सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक जिंदा युवक को सरकारी रिकॉर्ड में “मृत” दिखाकर उसका पोस्टमॉर्टम करवा दिया गया। अब पीड़ित युवक, शाहनजर, सिस्टम में अपनी जिंदा होने की पहचान बहाल करने के लिए एसएसपी कार्यालय के चक्कर काट रहा है। उसकी गुहार है, “साहब! मैं जिंदा हूं, लेकिन कागजों में मुझे मरा हुआ बता दिया गया।”
क्या है पूरा मामला?
बड़गांव थाना क्षेत्र के अंबेहटा मोहन गांव निवासी शाहनजर ने मंगलवार को सहारनपुर एसएसपी कार्यालय पहुंचकर अपनी आपबीती सुनाई। डेढ़ साल पहले, गांव के ही 15 वर्षीय नाबालिग साहिब की मुंबई में संदिग्ध परिस्थितियों में तीसरी मंजिल से गिरकर मौत हो गई थी। आरोप है कि इस घटना को छिपाने के लिए ठेकेदार मोबिन ने साहिब की जगह शाहनजर के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी करवाई। अस्पताल के रिकॉर्ड में मृतक का नाम शाहनजर दर्ज हो गया, जबकि शव को गांव लाकर साहिब के नाम पर दफनाया गया।
शाहनजर की आपबीती
शाहनजर का कहना है कि ठेकेदार मोबिन ने उसके आधार कार्ड का दुरुपयोग कर फर्जीवाड़ा किया। “अब सरकारी सिस्टम में मैं ‘मृत’ दिख रहा हूं। इस वजह से मुझे नौकरी, सरकारी योजनाओं और कागजातों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मेरी जिंदगी नरक बन गई है,” शाहनजर ने दुखी मन से बताया।

मृतक के परिजनों का गंभीर आरोप
मृतक साहिब के परिवार ने ठेकेदार मोबिन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है, “मोबिन ने हमारे नाबालिग बेटे की हत्या की और फिर फर्जीवाड़ा कर पुलिस को गुमराह किया। उसने हमसे जबरन कोरे कागजों पर अंगूठे लगवाए।” परिवार ने इस पूरे मामले को एक सुनियोजित साजिश करार दिया है।

पुलिस ने शुरू की जांच
सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच के आदेश दे दिए हैं। महाराष्ट्र पुलिस से समन्वय कर मुंबई के अस्पताल और पोस्टमॉर्टम की फाइल मंगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एसएसपी ने कहा, “पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अस्पताल के रिकॉर्ड की गहन जांच की जाएगी। आरोपी ठेकेदार मोबिन की भूमिका की भी तह तक जाकर पड़ताल होगी।”
परिवार और पीड़ित की मांग
- ठेकेदार मोबिन के खिलाफ हत्या, धोखाधड़ी और साजिश की धाराओं में केस दर्ज हो।
- शाहनजर की पहचान और सभी सरकारी दस्तावेज बहाल किए जाएं।
- दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।

कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है। यह हत्या, सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी और गंभीर आपराधिक साजिश का मामला है। विशेषज्ञों ने इसे “सिस्टम की खामियों का खतरनाक दुरुपयोग” करार दिया है।
आगे क्या?
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अगर शाहनजर और मृतक के परिवार के आरोप सही पाए गए, तो ठेकेदार मोबिन के खिलाफ हत्या, धोखाधड़ी और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हो सकता है। साथ ही, शाहनजर की पहचान को बहाल करने के लिए प्रशासन को तत्काल कदम उठाने होंगे।
यह मामला न केवल एक व्यक्ति की जिंदगी से जुड़ा है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि सिस्टम में ऐसी चूक कैसे हो सकती है, जहां एक जिंदा इंसान को “मृत” घोषित कर दिया जाए।








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