैं। विराट का जीवन चक्र संघर्ष से सफलता, पारिवारिक समर्थन से वैश्विक प्रसिद्धि तक का सफर है, जो बताता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से कोई सपना असंभव नहीं।
शिक्षा: क्रिकेट के बीच किताबों का साथ
विराट कोहली ने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली के विश्व भारती पब्लिक स्कूल से पूरी की, जहां वे 10वीं कक्षा तक पढ़े। खेलों के प्रति उनका झुकाव इतना था कि पढ़ाई अक्सर पीछे रह जाती, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। स्कूल के दिनों में ही उन्होंने दिल्ली अंडर-15 टीम के लिए डेब्यू किया। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने सर वल्लभभाई पटेल विश्वविद्यालय से बी.कॉम की डिग्री हासिल की, हालांकि क्रिकेट की व्यस्तता के कारण यह सफर चुनौतीपूर्ण रहा। विराट अक्सर कहते हैं कि शिक्षा ने उन्हें अनुशासन सिखाया, जो मैदान पर उनकी फिटनेस और मानसिक मजबूती का आधार बनी। आज वे युवाओं को संदेश देते हैं कि पढ़ाई और खेल दोनों संतुलित रखें, क्योंकि ज्ञान ही सच्ची ताकत है।

करियर: ‘चेज मास्टर’ से वैश्विक आइकन तक
विराट का क्रिकेट करियर एक परी कथा जैसा है। 2006 में दिल्ली अंडर-15 टीम के साथ रणजी ट्रॉफी में डेब्यू करने वाले इस लड़के ने 2008 में आईसीसी अंडर-19 विश्व कप जीतकर दुनिया का ध्यान खींचा। कप्तानी में भारत को खिताब दिलाने वाले वे हीरो बने।
घरेलू और आईपीएल सफर: दिल्ली के लिए रणजी ट्रॉफी में डेब्यू के बाद, 2008 में आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (आरसीबी) ने उन्हें खरीदा। आरसीबी के लिए 250 से अधिक मैच खेल चुके विराट ने 2024 तक कप्तानी की, और आज भी वे टीम के स्तंभ हैं। उनका आईपीएल रिकॉर्ड – 7,000 से अधिक रन – उन्हें लीग के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में शुमार करता है।
अंतरराष्ट्रीय करियर: 2011 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे डेब्यू करने वाले विराट ने उसी साल वर्ल्ड कप जीता। टेस्ट में 2014 में कप्तान बने और 2022 तक लाल गेंद का नेतृत्व किया। टी20 में 2024 तक कप्तान रहे। आंकड़े बोलते हैं: 117 टेस्ट में 9,000+ रन (29 शतक), 302 वनडे में 13,000+ रन (50 शतक), और 125 टी20 में 4,000+ रन। वे वनडे और टी20 में सबसे तेज 10,000-10,000 रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं।
विराट को ‘चेज मास्टर’ कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने 100 से अधिक बार 40+ रन से मैच चेज किया। 2023 एशेज सीरीज में उनके शतक ने सुर्खियां बटोरीं, जबकि 2024 ओलंपिक क्वालीफायर में भारत की जीत में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा। फिटनेस के लिए मशहूर विराट ने अपनी डाइट और वर्कआउट से क्रिकेट की नई मिसाल कायम की। पुरस्कारों की बात करें तो – अर्जुन अवॉर्ड (2013), पद्म श्री (2017), ICC ODI प्लेयर ऑफ द डिकेड (2020) – ये उनकी महानता के प्रमाण हैं।
विराट की विरासत: प्रेरणा का स्रोत
37वें जन्मदिन पर विराट ने सोशल मीडिया पर लिखा, “जीवन एक मैच की तरह है – कभी हार, कभी जीत, लेकिन कभी हार मत मानो।” उनके जीवन से सीख मिलती है कि साधारण शुरुआत से असाधारण ऊंचाइयां हासिल की जा सकती हैं। चाहे मैदान पर उनका आक्रामक बल्लेबाजी हो या मैदान से बाहर सामाजिक कार्य – जैसे फाउंडेशन के जरिए शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए योगदान – विराट एक पूर्ण व्यक्तित्व हैं।
क्रिकेट प्रेमी उनके लंबे और स्वस्थ करियर की कामना करते हैं। जन्मदिन मुबारक हो, किंग कोहली! आपकी कहानी हर संघर्षशील युवा के लिए रोशनी की किरण है।








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